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आगरा कालेज को मिला विरासत का दर्जा
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा।
Updated Mon, 06 Jul 2015 02:29 AM IST
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 100 साल से अधिक पुराने कॉलेजों के कैंपस को संरक्षित करने के उद्देश्य से देशभर के 19 कालेजों व शिक्षण संस्थानों को विरासत का दर्जा दिया है। इनमें आगरा कॉलेज भी शामिल है। आयोग इन कॉलेजों को विरासत के संरक्षण, सुधार और अपग्रेडेशन के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराएगा।
पंडित गंगाधर शास्त्री द्वारा 1823 में स्थापित आगरा कॉलेज को 25 लाख रुपये मिले हैं। मोतीलाल नेहरू और सर छोटू राम इस कॉलेज के पूर्व छात्रों में शामिल हैं। कॉलेज के पास दस हजार से अधिक दुर्लभ अभिलेखों का खजाना है। इसमें बाबरनामा, ब्रिटिस डिक्शनरी जैसी ऐतिहासिक महत्व की पुस्तकें हैं। जनवरी में प्राचार्य ने कॉलेज की ओर से प्रस्ताव भेजा था। इसमें कॉलेज को 150 साल से भी पुराना और आजादी की जंग में सहयोगी बताया। यूजीसी ने इसे विरासत मानते हुए इसके रखरखाव को 25 लाख रुपये का बजट जारी किया। खासतौर पर यूजीसी ने पुस्तकालय में प्राचीन अभिलेखों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया। वर्तमान में कॉलेज की लाइब्रेरी में एक लाख से अधिक पुस्तकों का भंडार है। इसमें पारसी धर्म की पुस्तक, मुगल काल और हिंदू राजाओं से जुड़े अभिलेख हैं। इनके रखरखाव के लिए कॉलेज राजकीय अभिलेखागार की मदद लेगा। रासायनिक पदार्थ की मदद से पुस्तकों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के इंतजाम होंगे।
आजादी की जंग का भी बना गवाह
- 1857 की क्रांति का असर आगरा में भी दिखा। आजादी के मतवालों ने आगरा कॉलेज पर धावा बोल दिया। यहां पुस्तकालय को आग के हवाले कर अंग्रेजाें को खदेड़ दिया। प्रधानाचार्य टीवी केन ने अंग्रेज शिक्षकाें के साथ आगरा किला में शरण ली।
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1823 में रखी कालेज की नींव
- पंडित गंगाधर शास्त्री ने दान में मिली जमीन पर 1823 में संस्कृत विद्यालय के रूप में नींव रखी। उस वक्त इसमें 13 छात्र अध्ययनरत थे। शास्त्री जी ग्वालियर के सिंधिया राजघराने के राजपुरोहित थे। बाद में अंग्रेजों ने इस पर स्वामित्व कर विस्तार किया। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के पिता पंडित मोतीलाल नेहरू, चौधरी चरण सिंह भी यहां के छात्र रहे।
वर्जन
- कॉलेज का एतिहासिक महत्व है। विरासत का दर्जा मिला, बड़ी उपलब्धि है। धनराशि को पुस्तकालय में प्राचीन अभिलेखाें को सुरक्षित रखने में खर्च किया जाएगा। डा. मनोज कुमार रावत, प्राचार्य, आगरा कॉलेज
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पंडित गंगाधर शास्त्री द्वारा 1823 में स्थापित आगरा कॉलेज को 25 लाख रुपये मिले हैं। मोतीलाल नेहरू और सर छोटू राम इस कॉलेज के पूर्व छात्रों में शामिल हैं। कॉलेज के पास दस हजार से अधिक दुर्लभ अभिलेखों का खजाना है। इसमें बाबरनामा, ब्रिटिस डिक्शनरी जैसी ऐतिहासिक महत्व की पुस्तकें हैं। जनवरी में प्राचार्य ने कॉलेज की ओर से प्रस्ताव भेजा था। इसमें कॉलेज को 150 साल से भी पुराना और आजादी की जंग में सहयोगी बताया। यूजीसी ने इसे विरासत मानते हुए इसके रखरखाव को 25 लाख रुपये का बजट जारी किया। खासतौर पर यूजीसी ने पुस्तकालय में प्राचीन अभिलेखों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया। वर्तमान में कॉलेज की लाइब्रेरी में एक लाख से अधिक पुस्तकों का भंडार है। इसमें पारसी धर्म की पुस्तक, मुगल काल और हिंदू राजाओं से जुड़े अभिलेख हैं। इनके रखरखाव के लिए कॉलेज राजकीय अभिलेखागार की मदद लेगा। रासायनिक पदार्थ की मदद से पुस्तकों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के इंतजाम होंगे।
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आजादी की जंग का भी बना गवाह
- 1857 की क्रांति का असर आगरा में भी दिखा। आजादी के मतवालों ने आगरा कॉलेज पर धावा बोल दिया। यहां पुस्तकालय को आग के हवाले कर अंग्रेजाें को खदेड़ दिया। प्रधानाचार्य टीवी केन ने अंग्रेज शिक्षकाें के साथ आगरा किला में शरण ली।
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1823 में रखी कालेज की नींव
- पंडित गंगाधर शास्त्री ने दान में मिली जमीन पर 1823 में संस्कृत विद्यालय के रूप में नींव रखी। उस वक्त इसमें 13 छात्र अध्ययनरत थे। शास्त्री जी ग्वालियर के सिंधिया राजघराने के राजपुरोहित थे। बाद में अंग्रेजों ने इस पर स्वामित्व कर विस्तार किया। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के पिता पंडित मोतीलाल नेहरू, चौधरी चरण सिंह भी यहां के छात्र रहे।
वर्जन
- कॉलेज का एतिहासिक महत्व है। विरासत का दर्जा मिला, बड़ी उपलब्धि है। धनराशि को पुस्तकालय में प्राचीन अभिलेखाें को सुरक्षित रखने में खर्च किया जाएगा। डा. मनोज कुमार रावत, प्राचार्य, आगरा कॉलेज