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आपने भी बैंक लॉकर में रखा है कीमती सामान, तो पढ़ लें ये खबर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 22 Feb 2018 01:50 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में यूनियन बैंक ही नहीं बल्कि आगरा में भी बैंकों के अंदर लॉकर टूटने और सामान चोरी होने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। लॉकर में क्या रखा है, इसका ब्यौरा न होने के कारण बैंक भरपाई से पल्ला झाड़ लेते हैं।
बैंक लॉकर के सुरक्षित होने का दावा किया जाता है, लेकिन जब भी लॉकर में सामान रखें तो इंश्योरेंस करा लें। हालांकि आभूषण या अन्य कीमती सामान के कागजी ब्यौरे में आने के डर से लोग इंश्योरेंस नहीं करा रहे।
ज्यादातर बैंकों में लॉकर की सुविधा रहती है। स्ट्रांग रूम में अच्छे लॉकर, इलेक्ट्रोनिक निगरानी सिस्टम, अलार्म सिस्टम और सुरक्षा के अत्याधुनिक उपाय होते हैं, लेकिन चोरी, डकैती या लॉकर तोड़ने के मामलों में बैंक भरपाई नहीं करते।
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बैंक लॉकर के सुरक्षित होने का दावा किया जाता है, लेकिन जब भी लॉकर में सामान रखें तो इंश्योरेंस करा लें। हालांकि आभूषण या अन्य कीमती सामान के कागजी ब्यौरे में आने के डर से लोग इंश्योरेंस नहीं करा रहे।
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ज्यादातर बैंकों में लॉकर की सुविधा रहती है। स्ट्रांग रूम में अच्छे लॉकर, इलेक्ट्रोनिक निगरानी सिस्टम, अलार्म सिस्टम और सुरक्षा के अत्याधुनिक उपाय होते हैं, लेकिन चोरी, डकैती या लॉकर तोड़ने के मामलों में बैंक भरपाई नहीं करते।
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बैंक प्रबंधन के मुताबिक लॉकर लेते समय ही घोषणा पत्र में यह बता दिया जाता है कि नुकसान पर बैंक जिम्मेदार नहीं होगा। वह केवल किराया लेते हैं।
अगर किसी को चोरी, आग या लॉकर तोड़ने के नुकसान से बचना है तो सामान का इंश्योरेंस करा सकते हैं। बैंक मैनेजरों के मुताबिक कई मामलों में ग्राहक जल्दबाजी में लॉकर बंद करना ही भूल जाते हैं, जिस पर कई बार उन्हें फोन कर बुलाया जाता है।
बैंक के लॉकर ग्राहक और मैनेजर के पास रखी चाबी दोनों के एक साथ लगाने पर ही खुलते हैं। ऐसे कई लॉकर जो सालों से बंद हैं, उन्हें खोलने के लिए बैंक अखबारों में विज्ञापन जारी करता है और ग्राहक को सूचनाएं देने के बाद ही इन्हें कंपनी की मदद से खुलवाता है।
अगर किसी को चोरी, आग या लॉकर तोड़ने के नुकसान से बचना है तो सामान का इंश्योरेंस करा सकते हैं। बैंक मैनेजरों के मुताबिक कई मामलों में ग्राहक जल्दबाजी में लॉकर बंद करना ही भूल जाते हैं, जिस पर कई बार उन्हें फोन कर बुलाया जाता है।
बैंक के लॉकर ग्राहक और मैनेजर के पास रखी चाबी दोनों के एक साथ लगाने पर ही खुलते हैं। ऐसे कई लॉकर जो सालों से बंद हैं, उन्हें खोलने के लिए बैंक अखबारों में विज्ञापन जारी करता है और ग्राहक को सूचनाएं देने के बाद ही इन्हें कंपनी की मदद से खुलवाता है।