{"_id":"627c1ac64d873c021a2f7e22","slug":"after-25-years-the-accused-acquitted-due-to-lack-of-evidence-agra-news-agr5332104178","type":"story","status":"publish","title_hn":"25 वर्ष बाद आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
25 वर्ष बाद आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
विज्ञापन
आगरा। बाह के गांव फरैरा में 25 वर्ष पूर्व हुए जातीय विवाद में हत्या के मामले में पुलिस आरोपी गजेंद्र सिंह के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। इस पर अपर जिला जज महेंद्र कुमार ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी करने के आदेश किए।
घटना जनवरी 1997 की है। बाह के गांव फरैरा में दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया था। इससे जातीय तनाव पैदा हुआ था। बाद में दोनों पक्ष के लोगों में पंचायत में सुलह हो गई। मुकदमे के वादी राजेंद्र सिंह के अनुसार पंचायत में सुलह के बाद उनका भाई गिरंद सिंह अपने स्कूटर से एवं अन्य ग्रामीण अपने वाहनों से गांव फरैरा आ रहे थे। वह भी कचहरी का काम खत्म कर अपने भाई प्रवेंद्र सिंह व अन्य के साथ अपनी जीप से गिरंद सिंह के पीछे आ रहे थे।
राजेंद्र सिंह का आरोप था कि रास्ते में देवता प्रसाद के नलकूप के पास विपक्षीगण की जीप सामने से आती दिखाई दी।, जिसमें आरोपी गजेंद्र सिंह, सोनू-मोनू और चंद्रभान बैठे थे। जीप को चंद्रभान चला रहा था। उसने वादी के भाई गिरंद सिंह को जान से मारने की नीयत से जीप उस पर चढ़ा दी। जीप को कई बार आगे-पीछे करके गिरंद को कुचल दिया। जीप में बैठे लोगों ने गाड़ी से उतरकर चंद्रभान से कहा कि तूने चाचा की बनाई योजना सफल कर दी।
विज्ञापन
वादी राजेंद्र की तहरीर पर बाह थाने में आरोपी गजेंद्र सिंह, चंद्रभान सिंह, सोनू, मोनू और फरेंद्र सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान आरोपी सोनू और मोनू की नामजदगी गलत पाई गई, जबकि आरोपी चंद्रभान सिंह और फरेंद्र की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी गजेंद्र सिंह के खिलाफ चार्जशीट लगाई थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता महताब सिंह के तर्क एवं पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अदालत ने आरोपी गजेंद्र सिंह को बरी करने के आदेश किए।
विज्ञापन
घटना जनवरी 1997 की है। बाह के गांव फरैरा में दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया था। इससे जातीय तनाव पैदा हुआ था। बाद में दोनों पक्ष के लोगों में पंचायत में सुलह हो गई। मुकदमे के वादी राजेंद्र सिंह के अनुसार पंचायत में सुलह के बाद उनका भाई गिरंद सिंह अपने स्कूटर से एवं अन्य ग्रामीण अपने वाहनों से गांव फरैरा आ रहे थे। वह भी कचहरी का काम खत्म कर अपने भाई प्रवेंद्र सिंह व अन्य के साथ अपनी जीप से गिरंद सिंह के पीछे आ रहे थे।
विज्ञापन
राजेंद्र सिंह का आरोप था कि रास्ते में देवता प्रसाद के नलकूप के पास विपक्षीगण की जीप सामने से आती दिखाई दी।, जिसमें आरोपी गजेंद्र सिंह, सोनू-मोनू और चंद्रभान बैठे थे। जीप को चंद्रभान चला रहा था। उसने वादी के भाई गिरंद सिंह को जान से मारने की नीयत से जीप उस पर चढ़ा दी। जीप को कई बार आगे-पीछे करके गिरंद को कुचल दिया। जीप में बैठे लोगों ने गाड़ी से उतरकर चंद्रभान से कहा कि तूने चाचा की बनाई योजना सफल कर दी।
विज्ञापन
वादी राजेंद्र की तहरीर पर बाह थाने में आरोपी गजेंद्र सिंह, चंद्रभान सिंह, सोनू, मोनू और फरेंद्र सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान आरोपी सोनू और मोनू की नामजदगी गलत पाई गई, जबकि आरोपी चंद्रभान सिंह और फरेंद्र की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी गजेंद्र सिंह के खिलाफ चार्जशीट लगाई थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता महताब सिंह के तर्क एवं पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अदालत ने आरोपी गजेंद्र सिंह को बरी करने के आदेश किए।