सुरक्षा का टीका: वैक्सीन बनी संजीवनी, संक्रमित होने के बाद घर पर ही दी कोरोना को मात
जिन लोगों ने टीका लगवा लिया था। उनके लिए तो यह संजीवनी बन गया। कारण टीका लगवाने के बाद भी कोरोना संक्रमण की चपेट आने पर इन्हें ज्यादा समस्या नहीं हुई।
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप जिलेभर में दिखा था। महीनेभर तक अस्पताल से लेकर गांवों तक महामारी की दहशत बनी रही थी। टीकाकरण अभियान भी चल रहा था, लेकिन टीका लगवाने से लोग कतरा रहे थे। पर, जिन लोगों ने टीका लगवा लिया था। उनके लिए तो यह संजीवनी बन गया। कारण टीका लगवाने के बाद भी कोरोना संक्रमण की चपेट आने पर इन्हें ज्यादा समस्या नहीं हुई। संक्रमित होने के बाद ये लोग होम आइसोलेट और नियमित दवाओं के सेवन से ही स्वस्थ हो गए। इन्हें अस्पताल में भर्ती होने तक की जरूरत नहीं पड़ी। इनमें तमाम चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल रहे।
केस-एक, होम आइसोलेशन में भी संक्रमण दूर हो गया
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर सीकरी में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. पीयूष अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने जनवरी और फरवरी में वैक्सीन की डोज ली थी। इसके बाद मई में वह और उनकी पत्नी अंजू गुप्ता कोरोना संक्रमित हो गई। होम आइसोलेट रहकर और कुछ आयुर्वेदिक एवं एलोपैथिक दवाओं का सेवन करने के कुछ दिन बाद ही वे संक्रमण मुक्त हो गए। बाद में उनकी पत्नी की रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई।
केस-दो, काढ़ा, हल्दी मिला दूध से दे दी मात
फार्मासिस्ट डॉ. आरबी सिंह भी प्रथम चक्र में ही वे टीका लगवा लिया था। अप्रैल माह में कोरोना संक्रमण हुआ। होम आइसोलेशन में काढ़ा, गर्म पानी, हल्दी वाला दूध, एलोपैथिक दवाओं के सेवन व वैक्सीनेट होने के चलते पांच दिन में ही कोरोना मुक्त हो गए। कुछ दिन बाद उनका बेटा भी संक्रमित हो गया था। वह भी होम आइसोलेट से ही ठीक हो गया।
फतेहपुर सीकरी के मुकेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने पहले चरण में ही टीका लगवा लिया था। टीका लगे होने के बाद भी वह अप्रैल में संक्रमित हो गए थे। इस पर वो होम आइसोलेशन में रहे। कोरोना गाइड लाइन का पालन किया। दवाएं खाते रहे। कुछ ही दिन में संक्रमण मुक्त हो गए। वैक्सीन लगने होने का मन में सकारात्मक प्रभाव रहा।
वैक्सीन से सुरक्षा का होता है एहसास
वैक्सीन को लेकर गांव और कस्बों में तमाम अफवाहें थीं। पर, वैक्सीन लगवाने के बाद संक्रमित हुए लोगों में ज्यादा असर नहीं पड़ने की जानकारी ने भ्रांतियों को दूर किया। इसके बाद टीका लगवा लिया है। वैक्सीन लगवाने के बाद मन में सुरक्षा का एहसास बना हुआ है। आयुष, बाह
टीका लगवाने से ही मिटेगी महामारी
वैक्सीन लगवाने से गांवों में अब भी लोग कतराते हैं। जबकि इस महामारी से यही वैक्सीन से बचाएगी। देखने में भी मिला है कि टीका लगवाने वाले संक्रमित होने पर गंभीर हालत में नहीं पहुंचते हैं, जल्द ठीक हो जाते हैं। अनुराग सिंह, सैंया।
18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीका जरूर लगवाना चाहिए। संक्रमण से बचाव में टीका सबसे ज्यादा कारगार है। इससे कोई परेशानी नहीं होती। 200 से अधिक गांव में साप्ताहिक टीका शिविर लगाए जा रहे हैं। ए मनिकन्डन, मुख्य विकास अधिकारी
वैक्सीन सबसे के लिए जरूरी है
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप सभी देख चुके हैं। ऐसे में सबको अब जाग जाना चाहिए। सभी के लिए वैक्सीन लगवाना जरूरी है। इसी सुरक्षा कवच से संक्रमण होने के बाद भी खुद को बचाया जा सकता है। शिवम, गुही गांव।
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