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Exclusive: आरटीआई के तहत जन सूचनाएं देने में आगरा जिले के अफसर सबसे ज्यादा लापरवाह

Sun, 31 Jul 2022 01:14 PM IST
मुकेश कुमार देश दीपक तिवारी, अमर उजाला आगरा
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 31 Jul 2022 01:14 PM IST
सार

राज्य सूचना आयोग की जारी रिपोर्ट में मंडल में सबसे खराब स्थिति आगरा की है। दूसरे नंबर पर फिरोजाबाद और तीसरे स्थान पर मथुरा के जनसूचनाधिकारी हैं।

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Agra district officers most careless in giving public information under RTI
सूचना का अधिकार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जनसूचना अधिकार (आरटीआई) एक्ट लागू हुए 17 साल बीत गए। लेकिन, जनसूचनाएं देने में सबसे ज्यादा लापरवाह आगरा के अधिकारी हैं। राज्य सूचना आयोग की रिपोर्ट यही कह रही है। पिछले पांच महीने में मंडल के 68 जनसूचनाधिकारियों पर आयोग ने 17 लाख रुपये जुर्माना लगाया। इनमें आगरा के सबसे ज्यादा 31 अधिकारी हैं। वहीं मैनपुरी के सबसे कम सात अधिकारियों पर जुर्माना लगा है।

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मंडल में आगरा की स्थिति सबसे खराब 

राज्य सूचना आयोग की जारी रिपोर्ट में मंडल में सबसे खराब स्थिति आगरा की है। यहां मंडलायुक्त, एडीएम सिटी, एसडीएम, तहसीलदार व मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय के जनसूचनाधिकारियों पर आरटीआई में सूचना नहीं देने पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना लग चुका है। दूसरे नंबर पर फिरोजाबाद और तीसरे स्थान पर मथुरा के जनसूचनाधिकारी हैं। चौथे नंबर पर मैनपुरी है, जहां सात जनसूचनाधिकारियों पर जुर्माना लगा है। 

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इनमें सबसे बदतर हालत ग्राम विकास, पंचायतीराज और शिक्षा विभाग की है। ग्राम्य विकास विभाग में 12, पंचायतीराज में 10, माध्यमिक व बेसिक शिक्षा में 10, राजस्व में आठ समेत कुल 13 विभागों के 68 अधिकारी शामिल हैं। यह आंकड़े 12 फरवरी से 25 जुलाई तक के हैं। इन अधिकारियों ने न तो आरटीआई में सूचनाएं उपलब्ध कराई, न अपील के बाद आयोग के समक्ष प्रस्तुत हुए।

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जुर्माना वसूली में भी लापरवाही

जुर्माने की वसूली अधिकारियों के वेतन से कटौती कर होनी है। राज्य सूचना आयोग ने सभी विभागाध्यक्षों को नोटिस भेजी है, परंतु जुर्माना वसूली में भी लापरवाही है। 90 फीसदी जनसूचनाधिकारियों ने भुगतान नहीं किया है। ऐसे में आयोग विभागाध्यक्ष व संबंधित जिलों के डीएम को तलब कर सकता है।

आंकड़े 

900 से अधिक आरटीआई मामले आयोग में लंबित हैं।
60 अधिकारियों पर 4 महीने में 17 लाख रुपये जुर्माना लगा है।
30 दिन में आवेदक को सूचनाएं उपलब्ध करानी होती हैं।
150 से अधिक विभाग व निगम शामिल हैं आरटीआई में। 

भ्रामक सूचनाएं देते हैं जिम्मेदार

जन प्रहरी के संयोजक नरोत्तम शर्मा ने कहा कि विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार से संबंधित सूचनाएं जिम्मेदार छिपाते हैं। भ्रामक सूचनाएं देते हैं। सरकार भी गंभीर नहीं है। 

एफआईआर का होना चाहिए प्रावधान

सपोर्ट इंडिया के अध्यक्ष सुरेश चंद सोनी ने कहा कि आरटीआई एक्ट में संशोधन कर जनसूचनाएं नहीं देने पर अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर का प्रावधान होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में अपील हो। 
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