फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   agra news bah khajla

Agra News: लाजवाब है बटेश्वर मेले के खजले का जायका

Wed, 12 Nov 2025 02:20 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 12 Nov 2025 02:20 AM IST
विज्ञापन
agra news bah khajla
बटेश्वर में खजला की दुकान
सजी है नमकीन, मीठे, खोआ वाले खजले की दुकानें, खरीदे बिना नहीं लौटते श्रद्धालु बाह। बटेश्वर मेला जितना पुराना है, उतनी ही पुरानी यहां पर खजला बनाने और बेचने की परंपरा है। खजला कुरकुरापन लिए परतों के लिए जाना जाता है। चासनी में पगे खजले पर चढ़ी खोआ और रबड़ी की परत इसके जायके को लाजबाव बना देती है। बटेश्वर मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालु खजले का जायके के मुरीद हैं।
विज्ञापन

बटेश्वर मेले में खजले का बाजार अलग से सजा है। दुकानों पर नमकीन, मीठे, खोआ, रबड़ी वाले खजले मिल रहे हैं। मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालु कुछ लें या न लें खजला जरूर खरीदते हैं। राजाखेड़ा की रानी, प्रमिला, अंबाह की मिथिलेश, उमाशंकर, गोविंद, भिंड के अतर सिंह, दीपक, गोमती, बाह के मान सिंह, राजीव शर्मा, बाबूराम, मीनाक्षी, राधा, ममता, फिरोजाबाद के राजकुमार गुप्ता, मनोज कुमार, रेशम देवी ने बताया कि बटेश्वर मेले में खजला खाया है। खरीद कर घर के लिए भी ले जा रहे हैं। परिवार के सभी लोगों को खजला खूब पसंद है। औरैया के खजला कारोबारी आलोक कुमार ने बताया कि मीठा खजला 150 रुपये किलो, खोआ खजला 250 से 300 रुपये किलो, रबड़ी खजला 260 से 320 रुपये किलो, नमकीन खजला 40 रुपये प्रति नग के हिसाब से बिक रहा है। संवाद
विज्ञापन




ऐसे बनता है खजला, पीढ़ी दर पीढ़ी जुटे हैं परिवार
खजला तैयार करने में मुख्य रूप से मैदा, चीनी और घी का इस्तेमाल किया जाता है। इसे छोले भटूरे की तरह पकाया जाता है। सबसे पहले मैदा या आटे को अच्छी तरह गूंथा जाता है। बेलकर कई परतें बनाई जाती है। इसके बाद तेल या घी में धीमी आग पर सुनहरा होने तक तला जाता है। कुरकुरापन आने के बाद चाशनी में डुबोया जाता है। इसके बाद खोआ या रबड़ी की परत चढ़ाई जाती हैं और बेचने के लिए दुकान पर रख दिया जाता है। इस काम को कई कारीगर पीढ़ी दर पीढ़ी अंजाम दे रहे है। इटावा के रामौतार ने तो बटेश्वर मेला में पूरा बाजार सजा रखा है। बोले चार पीढियों से इसी काम से जुड़े हुए हैं। इटावा के अरविंद कुमार 20 साल से खजले के कारोबार में जुटे हुए हैं। वैदपुरा के मनोज गुप्ता ने बताया कि वह कई वर्षों से यहां पर खजले की दुकान लगा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed