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आगरा कैंट स्टेशन मास्टर पिटाई कांड: जांच कमेटी ने 4 आरपीएफ कर्मियों को माना दोषी
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आगरा। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर के साथ आरपीएफ कर्मियों की मारपीट के बहुचर्चित मामले में जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने घटना के लिए चार आरपीएफ कर्मियों को सीधे तौर पर दोषी ठहराया है। साथ ही, बल के आचरण में सुधार के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में ''''इमोशनल इंटेलिजेंस'''', टकराव प्रबंधन और अंतर-विभागीय समन्वय को अनिवार्य रूप से शामिल करने की अहम सिफारिश की है।
यह सनसनीखेज घटना बीते 12 जुलाई को घटी थी, जब आगरा कैंट के स्टेशन मास्टर नरेंद्र सिंह चाहर ने दो यात्रियों को चढ़ाने के लिए हीराकुंड एक्सप्रेस को कुछ देर रोका था। आरपीएफ जवानों ने इसे आपातकालीन चेन पुलिंग मानकर यात्रियों पर जुर्माना लगाने की कोशिश की। इस बात पर हुए विवाद के बाद आरपीएफ जवानों ने स्टेशन मास्टर से मारपीट और बदसलूकी की थी। इस घटना के बाद रेलवे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीनियर डीएससी का तबादला कर दिया था और चार आरोपी सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया था।
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि ऑन-ड्यूटी रेलकर्मियों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समिति ने चेन पुलिंग के मामलों से निपटने के लिए एक स्पष्ट और एकसमान प्रक्रिया बनाने, लिखित रिकॉर्ड अनिवार्य करने, स्टेशन इम्प्रूवमेंट ग्रुप में वरिष्ठ सुपरवाइजरों की उपस्थिति अनिवार्य करने जैसी 11 सिफारिशें दी हैं। साथ ही, तनावपूर्ण माहौल के बीच ट्रेनों का सुगम संचालन जारी रखने के लिए स्टेशन स्टाफ के पेशेवर आचरण की सराहना की गई है।
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उधर, ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव शरद चंद्र पुरोहित ने रिपोर्ट पर संतोष जताते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मांग की है कि अनुशासन की मिसाल कायम करने के लिए रेलवे प्रशासन को चारों दोषी आरपीएफ सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करना चाहिए। उनका कृत्य आपराधिक था और इससे भारतीय रेलवे की छवि धूमिल हुई है।
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यह सनसनीखेज घटना बीते 12 जुलाई को घटी थी, जब आगरा कैंट के स्टेशन मास्टर नरेंद्र सिंह चाहर ने दो यात्रियों को चढ़ाने के लिए हीराकुंड एक्सप्रेस को कुछ देर रोका था। आरपीएफ जवानों ने इसे आपातकालीन चेन पुलिंग मानकर यात्रियों पर जुर्माना लगाने की कोशिश की। इस बात पर हुए विवाद के बाद आरपीएफ जवानों ने स्टेशन मास्टर से मारपीट और बदसलूकी की थी। इस घटना के बाद रेलवे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीनियर डीएससी का तबादला कर दिया था और चार आरोपी सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया था।
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जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि ऑन-ड्यूटी रेलकर्मियों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समिति ने चेन पुलिंग के मामलों से निपटने के लिए एक स्पष्ट और एकसमान प्रक्रिया बनाने, लिखित रिकॉर्ड अनिवार्य करने, स्टेशन इम्प्रूवमेंट ग्रुप में वरिष्ठ सुपरवाइजरों की उपस्थिति अनिवार्य करने जैसी 11 सिफारिशें दी हैं। साथ ही, तनावपूर्ण माहौल के बीच ट्रेनों का सुगम संचालन जारी रखने के लिए स्टेशन स्टाफ के पेशेवर आचरण की सराहना की गई है।
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उधर, ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव शरद चंद्र पुरोहित ने रिपोर्ट पर संतोष जताते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मांग की है कि अनुशासन की मिसाल कायम करने के लिए रेलवे प्रशासन को चारों दोषी आरपीएफ सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करना चाहिए। उनका कृत्य आपराधिक था और इससे भारतीय रेलवे की छवि धूमिल हुई है।