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जीत गया किसान: हाईकोर्ट से ट्रिब्यूनल तक लड़ी लड़ाई, धरने के बाद मिला 15 लाख का डीडी; जानें पूरा मामला
Wed, 14 Oct 2026 10:45 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 14 Oct 2026 10:45 AM IST
सार
आगरा के खंदौली निवासी किसान शिव सिंह को आलू के भुगतान के लिए 15 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। सोमवार को बैंक में धरने के बाद उन्हें 15 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट मिला। किसान ने दो कोल्ड स्टोरेज संचालकों पर 11,400 पैकेट आलू बेचने का आरोप लगाया है।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आलू के भुगतान के लिए एक किसान को 15 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। हाईकोर्ट से लेकर ट्रिब्यूनल तक मामला पहुंचा, लेकिन रकम के लिए इंतजार खत्म नहीं हुआ। आखिरकार सोमवार को कटरा वजीर खां स्थित पंजाब नेशनल बैंक में धरने पर बैठने के बाद किसान को 15 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) मिला।
खंदौली के नगला नीम निवासी किसान शिव सिंह के मुताबिक, तत्कालीन जिलाधिकारी ने 25 अगस्त 2011 को आलू शांति व्रत आइस एंड कोल्ड स्टोरेज और नटराज कोल्ड स्टोरेज के खिलाफ आरसी जारी की थी। आलू की बिक्री दर छह रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई थी। कार्रवाई रुकवाने के लिए कोल्ड स्टोरेज संचालक हाईकोर्ट पहुंचे। इसके बाद मामला लखनऊ स्थित ट्रिब्यूनल कोर्ट में पहुंचा, जहां किसानों को राहत मिली। जिलाधिकारी ने भी भुगतान के लिए आदेश जारी किए।
हालांकि, कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने दोबारा सुनवाई के लिए अपील कर दी। इस मामले में अगली सुनवाई 19 तारीख को निर्धारित है। भुगतान में फिर देरी होने से नाराज शिव सिंह के समर्थन में करीब एक दर्जन किसान बैंक पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। इसके बाद बैंक प्रबंधक ने किसान को 15 लाख रुपये का डीडी सौंप दिया।
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आलू भुगतान के लिए वर्षों करना पड़ा संघर्ष
शिव सिंह का आरोप है कि दोनों कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने उनके 11,400 पैकेट आलू बेच दिए थे। इनमें एक संचालक ने 4,400 और दूसरे ने 7,000 पैकेट बेचे। किसानों का कहना है कि आलू बिकने के बावजूद भुगतान के लिए उन्हें वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा।
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खंदौली के नगला नीम निवासी किसान शिव सिंह के मुताबिक, तत्कालीन जिलाधिकारी ने 25 अगस्त 2011 को आलू शांति व्रत आइस एंड कोल्ड स्टोरेज और नटराज कोल्ड स्टोरेज के खिलाफ आरसी जारी की थी। आलू की बिक्री दर छह रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई थी। कार्रवाई रुकवाने के लिए कोल्ड स्टोरेज संचालक हाईकोर्ट पहुंचे। इसके बाद मामला लखनऊ स्थित ट्रिब्यूनल कोर्ट में पहुंचा, जहां किसानों को राहत मिली। जिलाधिकारी ने भी भुगतान के लिए आदेश जारी किए।
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हालांकि, कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने दोबारा सुनवाई के लिए अपील कर दी। इस मामले में अगली सुनवाई 19 तारीख को निर्धारित है। भुगतान में फिर देरी होने से नाराज शिव सिंह के समर्थन में करीब एक दर्जन किसान बैंक पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। इसके बाद बैंक प्रबंधक ने किसान को 15 लाख रुपये का डीडी सौंप दिया।
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आलू भुगतान के लिए वर्षों करना पड़ा संघर्ष
शिव सिंह का आरोप है कि दोनों कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने उनके 11,400 पैकेट आलू बेच दिए थे। इनमें एक संचालक ने 4,400 और दूसरे ने 7,000 पैकेट बेचे। किसानों का कहना है कि आलू बिकने के बावजूद भुगतान के लिए उन्हें वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा।