किसान आंदोलन के समर्थन में आए आगरा के अधिवक्ता, कृषि कानूनों के विरोध में लिया यह फैसला
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आगरा में किसान आंदोलन का उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति और डॉ. आंबेडकर बार एसोसिएशन ने समर्थन किया है। कृषि कानूनों के विरोध में अधिवक्ताओं ने शनिवार को न्यायिक कार्य नहीं किया। इससे पूर्व उच्च न्यायालय खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति ने शुक्रवार को सभा की। इसमें किसान आंदोलन का समर्थन किया गया।
सभा में तीनों किसान कानूनों बिजली विधेयक और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर नया कानून लाने की पुरजोर मांग की गई। ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के लिए किसान नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और आंदोलन को बदनाम करने की निंदा की।
विरोध में अधिवक्ताओं ने शनिवार को न्यायिक कार्य का भी बहिष्कार किया। इस संबंध में एक ज्ञापन जिला जज को दिया गया। सभा में संयोजक केडी शर्मा, संचालनकर्ता सचिव अरुण सोलंकी, सुरेंद्र लाखन, दुर्ग विजय सिंह भैया, राम दरबेश, केसी शर्मा, भारत सिंह, नासिर वारसी, केपी सिंह चौहान, रमेश चंद्र, सूरजभान भारती, बीपी ओझा रमाशंकर राजपूत आदि मौजूद रहे।
डॉक्टर आंबेडकर बार एसोसिएशन ने भी छह फरवरी को किसान आंदोलन के समर्थन में न्यायिक कार्य नहीं करने का निर्णय लिया। बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता करतार सिंह भारतीय, खेमचंद शाक्यवार, अमर सिंह कमल, ओपी सिंह, राजेंद्र कुमार कर्दम, जसवंत सिंह राना, डा. राजकुमार, प्रभुदयाल, रामदत्त दिवाकर, रविंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
पुलिस ने पढ़ाया कृषि कानून का पाठ
किसान आंदोलन के लिए पुलिस का अलर्ट जारी किया गया है। शहर से लेकर देहात के थानों की पुलिस ने शुक्रवार को गांव-गांव में बैठक की। किसानों से वार्ता की गई। उन्हें कृषि कानूनों का पाठ पढ़ाया। दिल्ली में 26 जनवरी को हुए बवाल के बाद भी किसानों का आंदोलन जारी है।
किसान नेता जगह-जगह बैठक करके आंदोलन में भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। इसको देखते हुए पुलिस का अलर्ट जारी किया गया है। शुक्रवार को पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने जगह-जगह बैठक कीं। किसानों से वार्ता की गई। उन्हें कृषि कानून के बारे में जानकारी दी गई। एलआईयू को भी अलर्ट किया गया है। वह अलग से निगाह बनाए हुए है।