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कर्मचारी नगर निगम का, ठाठ-बाट में अफसर भी फेल
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 21 Jun 2017 09:41 PM IST
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आगरा नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा नगर निगम के कर्मचारी ने ठाठ-बाट में अफसरों को भी फेल कर दिया है। नायब मोहर्रिर सुरेश दीपक ने करोड़ों रुपये की संपत्ति जमा की है। सुरेश दीपक के नाम पर ही शहर की पाश कालोनी लायर्स कालोनी के बराबर वाली न्यू सुभाष नगर कालोनी में करीब 500 वर्ग गज के भूखंड में तीन मंजिला कोठी इसके साथ ही उनके पास करोड़ों रुपये के भूखंड हैं।
सुरेश दीपक नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है लेकिन स्टाफ कम होने की वजह से उसे नायब मुहर्रिर का काम दिया गया है। नायब मोहर्रिर की जिम्मेदारी भवन स्वामियों से टैक्स की वसूली कर उन्हें रसीद देना है और वसूली गई रकम का आडिट कराकर उसे निगम के कोष में जमा करना है।
सुरेश दीपक पर आरोप है कि घोटाला करके करीब 40 लाख रुपये की निगम को चपत लगाई। इसके साथ ही उन्होंने नौकरी में रहते हुए प्रापर्टी की खरीद फरोख्त का निजी व्यवसाय किया। इस पर उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ ने जांच की मांग की थी और दयालबाग निवासी विक्रांत सिंह और संजय सिंह ने मई 2016 में शिकायत की थी। जांच में सुरेश दीपक को दोषी पाया गया था। जांच अधिकारी जुलाई 2016 में जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसी के आधार पर विजिलेंस जांच की जा रही है।
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वहीं टैक्स मुहर्रिर सुरेश दीपक का कहना है कि उनका काम केवल टैक्स की वसूली करना है, कर निर्धारण नहीं है। किसी भवन का जो कर निर्धारण किया उसी के आधार पर वसूली गई। नगर निगम अधिनियम की धारा 86 (1) के मुताबिक निगम कर्मचारी बिना अनुमति के निजी व्यवसाय नहीं कर सकता है।
इस आधार पर उन्होंने 1995 में तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी की अनुमति से अपने बेरोजगार भाई की मदद के लिए उसके व्यवसाय में हाथ बंटाया था। उनका कहना है कि होंडा सिटी कार उनकी नहीं है और सभी 13 भूखंड पार्टनर थे, अब वे भूखंड बिक चुके हैं।
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सुरेश दीपक नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है लेकिन स्टाफ कम होने की वजह से उसे नायब मुहर्रिर का काम दिया गया है। नायब मोहर्रिर की जिम्मेदारी भवन स्वामियों से टैक्स की वसूली कर उन्हें रसीद देना है और वसूली गई रकम का आडिट कराकर उसे निगम के कोष में जमा करना है।
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सुरेश दीपक पर आरोप है कि घोटाला करके करीब 40 लाख रुपये की निगम को चपत लगाई। इसके साथ ही उन्होंने नौकरी में रहते हुए प्रापर्टी की खरीद फरोख्त का निजी व्यवसाय किया। इस पर उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ ने जांच की मांग की थी और दयालबाग निवासी विक्रांत सिंह और संजय सिंह ने मई 2016 में शिकायत की थी। जांच में सुरेश दीपक को दोषी पाया गया था। जांच अधिकारी जुलाई 2016 में जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसी के आधार पर विजिलेंस जांच की जा रही है।
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वहीं टैक्स मुहर्रिर सुरेश दीपक का कहना है कि उनका काम केवल टैक्स की वसूली करना है, कर निर्धारण नहीं है। किसी भवन का जो कर निर्धारण किया उसी के आधार पर वसूली गई। नगर निगम अधिनियम की धारा 86 (1) के मुताबिक निगम कर्मचारी बिना अनुमति के निजी व्यवसाय नहीं कर सकता है।
इस आधार पर उन्होंने 1995 में तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी की अनुमति से अपने बेरोजगार भाई की मदद के लिए उसके व्यवसाय में हाथ बंटाया था। उनका कहना है कि होंडा सिटी कार उनकी नहीं है और सभी 13 भूखंड पार्टनर थे, अब वे भूखंड बिक चुके हैं।