आगरा में 'कचरा' व्यवस्था: हर घर से कूड़ा उठा या नहीं, यह जानने के लिए फूंक दिए 20 करोड़ रुपये
आगरा में आरएफआईडी टैग लगाकर स्कैनिंग, जीपीएस लगाकर मॉनीटरिंग की योजना फेल हो गई है। इस योजना पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। मकसद यह जानना था कि हर घर से कूड़ा उठाया गया है या नहीं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
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आगरा में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था में कर्मचारियों ने हर घर से कचरा उठाया या नहीं, इसकी डिजिटल मॉनीटरिंग के लिए 20 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। लेकिन अक्तूबर 2019 से अब तक घरों के बाहर लगे रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरएफआईडी) टैग की स्कैनिंग नहीं हो पाई।
शहर के साढ़े तीन लाख घरों, प्रतिष्ठानों के बाहर आरएफआईडी टैग लगाए गए थे, जिन्हें स्कैन करने पर कंट्रोल एंड कमांड सेंटर पर ही यह पता चल जाता कि किस घर से कचरा उठाया है या नहीं। ऐसे टैग अब टूट गए और स्कैनर खराब पड़े हैं। 20 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद सफाई की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर ही चल रही है, जिसकी मॉनीटरिंग ही नहीं हो पा रही।
एक साल पहले स्कैनर दिए, तीन दिन में ही ट्रायल बंद
आरएफआईडी टैग की स्कैनिंग बंद होने पर बीते साल 29 जुलाई को अपर नगर आयुक्त केबी सिंह ने स्कैनर फिर से शुरू करने के निर्देश दिए, लेकिन तीन दिन में ही ट्रायल बंद हो गया। मोतीकटरा के घरों की स्कैनिंग पर उसका ब्योरा घटिया आजम खां में दर्ज हो रहा था।
स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने नगर निगम को यह स्कैनर दिए थे। स्मार्ट सिटी के तहत ही नगर निगम ने घरों के बाहर रेडियो फ्रीक्वेंसी वाले टैग लगाए, जो पहले कचरा प्रबंधन और बाद में हाउस टैक्स, सीवर टैक्स, जलकर की भी जानकारी दे सकते थे।
जहां सीएम की बैठक, 300 मीटर दूर सड़क को बनाया डलाबघर
फतेहाबाद रोड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस होटल में रविवार को आए थे, उससे महज 300 मीटर दूर सड़क पर ही डलाबघर बना दिया गया। पर्यटन थाने वाली रोड पर 200 मीटर तक सड़क के हिस्से में कचरा डंप किया जा रहा है। यहां से 12 कॉलोनियों, अपार्टमेंट के लोग और पर्यटन थाने के पुलिसकर्मी, पीड़ित निकलते हैं।
दुर्गंध के कारण यहां से निकलने में लोग परेशान हैं। नगर निगम ने फतेहाबाद रोड पर मुख्यमंत्री के आगमन पर एक-एक तिनका बीनने के लिए सफाई कर्मचारी लगाए थे, लेकिन 300 मीटर दूर सड़क कचरे के कारण बदहाल कर दी।
'एक साल से डाल रहे कचरा'
ताजनगरी निवासी सुमित उपाध्याय ने बताया कि एक साल से लगातार अवैध रूप से सड़क पर कचरा फेंका जा रहा है। यहां से हर दिन निकलने पर परेशानी होती है। शिकायत करने पर कचरा उठा लेते हैं, पर 15 से 20 दिन तक कचरा यहीं सड़ता रहता है। जब ट्रांसफर स्टेशन हैं तो कचरा सड़क पर क्यों डाला जा रहा है।
'पैसे की बर्बादी की, वसूली होनी चाहिए'
पूर्व पार्षद मुकेश यादव ने कहा कि स्मार्ट मॉनीटरिंग के नाम पर जनता के करोड़ों रुपये ठिकाने लगाए गए हैं। घरों के बाहर आरएफआईडी टैग लगाने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। स्कैनर और टैग दोनों कबाड़ हो गए हैं। यह हमारे पैसे की बर्बादी है, इसकी वसूली होनी चाहिए।
'करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला'
पार्षद बंटी माहौर ने कहा कि कैसी स्कैनिंग, हमने तो अपने वार्ड में अक्तूबर क्या, अब तक किसी को स्कैनिंग करते नहीं देखा। घर घर से कूड़ा ही नहीं उठ रहा तो टैग की जांच करने कौन आएगा। ये करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला है। इस बार सदन में इस पर सवाल पूछूंगा और कार्रवाई की मांग करूंगा।
पौने दो साल से बंद पड़ी स्कैनिंग
पार्षद संजय राय ने कहा कि पौने दो साल से आरएफआईडी टैग की स्कैनिंग बंद पड़ी है। जो टैग लगाए गए थे, वह भी टूट गए। स्कैनर कहां गए, उनका क्या हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए। स्मार्ट मॉनीटरिंग की व्यवस्था फिर शुरू हो सके तो सुधार करके की जाए।
कंपनी के खिलाफ करेंगे कार्रवाई- मेयर
मेयर नवीन जैन ने कहा कि मैंने स्मार्ट तरीके से कचरा प्रबंधन के लिए आरएफआईडी टैग व्यवस्था शुरू कराई थी, लेकिन यह लंबे समय से बंद है। नगर आयुक्त से इस संबंध में वार्ता करके इस व्यवस्था को फिर शुरू कराएंगे। जिस कंपनी ने टैग और स्कैनर दिए हैं, उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। यह मामला सदन में भी उठ चुका है और तब सदन में ही इस पर नाराजगी जताई जा चुकी है, अब सख्ती से इस पर कार्रवाई होगी।