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Kargil War Vijay Diwas 2020: बहादुर बेटे के बलिदान पर गर्व, 'तंत्र के छल' से छलकी मां-बाप की आंखें
Sun, 26 Jul 2020 12:26 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 26 Jul 2020 12:26 PM IST
सार
- घर के लिए पक्का रास्ता भी नसीब नहीं, वादे के मुताबिक न स्मारक बनवाया और न तालाब का सौंदर्यीकरण हुआ
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शहीद निर्वेश के माता-पिता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
10 साल पहले 9 नक्सलियों को ढेर कर अपनी जान कुर्बान करने वाले आगरा के बाह के बहादुर लाल निर्वेश पर माता-पिता को गर्व है। लेकिन, शहीद स्मारक, शहीद मार्ग और स्मृति में तालाब के विकास के वादे के नाम पर शासन-प्रशासन के किए गए छल से उनकी आंखें छलक पड़ती हैं।
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बाह के नौगवां निवासी निर्वेश सीआरपीएफ के जवान थे। 6 अप्रैल 2010 में ऑपरेशन ग्रीन हंट में 9 नक्सलियों को ढेर कर बाह के नौगवां के निर्वेश शहीद हुए थे। 2011 की गृह मंत्रालय की डायरी में शहीद स्मारक के निर्माण का उल्लेख था। शहीद के पिता पीतम सिंह नरवरिया, मां शांती देवी ने सरकार द्वारा स्मारक का निर्माण न कराने पर 2012 में खुद की मेहनत की कमाई से बेटे की यादों का सहेजा।
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शहीद स्मारक पर हुए 3 लाख 12 हजार रुपये के व्यय का आंकलन सरकार द्वारा लोक निर्माण विभाग से कराया। जिसमें ढाई लाख रुपये भुगतान किए जाने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल अंबिकापुर छत्तीसगढ़ के कमांडेण्ट मैथ्यू ए जान ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा। पर, भुगतान नहीं हो सका।
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सरकारी वादे अधूरे
शहीद के पिता पीतम सिंह नरवरिया ने बताया कि बेटे की शहादत के वक्त शासन प्रशासन ने शहीद स्मारक के निर्माण, शहीद की स्मृति में गांव के तालाब का सौंदर्यीकरण कराने, शहीद मार्ग का निर्माण कराने का वादा किया था। घर के लिए 60 मीटर की पगडंडी तक पक्की नहीं हुई है। निर्वेश की शहादत के लिए सरकार दो गज जमीन और पांच ईंटें भी नहीं दे पाई है। ढेरों शिकायतें की गईं, नतीजा सिफर ही रहा है।
शहीद बेटे को भोग लगाकर मनाते हैं तीज-त्योहार
होली, दीवाली, रक्षा बंधन या कोई और त्योहार हो। शहीद स्मारक पहुंचकर मां शांती देवी और पिता पीतम सिंह बेटे को भोग लगाते हैं। उसके बाद ही परिवार के लोग त्योहार की परंपराओं का निर्वहन करते हैं। शहादत दिवस पर हवन यज्ञ होता है। यही वजह है कि परिवार के लिए त्योहार की खुशियां बेटे के बलिदान की यादों से आंखें भिगो जाती हैं।
शहीद बेटे को भोग लगाकर मनाते हैं तीज-त्योहार
होली, दीवाली, रक्षा बंधन या कोई और त्योहार हो। शहीद स्मारक पहुंचकर मां शांती देवी और पिता पीतम सिंह बेटे को भोग लगाते हैं। उसके बाद ही परिवार के लोग त्योहार की परंपराओं का निर्वहन करते हैं। शहादत दिवस पर हवन यज्ञ होता है। यही वजह है कि परिवार के लिए त्योहार की खुशियां बेटे के बलिदान की यादों से आंखें भिगो जाती हैं।