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यूपी के इस शहर में हुई थी हाईकोर्ट की स्थापना, अब खंडपीठ के लिए संघर्ष कर रहे लोग
Sat, 26 Sep 2020 03:45 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 26 Sep 2020 03:45 PM IST
सार
- लाठीचार्ज के 19 साल बाद भी नहीं मिल सकी खंडपीठ
- 26 सितंबर 2001 को दीवानी कचहरी में वकीलों पर पुलिस ने बरसाई थी लाठियां
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आगरा दीवानी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा में हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना की मांग को लेकर दीवानी कचहरी में 26 सितंबर 2001 को अधिवक्ताओं पर किए गए लाठीचार्ज के 19 साल बाद भी मांग पूरी नहीं हो सकी है। अधिवक्ताओं का संघर्ष जारी है। इस बार भी 26 सितंबर को काला दिवस के रूप में मनाते हुए अधिवक्ताओं ने काम नहीं करने का एलान किया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि आगरा में हाईकोर्ट की स्थापनी की गई थी। आज खंडपीठ के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
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ग्रेटर आगरा बार एसोसिएशन के सचिव भारत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बैठक की। इसमें जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन का निर्णय लिया गया। अधिवक्ताओं की हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना की मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। खंडपीठ स्थापना के लिए कई बार प्रदर्शन भी हो चुके हैं।
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19 साल पहले दीवानी में घुसकर पुलिस और पीएसी ने अधिवक्ता, वादकारी और अधिकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। इसमें कई लोग घायल हो गए थे। इसके बावजूद यह मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। बैठक में अध्यक्ष महेश बघेल, आरवी त्रिगुनायत, नरेंद्र शर्मा, दीवान सिंह बाबा, दुर्ग विजय सिंह भैया, करतार सिंह भारती, जगवीर सिंह, तीर्थराज सिंह, विकास राय आदि मौजूद रहे।
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' जनप्रतिनिधि आगरा में आवाज उठाते हैं, दिल्ली-लखनऊ में खामोश'
वकीलों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि सच्चे मन से साथ दें तो खंडपीठ की स्थापना में बहुत देर नहीं लगेगी। सांसद और विधायक आगरा में तो आवाज उठाते हैं, लेकिन दिल्ली और लखनऊ में खामोश रहते हैं। यदि सांसद लोकसभा और विधायक विधानसभा में मुद्दा उठाएं तो आंदोलन को बल मिले।
'जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं करा पाए'
आगरा एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जसवंत सिंह आयोग ने स्पष्ट कहा था कि खंडपीठ की स्थापना आगरा में होनी चाहिए। आयोग सरकार ने बनाया था। 35 साल पहले आई रिपोर्ट को आगरा के जनप्रतिनिधि लागू नहीं करा पाए।
'जनप्रतिनिधियों की भूमिका नगण्य है'
आगरा बार एसोसिएशन के सचिव अमिताभ शर्मा ने कहा कि खंडपीठ आंदोलन में जनप्रतिनिधियों की भूमिका नगण्य है। सभी सांसद और विधायक कहते हैं कि वे आगरा में खंडपीठ स्थापना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए जो काम उन्हें करना है, वह नहीं करते। सरकार पर दबाव नहीं बनाते, संसद और विधानसभा में आवाज नहीं उठाते।
'सिर्फ बातें न करें जनप्रतिनिधि'
अधिवक्ता करतार सिंह ने कहा कि खंडपीठ पर जनप्रतिनिधि सिर्फ बातें कर रहे हैं। उन्हें सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। उन लोगों की पीड़ा समझनी चाहिए जो मुकदमों की पैरवी के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं।
'जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं करा पाए'
आगरा एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जसवंत सिंह आयोग ने स्पष्ट कहा था कि खंडपीठ की स्थापना आगरा में होनी चाहिए। आयोग सरकार ने बनाया था। 35 साल पहले आई रिपोर्ट को आगरा के जनप्रतिनिधि लागू नहीं करा पाए।
'जनप्रतिनिधियों की भूमिका नगण्य है'
आगरा बार एसोसिएशन के सचिव अमिताभ शर्मा ने कहा कि खंडपीठ आंदोलन में जनप्रतिनिधियों की भूमिका नगण्य है। सभी सांसद और विधायक कहते हैं कि वे आगरा में खंडपीठ स्थापना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए जो काम उन्हें करना है, वह नहीं करते। सरकार पर दबाव नहीं बनाते, संसद और विधानसभा में आवाज नहीं उठाते।
'सिर्फ बातें न करें जनप्रतिनिधि'
अधिवक्ता करतार सिंह ने कहा कि खंडपीठ पर जनप्रतिनिधि सिर्फ बातें कर रहे हैं। उन्हें सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। उन लोगों की पीड़ा समझनी चाहिए जो मुकदमों की पैरवी के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं।
'कभी यहां हाईकोर्ट था, अब एक बेंच के लिए संघर्ष है'
- 1866 में आगरा में हाईकोर्ट की स्थापना की गई थी। यह उसी जगह पर था, जहां आज दीवानी कचहरी है।
- तीन साल बाद 1869 में इसे अस्थायी रूप से इलाहाबाद (वर्तमान में प्रयागराज) स्थानांतरित कर दिया गया। बाद में इसे स्थायी रूप दे दिया।
- 1956 से ही यह आवाज उठने लगी थी कि आगरा में खंडपीठ की स्थापना होनी चाहिए।
- हाईकोर्ट की स्थापना के 100 साल का जश्न आगरा में ही मनाया गया था।
- 1985 में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल में खंडपीठ स्थापना के गठित जसवंत सिंह आयोग ने भी आगरा में खंडपीठ की स्थापना का पक्ष लिया।
- जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट को सरकार ने लागू नहीं किया। अधिवक्ता इसे लागू कराने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
- आगरा से इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी 475 किमी. है, आठ घंटे से ज्यादा का सफर है।
( जैसा खंडपीठ स्थापना जनमंच के संयोजक एडवोकेट चौधरी अजय सिंह ने बताया)
- तीन साल बाद 1869 में इसे अस्थायी रूप से इलाहाबाद (वर्तमान में प्रयागराज) स्थानांतरित कर दिया गया। बाद में इसे स्थायी रूप दे दिया।
- 1956 से ही यह आवाज उठने लगी थी कि आगरा में खंडपीठ की स्थापना होनी चाहिए।
- हाईकोर्ट की स्थापना के 100 साल का जश्न आगरा में ही मनाया गया था।
- 1985 में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल में खंडपीठ स्थापना के गठित जसवंत सिंह आयोग ने भी आगरा में खंडपीठ की स्थापना का पक्ष लिया।
- जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट को सरकार ने लागू नहीं किया। अधिवक्ता इसे लागू कराने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
- आगरा से इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी 475 किमी. है, आठ घंटे से ज्यादा का सफर है।
( जैसा खंडपीठ स्थापना जनमंच के संयोजक एडवोकेट चौधरी अजय सिंह ने बताया)