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चार वर्षों में पनप नहीं सके ताजनगरी के उद्योग, एडीएफ ने प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

Tue, 08 Sep 2020 10:41 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 08 Sep 2020 10:41 AM IST
सार

  • आठ सितंबर 2016 को टीटीजेड में उद्योग पर लगाई गई थी रोक
  • आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर समस्या के समाधान की मांग की

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Agra Development Foundation sent a letter to the PM Narendra Modi CM Yogi Adityanath
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ताज ट्रैपेजियम जोन (टीटीजेड) के अंतर्गत उद्योगों पर लगी रोक के चार वर्ष पूरे होने पर आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। आगरा डवलपमेंट फाउंडेशन (एडीएफ) के अध्यक्ष पूरन डावर एवं सचिव केसी जैन ने बताया कि चार वर्षों में उद्योग पनप नहीं पाए हैं। पत्र में नौ अलग-अलग समस्याओं और उनके समाधान की मांग की गई है।   

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अलग-अलग समस्याएं
- आईआईटी कानपुर द्वारा ताजमहल पर प्रदूषणकारी तत्वों की अध्ययन रिपोर्ट (फरवरी 2019) की सिफारिशों को लागू करें। इसमें सड़कों, वाहनों व यातायात प्रबंधन को दोषी ठहराया गया है।   
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 - उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर एक्शन प्लान (जून 2019) को लागू किया जाए। 
- चार वर्षों से चली आ रही गैर प्रदूषणकारी उद्योगों पर रोक समाप्त हो।   
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश (30.04.2019) के अनुसार गैर औद्योगिक गतिविधियों जैसे होटल, हॉस्पिटल, एयरपोर्ट, एसटीपी, निर्माण परियोजनाओं को उद्योगों के समान न माना जाए और उनकी अनुमति बिना बाधा के नियमानुसार दी जाए।
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- हर मामले में केस-टू-केस आधार पर सुप्रीम कोर्ट न जाया जाए। आवश्यक हो तो स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाकर स्वीकृत कराई जाए।
- समस्त टीटीजेड में वनावरण लगभग तीन फीसदी है जिसको बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया जाए। 
- टीटीजेड से संबंधित अनेकों अध्ययन व रिपोर्ट हैं लेकिन उनकी सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है। जो कि वायु प्रदूषण में कमी ला सकती है उन्हें लागू किया जाना चाहिए।

चार वर्षों में नहीं लगे होटल, हॉस्पिटल, जूता उद्योग

ताज संरक्षित क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना और पुराने उद्योगों की क्षमता विस्तार पर लगे प्रतिबंध के संदर्भ में चेंबर भवन में सोमवार को अध्यक्ष राजीव अग्रवाल की अध्यक्षता में मंथन किया गया। इसमें कहा गया कि चार वर्षों में होटल, हॉस्पिटल और जूता उद्योग नहीं लग सके हैं। 

अध्यक्ष ने बताया कि 8 सितंबर 2016 को आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, एटा हाथरस एवं भरतपुर में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने उद्योगों की स्थापना और विस्तार (व्हाइट श्रेणी को छोड़कर) पर रोक लगा दी थी।  प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को भेजे गए मेल के माध्यम से इस स्थिति के समाधान के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। 

पर्यावरणीय सुरक्षा एवं प्रदूषण नियंत्रण प्रकोष्ठ के चेयरमैन नरेंद्र तनेजा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उद्योगों की स्थापना पर कोई रोक नहीं लगाई गई है बल्कि पर्यावरण एवं गैर प्रदूषण कारी उद्योगों दोनों की बात को ही आगे बढ़ाने के लिए कहा है।  

होटल, हॉस्पिटल, जूता उद्योग आदि योजनाएं पिछले 4 वर्षों से नहीं लग सकी हैं, जिससे उद्यमी और युवा शक्ति का पलायन शहर से हो रहा है। उपाध्यक्ष राजेंद्र गर्ग ने कहा कि आईआईटी कानपुर द्वारा तैयार की गई अध्ययन रिपोर्ट की सिफारिशों को तुरंत लागू किया जाए। इसमें उद्योगों को नहीं, सड़कों पर यातायात प्रबंधन को दोषी ठहराया गया है।

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