फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Agra increased 'disaster' threatens

आगरा में बढ़ा ‘आपदा’ का खतरा

Wed, 13 May 2015 01:51 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Wed, 13 May 2015 01:51 AM IST
विज्ञापन
उत्तराखंड त्रासदी हो या फिर नेपाल में जलजला। यह प्रकृति के साथ खिलवाड़ का ही दुष्परिणाम है। धरती की छाती चीरकर खनिजों और पानी का अत्यधिक दोहन ही अंगारों को हवा दे रहा है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले के 15 ब्लॉक में से 11 ब्लॉक डार्क जोन की श्रेणी में आ गए हैं। इससे खाली होती जमीन के बीच ‘कालोजिन’ (पार्टिकल्स आपस में टकराने की प्रक्रिया) बन रहा है। इससे वर्तमान में जल संकट तो है ही, भविष्य में भूकंप के ज्यादा आसार बन रहे हैं।
विज्ञापन

भूगर्भ जल विभाग ने वर्ष 2014 के मानसून से पूर्व और बाद के भूगर्भ जल की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार की है। इसमें जिले के 11 ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में पाए गए हैं। इनके अलावा खेरागढ़ ब्लॉक खतरे के निशान (सेमी क्रिटिकल) पर पहुंच गया है। वर्ष 2009 की रिपोर्ट के अनुसार, छह ब्लॉक ही डार्क जोन में थे। सिर्फ पांच साल की अल्पावधि में ही पांच ब्लॉक और इस श्रेणी में आ गए। भूकंप के पूर्वानुमान पर शोध कर चुके डा. विनोद कुशवाह का कहना है कि जल स्तर गिरने से उस स्थान पर सेंड पार्किल्स रह जाते हैं। जो आपस में टकराने लगते हैं। ऐसी स्थिति में भूकंप आने पर ऐसे क्षेत्रों में ज्यादा तबाही के आसार बन जाते हैं।
विज्ञापन

इनसेट
वर्ष 2014 की रिपोर्ट : डार्क जोन वाले ब्लॉक
ब्लॉक        प्री मानसून        पोस्ट मानसून
अकोला         19.24        18.71
बरौली अहीर        25.63        26.32
बिचपुरी        22.86        23.26
फतेहपुर सीकरी        13.55        13.91
खंदौली        32.27        32.56
शमसाबाद        38.74        40.20
अछनेरा        7.89        8.18
एत्मादपुर        25.28        25.74
फतेहाबाद        36.24        38.25
सैंया        33.34        33.60
जगनेर        9.14        5.92
नोट : सभी आंकड़े मीटर में हैं।
------------
यहां स्थिति नियंत्रण में
जैतपुरकलां, बाह, पिनाहट, खेरागढ़
-----------------------
2009 में ये ब्लॉक थे डार्क जोन में
. अकोला
. बरौली अहीर
. बिचपुरी
. फतेहपुर सीकरी
. खंदौली
. शमसाबाद

कहीं बूंद-बूंद को न तरसना पड़ जाए
भूगर्भ जल दोहन की ऐसी ही स्थिति रही तो निकट भविष्य में बूंद-बूंद पानी के लिए लोग तरस जाएंगे। नदियां सूखती जा रही हैं और तालाबों पर कब्जा हो रहा है। वाटर हार्वेस्टिंग के प्राकृतिक संसाधन लगभग खत्म से होते जा रहे हैं। वहीं, लोग जमीन के अंदर से लगातार पानी खिंचते जा रहे हैं। ऐसे में पृथ्वी के अंदर का पानी खत्म होना ही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एसएन में भगदड़, जर्जर इमारतों से निकाले मरीज
आगरा। ड्रिप स्टेंड हिला और टेबिल पर रखी बोतल नीचे आ गिरी। भूकंप आया चिल्लाते हुए नर्सिंग स्टाफ बाहर भागने लगा। यह देख मरीज और तीमारदार सिहर उठे। गोद में तो कोई पीठ पर मरीज को लाद तीमारदार बाहर की ओर दौड़ पड़े। खुले में आने के बाद ही तीमारदाराें ने दम भरी। देखते ही देखते घड़ी वाली बिल्डिंग और सात मंजिला खाली हो गई। दोपहर में भूकंप झटकों से एसएन मेडिकल कालेज में हड़कंप मच गया। पिछली बार सात मंजिला बिल्डिंग का छज्जा गिरा था, बावजूद इसके यहां मरीजों की जांच जारी है। इमारत के जर्जर होने की बात सदन मुख्यमंत्री भी स्वीकार चुके हैं। मंगलवार को डाक्टरों ने इमारत खाली करने की हिदायत दी। इसके बाद कालेज प्रशासन ने गेट बंद करा दिया। इमारत के आसपास से भी वाहन हटा लिए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed