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Lockdown Agra: भूख के हैं मारे, पेट चावल के सहारे, कालाबाजारी ने छीन ली रोटी
Mon, 30 Mar 2020 11:56 AM IST
मुकेश कुमार
रैना पालीवाल, अमर उजाला, आगरा
रैना पालीवाल, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 30 Mar 2020 11:56 AM IST
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प्रजापति राम भरोसी और उनका परिवार
- फोटो : अमर उजाला
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‘तुमते सच कह रहे, चार दिन ते बस चावल खाय रहे। घर में चून (आटा) नाय। चक्की वारौ आटे के 50 किलो के कट्टा ऐ 3600 रुपया मै दै रह्यौ है। इतेक पैसा कहां ते लाएं। याते तौ हम बीमारी ते ही मर जाएं। हमारे बाप बड़े-बूढ़े हैं। बिनैं एक रोटी ऊ नाय दै पाए तौ कैसी संतान हैं हम।’ यह पीड़िता आगरा जिले के उन लोगों की है, जिनकी रोटी कालाबाजारी ने छीन ली है। पढ़ें
किरावली के गांव रायभा के प्रजापति राम भरोसी के घर के बाहर घड़ों का अंबार लगा है। कोई खरीदने वाला नहीं है। घर में 25 लोगों का परिवार है। घर में कई दिनों से रोटी नहीं पकी है। परिवार के लोग चावल खाकर पेट भर रहे हैं।
राम भरोसी कहते हैं, 'हमैं तौ कोई मोदी ते मिलवाय दै बस। हम बिनते विनती कर लंगे। रिश्तेदारन ते ऊ पूछ लई पर बिनके पास भी आटौ नाय। चावल ते कैसे पेट भरैं। आत्मा ते कह रहे, हम भूख ते मरंगे। ऐसे टाइम मै कोई कर्ज भी नाय दै रह्यौ।'
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किरावली के गांव रायभा के प्रजापति राम भरोसी के घर के बाहर घड़ों का अंबार लगा है। कोई खरीदने वाला नहीं है। घर में 25 लोगों का परिवार है। घर में कई दिनों से रोटी नहीं पकी है। परिवार के लोग चावल खाकर पेट भर रहे हैं।
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राम भरोसी कहते हैं, 'हमैं तौ कोई मोदी ते मिलवाय दै बस। हम बिनते विनती कर लंगे। रिश्तेदारन ते ऊ पूछ लई पर बिनके पास भी आटौ नाय। चावल ते कैसे पेट भरैं। आत्मा ते कह रहे, हम भूख ते मरंगे। ऐसे टाइम मै कोई कर्ज भी नाय दै रह्यौ।'
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'एक पैसा की दुकानदारी नाय'
उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण एक पैसा की दुकानदारी नाय रही। जब घर मै खावै कू हतो तौ बच्चा मास्क लगाते। अब सबनै हटा दए हैं। रामभरोसी की पत्नी किरन देवी के चेहरे पर बेबसी है। उनके पिता मूलचंद भी कराहते हुए कहते हैं, जे लॉकडाउन कब खुलैगौ ?
जब गांव में यह हालात हैं तो शहर की कल्पना आप कर सकते हैं। यहां भी राशन से लेकर फल-सब्जी के ज्यादा दाम वसूले जा रहे हैं। प्रशासन ने जो रेट लिस्ट जारी की है, उस पर तो 90 फीसदी से ज्यादा सामान मिल ही नहीं रहा है।
प्रशासन की सूची में आलू 15 रुपये किलो है। जबकि गली-गली घूम रहे सब्जी वाले 25 से 30 रुपये किलो आलू बेच रहे हैं। सेब 70 रुपये किलो बताया गया है जबकि मिल रहा है 90 से 100 रुपये। किरानी की दुकानों पर आटा तो मिल ही नहीं रहा है।
जब गांव में यह हालात हैं तो शहर की कल्पना आप कर सकते हैं। यहां भी राशन से लेकर फल-सब्जी के ज्यादा दाम वसूले जा रहे हैं। प्रशासन ने जो रेट लिस्ट जारी की है, उस पर तो 90 फीसदी से ज्यादा सामान मिल ही नहीं रहा है।
प्रशासन की सूची में आलू 15 रुपये किलो है। जबकि गली-गली घूम रहे सब्जी वाले 25 से 30 रुपये किलो आलू बेच रहे हैं। सेब 70 रुपये किलो बताया गया है जबकि मिल रहा है 90 से 100 रुपये। किरानी की दुकानों पर आटा तो मिल ही नहीं रहा है।