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आगरा: अप्रैल-मई में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने मचाया था कोहराम, 350 की हुई थी मौत
Sat, 10 Jul 2021 02:06 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 10 Jul 2021 02:06 PM IST
सार
एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि ताजनगरी में अभी तक वायरस के तीन वैरिएंट मिल चुके हैं। इनमें से दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट की पुष्टि इसी साल जनवरी में एक महिला मरीज में हुई थी।
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कोरोना वायरस की जांच करते कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दूसरी लहर में ताजनगरी में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने कोहराम मचाया था। अप्रैल-मई में लगभग 15 हजार संक्रमित मिले और 350 लोगों की मौत हुई। जीनोम सीक्वेंसिंग में वायरस का स्वरूप की पहचान डेल्टा के रूप में हुई है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि ताजनगरी में अभी तक वायरस के तीन वैरिएंट मिल चुके हैं। इनमें से दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट की पुष्टि इसी साल जनवरी में एक महिला मरीज में हुई थी। यह ठीक हो चुकी हैं। फरवरी में एक युवक में अज्ञात वैरिएंट मिला था, यह किसका स्वरूप है, इसकी अभी तक पता नहीं लग सका है। यह मरीज भी ठीक हो चुका है। अब दूसरी लहर में खासतौर से अप्रैल-मई में डेल्टा वैरिएंट मिला, जो अभी तक के दोनों वैरिएंट से ज्यादा खतरनाक साबित हुआ। ये तेजी से संक्रमित करने के साथ ही फेफड़ों को भी डैमेज कर रहा था। इससे सबसे ज्यादा मौत हुईं।
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ताजनगरी में वायरस का तीसरा वैरिएंट मिला
दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट : कमला नगर की 26 साल की युवती इसी साल जनवरी में दक्षिण अफ्रीका की यात्रा करके लौटी थी। बुखार, गला चोक होने पर निजी अस्पताल में इलाज चला और जीनोम सीक्वेंसिंग में दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट मिला। पहली लहर के वैरिएंट के मुकाबले ये ढाई से तीन गुना ज्यादा खतरनाक था।
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अज्ञात वायरस : ट्रांस यमुना कॉलोनी निवासी 32 साल का युवक है। यह ट्रैवलिंग कंपनी का कार चालक है। फरवरी में बुखार, खांसी गला चोक होने पर जांच में संक्रमित मिला। जीनोम सीक्वेंसिंग में अज्ञात वायरस पाया गया। अफ्रीक वैरिएंट के मुकाबले ये खतरनाक था। संक्रमित करने की दर अधिक थी।
डेल्टा वैरिएंट : 20 से 83 साल के उम्र के लोगों में डेल्टा वैरिंएट की पुष्टि हुई। यह लोग वायरस की चपेट मेें कैैसे आए, इसकी पड़ताल की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग इनकी ट्रैवलिंग और कांटेक्ट हिस्ट्री के बारे पता कर रहा है। यह पहली लहर के वैरिएंट के मुकाबले 70 गुना तेजी से संक्रमित कर रहा था।
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