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अजब हाल: दो कमरों में चल रहीं 13 कक्षाएं, कैसे पढ़ेंगे और बढ़ेंगे ये बच्चे

Sun, 18 Dec 2022 01:26 PM IST
धीरेन्द्र सिंह रंजना शर्मा, आगरा
रंजना शर्मा, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 18 Dec 2022 01:26 PM IST
सार

 शिफ्ट किए गए कई विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। कई जगह फर्नीचर नहीं हैं, जहां फर्नीचर हैं वहां बच्चों को बैठाने तक की जगह नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि एक ही कमरे में यदि कक्षा एक से आठ तक के बच्चे होते हैं तो उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। 

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Agra news 13 classes running in two rooms how will these children study
एक ही क्लास रूम में बैठे बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार प्राथमिक विद्यालयों में सुविधाएं व शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ आलम यह है कि बच्चों के बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं है। शहर में आज भी दो कमरों में 13 कक्षाएं चल रही हैं। विभाग ने बिना व्यवस्था बनाए स्कूलों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया। इससे विद्यालयों में छात्र संख्या अधिक और बैठने की जगह कम हैं। 

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शहर में 37 विद्यालयों को शिफ्ट किया गया है। न तो शैक्षिक स्तर अच्छा हो पा रहा है, न ही बच्चों को खेल का मैदान और शौचालय उपलब्ध हो पा रहा है। कई जगह बच्चे ठंड में भी फर्श पर बैठ कर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। शिफ्ट किए गए कई विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। कई जगह फर्नीचर नहीं हैं, जहां फर्नीचर हैं वहां बच्चों को बैठाने तक की जगह नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि एक ही कमरे में यदि कक्षा एक से आठ तक के बच्चे होते हैं तो उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। 
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फर्नीचर के नाम पर केवल तीन बेंच

कंपोजिट विद्यालय नगला धनी व प्राथमिक विद्यालय नगला छिद्दा दोनों एक ही भवन में संचालित हैं। 13 कक्षाओं के छात्र केवल दो कमरों में पढ़ रहे हैं। वैसे विद्यालय में कुल पांच कमरे हैं। छोटे कमरे में कार्यालय है। दूसरे में बच्चों के लिए मिड डे मील बनता है। तीसरे में विद्यालय का सामान रखा है। बचे दो कमरों में बच्चे पढ़ते हैं। 200 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। विद्यालय इंचार्ज रामकिशन शर्मा ने बताया कि विद्यालयों में फर्नीचर के नाम पर विभाग से कुल तीन बेंच आई हैं। 

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बसई कला में नहीं है पढ़ाई का कमरा

प्राथमिक विद्यालय बसई कला की हालत तो और खराब है। यहां कक्षा चलाने के लिए कमरा ही नहीं है। 80 से अधिक छात्र पंजीकृत हैं। केवल एक बरामदा है। जहां बच्चे पढ़ते हैं। सर्दी, गर्मी, बारिश बच्चे यहीं या फिर खुले आसमान के नीचे पढ़ते हैं। बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं। 

बच्चों की जान राम भरोसे

प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की जान राम भरोसे है। कमरों की छत का प्लास्टर गिर रहा है। बरामदे की बल्लियां गिरी हैं। 70 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालय नगला पदमा में दो कमरे और एक अतिरिक्त कक्ष है। बारिश के समय पानी टपकता है, दीवारें सील रही हैं। यहां भी बच्चों को हर वक्त खतरा बना रहता है। 

ये बोले अधिकारी

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि  विद्यालयों को बच्चों की पहुंच के आधार पर शिफ्ट किया गया है। सुविधा के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। थोड़ा समय लग रहा है। जल्द इन समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा। 

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