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अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट का खेल: प्लास्टिक-कांच बेचकर नाले में फेंक रहे खतरनाक कचरा, बीमारियों का खतरा बढ़ा

Tue, 11 Aug 2026 01:46 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 11 Aug 2026 01:46 PM IST
सार

आगरा में कई अस्पतालों पर मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में नियमों की अनदेखी और प्लास्टिक-कांच बेचकर बाकी कचरा खुले में फेंकने के आरोप लगे हैं। जिले में रोज करीब 1,700 किलो मेडिकल वेस्ट निकलता है, जिसके गलत निस्तारण से संक्रमण और भूजल प्रदूषण का खतरा है।

 

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Agra Hospitals Under Scanner: Medical Waste Allegedly Dumped in Drains After Plastic and Glass Are Sold
मेडिकल वेस्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

प्लास्टिक और कांच का सामान बेचा और बाकी का मेडिकल वेस्ट नाले या फिर खुले में फेंक दिया। अधिकांश अस्पताल ऐसे ही मेडिकल वेस्ट को ठिकाने लगा रहे हैं। बीते दिन ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में भी ये मामला उठाया गया है। जिले में ऐसी ही शिकायत मेडिकल वेस्ट निस्तारण करने वाली कंपनी भी कर चुकी है।
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स्वास्थ्य विभाग में 1317 चिकित्सकीय संस्थान पंजीकृत हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल, 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 48 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 60 शहरी स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। सरकारी और कई निजी अस्पतालों में नियमों की अनदेखी करते हुए इनको खुले में फेंक रहे हैं। इनको तय रंग के डिब्बों में नहीं जमा किया जा रहा है।
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जिले से रोजाना करीब 1700 किलो प्रतिदिन मेडिकल वेस्ट उठ रहा है। प्लास्टिक-कांच के मेडिकल वेस्ट को अस्पताल कर्मचारी बेच रहे हैं। अस्पतालों के कंटेनर में भी इसे फेंक रहे हैं। एसएन प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता का कहना है कि सभी विभागों में मेडिकल वेस्ट के लिए तय रंग के डिब्बे रखे हैं। खुले में कैसे ये फेंक रहे हैं, इसकी जांच कराता हूं।
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संक्रमित हो सकते हैं लोग
एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गोयल ने बताया कि मेडिकल वेस्ट में एचआईवी, हेपेटाइटिस बी-सी, एमडीआर संक्रमित मरीजों के उपचार में उपयोग किए गए निडिल, ब्लेड समेत अन्य मेडिकल वेस्ट होता है। इसके चुभने से स्वस्थ लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। संक्रमित रक्त, यूरिन, मवाद खुले में होने भूमिगत जल भी प्रदूषित हो सकता है।

तय डिब्बों में नहीं मिलता वेस्ट
जेआरआर वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर  जितेंद्र शर्मा ने बताया कि कई अस्पतालों में प्लास्टिक-कांच बेचकर अन्य वेस्ट को एक ही थैली में भर देते हैं। यह तय डिब्बों में नहीं मिलता। यमुनापार के अस्पताल में सबसे ज्यादा अव्यवस्था है। सीएमओ कार्यालय में भी कई बार शिकायत कर चुके हैं।


अस्पतालों की कराएंगे जांच
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि हाल ही में मेडिकल वेस्ट निस्तारण नियमानुसार नहीं होने पर लाइसेंस के नवीनीकरण नहीं किया था। खुले में वेस्ट फेंकने वाले अस्पतालों की जांच कराई जाएगी। इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजेंगे। 
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