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Women's day: अंधेरी जिंदगियों में किया इल्म का उजाला, पढ़ें इस शिक्षिका का रोशन सफर

Thu, 08 Mar 2018 12:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Thu, 08 Mar 2018 12:18 PM IST
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agra conduct residential school for visually impaired child
डॉ. आरफा शबनम - फोटो : अमर उजाला
एक शिक्षिका और शायरा के तौर पर डॉ. आरफा शबनम को लंबे समय से लोग जानते हैं। वह पिछले 17 साल से अंधेरी जिंदगियों में इल्म की रोशनी से उजाला करने का काम भी बखूबी कर रही हैं। 
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उनके जीवन का मकसद दृष्टिबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने इस साल बगैर किसी सरकारी मदद के अपनी दृष्टिबाधित बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय चला रही हैं, इसमें 60 छात्र-छात्राएं अपने जीवन को संवारने में जुटे हैं।
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जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद आरफा शबनम ने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं माना। मैनपुरी और कानपुर विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा लेने के बाद वह राजकीय विद्यालय में संगीत शिक्षिका बन गईं। 
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
मां के सहयोग से उन्होंने वर्ष 2001 में दृष्टिबाधित बच्चों के लिए मुफ्त विद्यालय शुरू किया था। वर्ष 2006 में आगरा स्थानांतरित होने के बाद भी उनका सफर नहीं थमा। 

उन्होंने आवास विकास कॉलोनी सेक्टर पांच में किराये के मकान में लुई ब्रेल आवासीय अंध विद्यालय शुरू किया। इसमें बच्चों को कंप्यूटर, टंकण, संगीत के अलावा कक्षा एक से उच्च शिक्षा तक मुफ्त प्रदान की जाती है। 

संस्था के अध्यक्ष रवि कुमार बताते हैं कि डॉ. आरफा के प्रयासों से एनएच-2 पर फरह के नजदीक आवासीय विद्यालय को स्थानांतरित किया है। इसमें वर्तमान में 60 छात्र-छात्राएं हैं। 

हाल में विद्यालय के 18 बच्चों ने हाईस्कूल व इंटर बोर्ड की परीक्षाएं दी हैं। जगनेर के गांव रिछोह के राजकीय विद्यालय में प्रिंसिपल डॉ. आरफा बताती हैं कि शायरी के मंच से मिलने वाली धनराशि हो या फिर वेतन, सभी दृष्टि बाधित बच्चों की सेवा में समर्पित है। 

शायरी में जाना माना नाम

सादगी पसंद डॉ. आरफा दृष्टिबाधितों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। वह कहती हैं कि सरकारी मदद के लिए शुरू में कोशिश की थी, लेकिन अब वह अपने प्रयासों से ही इस कार्य को अंजाम देती हैं।

डॉ. आरफा की शायरी की एक किताब मन की आंखें उर्दू और हिंदी में हाल ही में प्रकाशित हुई है। वे कवि सम्मेलन, मुशायरों में देश के अलावा अमेरिका, पाकिस्तान, कनाडा, जेद्दाह, दुबई, नेपाल में भी शिरकत कर चुकी हैं। 

हालांकि शिक्षिका के साथ ही विद्यालय की जिम्मेदारियों के कारण अब कम वक्त ही निकाल पाती हैं। समाज सेवा के लिए उन्हें वर्ष 2005 में गर्वनर अवार्ड भी मिल चुका है।
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