बीएड फर्जीवाड़ा: मैनपुरी में टेंपर्ड प्रमाणपत्र वाले 33 शिक्षकों पर गिरेगी गाज, समाप्त हो सकती है सेवा
एसआईटी सूची में शामिल जिले के 77 शिक्षकों में से 44 फर्जी बीएड डिग्री वाले शिक्षकों को पूर्व में ही सेवा से बाहर कर दिया गया है। इनमें चार शिक्षकों की बर्खास्तगी जनवरी 2020 में हुई थी। 40 शिक्षकों को फरवरी 2021 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद सेवा से बाहर किया गया है।
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मैनपुरी जिले में बीएड के टेंपर्ड प्रमाणपत्रों से नौकरी पाने वाले तैनात 33 शिक्षकों की सेवा जल्द समाप्त हो सकती है। हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच कर रही डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की समिति ने उनके अंकपत्र को टेंपर्ड (अंकों में छेड़छाड़) माना है। हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई 28 जून को है। एसआईटी ने इन शिक्षकों के अंकपत्र टेंपर्ड घोषित किए थे। विश्वविद्यालय समिति के निर्णय के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें बाहर करने की तैयारियां शुरू कर दी है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के नाम से बीएड सत्र 2004-05 के फर्जी और टेंपर्ड प्रमाणपत्रों से जिले में 77 लोगों ने शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। एसआईटी ने मामले की जांच की तो जिले में कार्यरत 44 शिक्षकों का बीएड अंकपत्र और डिग्री फर्जी निकली।
इन प्रमाणपत्रों का डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। एसआईटी ने 33 शिक्षकों की बीएड डिग्री टेंपर्ड घोषित किया। फर्जी डिग्री वालों को पूर्व में ही सेवा से बाहर किया जा चुका है। टेंपर्ड अंकपत्र वाले शिक्षकों की विश्वविद्यालय जांच कर रहा था।
शुक्रवार को विश्वविद्यालय की जांच समिति ने एसआईटी सूची में शामिल 1021 शिक्षकों का अंकपत्र टेंपर्ड माने हैं। इनमें जिले में कार्यरत 33 शिक्षक भी शामिल हैं। विश्वविद्यालय द्वारा अंकपत्र को टेंपर्ड माने जाने के बाद जिले में तैनात 33 शिक्षकों का सेवा से बाहर होना तय हो गया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद इन्हें सेवा से बाहर करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
बिना वेतन के कर रहे हैं कार्य
एसआईटी सूची में शामिल जिले के 77 में से 73 शिक्षकों को 30 नवंबर 2020 को बीएसए विजय प्रताप सिंह ने एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर सेवा से बाहर कर दिया था। बाद में ये शिक्षक कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने विश्वविद्यालय की रिपोर्ट आने तक इन्हें बिना वेतन के कार्य करने के आदेश दिए थे। 26 फरवरी को फर्जी डिग्रीधारक 40 शिक्षकों को सेवा से बाहर कर दिया गया था। वर्तमान में टेंपर्ड अंकपत्र वाले 33 शिक्षक बिना वेतन के कार्य कर रहे हैं।
दो नवंबर 2017- एसआईटी ने फजी शिक्षकों की सूची जनपद भेजी।
15 नवंबर 2017- बीएसए ने बर्खास्तगी का प्रथम नोटिस जारी कर मांगा जवाब।
20 अगस्त 2018- बीएसए ने बर्खास्तगी के लिए द्वितीय नोटिस जारी कर मांगा जवाब।
जून 2019- एसआईटी ने दूसरी सीडी बीएसए को भेजी।
जुलाई 2019- बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारी को जांच के लिए विश्वविद्यालय भेजा ।
21 सितंबर 2019- बीएसए ने तीसरा व अंतिम बर्खास्तगी नोटिस किया जारी ।
30 नवंबर 2019- 73 शिक्षकों की जिला चयन समिति के निर्देश पर बीएसए ने सेवा की समाप्त ।
जनवरी 2020- चार शिक्षकों की सेवा की गई समाप्त ।
फरवरी 2020- 73 बर्खास्त शिक्षकों ने बर्खास्तगी को कोर्ट में दी चुनौती, कोर्ट ने बिना वेतन के काम करने के दिया आदेश।
फरवरी, 2020- कोर्ट ने विश्वविद्यालय से जांच कर मांगी रिपोर्ट ।
26 फरवरी 2021- विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के बाद फर्जी डिग्री धारक 40 शिक्षक सेवा से हुए बाहर।
25 जून, 2021- विश्वविद्यालय ने एसआईटी सूची में शामिल 33 शिक्षकों के अंकपत्र माने टेंपर्ड ।
बीएसए विजय प्रताप सिंह ने बताया कि एसआईटी सूची में शामिल टेंपर्ड शिक्षक बिना वेतन के काम कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने उनके अंकपत्रों को टेंपर्ड माना है, इसकी सूचना मिली है। कोर्ट में 28 जून को सुनवाई है। जो निर्णय आएगा उसके अनुसार कार्य किया जाएगा। शिक्षकों को सेवा से बाहर करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।