आगरा: 'आपकी सास आंगनबाड़ी में, अपना बच्चा ही कुपोषित तो औरों को कैसे करेंगी जागरूक'
आगरा में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित मोहन प्रसाद शनिवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने पोषण पुनर्वास केंद्र का हाल देखा। यहां भर्ती कुपोषित तीन बच्चों के परिजनों से बात की। उन्होंने पूछा कि यहां उपचार कैसा मिल रहा है, दवाएं बाजार से तो नहीं लानी पड़ रही, खाने पीने समेत पौष्टिक आहार मिल रहा है कि नहीं।
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क्या नाम है बच्ची का, मां बोली दृष्टि है साहब। क्या परेशानी है, जवाब मिला कुपोषित है। पास में खड़ी डायटीशियन बोली सर, ये रेखा हैं और इनकी सास कांति देवी आंगनबाड़ी में हैं। ये सुनकर अपर मुख्य सचिव बोले, अरे आपकी सास आंगनबाड़ी में हैं और खुद की बच्ची ही कुपोषित, फिर कैसे औरों को कुपोषण के प्रति जागरूक करती होंगी।
आगरा में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित मोहन प्रसाद के शनिवार को पोषण पुनर्वास केंद्र के निरीक्षण के दौरान यह वाकया पेश आया। अपर मुख्य सचिव दोपहर 12:05 बजे जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे। पोषण पुनर्वास केंद्र में प्रमुख अधीक्षक डॉ. अशोक अग्रवाल से पूछा कि कितने बेड हैं और कितने बच्चे भर्ती हैं।
प्रमुख अधीक्षक ने बताया कि 25 बेड हैं और 18 शिशु भर्ती हैं। उन्होंने राजकीय शिशु गृह के शिशु मोहित का हाल पूछा। डायटीशियन ने बताया कि जब शिशु भर्ती हुआ था तब उसका वजन 3.80 किलो था, अब इसका वजन 4.135 किलो हो गया है। अपर मुख्य सचिव ने इसकी रिपोर्ट तलब की है।
बच्ची की मां से पूछा- दवाएं तो बाजार नहीं लानी पड़ती
दूसरे बेड पर गए तो यहां बिचपुरी पथौली की सुमन अपनी बच्ची आयूषी के साथ बैठी थी। अपर मुख्य सचिव ने उनसे पूछा कि खाना-पीना मिलता है कि नहीं, उपचार सही चल रहा है, दवाएं बाजार से तो नहीं लानी पड़ती हैं। डायटीशियन ललितेश शर्मा से शिशु की सेहत का हाल पूछा तो उन्होंने बताया कि ये एक साल की बच्ची है, आठ दिन पहले जब भर्ती हुई थी तब इसका वजन 4.6 किलो था, अब पांच किलो हो गया है।
अपर मुख्य सचिव ने किचन का भी हाल देखा। यहां पर नाम नहीं लिखा था, इस पर डीएम ने बोर्ड लगवाने के निर्देश दिए। पीकू वार्ड के बारे में पूछा कि कोई बच्चा भर्ती हुआ था कि नहीं। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि इसकी नौबत नहीं आई।
एक्सरे-सीटी स्कैन को लगी भीड़, कैसे करते हैं व्यवस्था
अपर मुख्य सचिव ने सीटी स्कैन, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड कक्ष का भी निरीक्षण किया। यहां पर मरीजों की भीड़ लगी हुई थी। प्रमुख अधीक्षक से पूछा कि इतनी भीड़ कैसे व्यवस्थित करते हैं। प्रमुख अधीक्षक ने बताया कि निशुल्क सेवा होने के कारण मरीजों की भीड़ रहती है। एक चिकित्सक को 60 से 80 एक्सरे-सीटी करने पड़ते हैं। ओपीडी में भी रोजाना औसतन तीन हजार मरीज आते हैं।
होम्योपैथिक क्लीनिक शिफ्ट करने की मांग
नई ओपीडी भवन का निरीक्षण करते वक्त अपर मुख्य सचिव ने फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने में देरी की वजह पूछी। पानी के टैंक और एनओसी में होम्योपैथिक क्लीनिक को अड़ंगा बताया गया। प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल ने कहा कि फायर ब्रिगेड की मशीन के लिए रास्ता चाहिए, जो होम्योपैथिक क्लीनिक की वजह से रुका है।उन्होंने क्लीनिक को यहां से शिफ्ट करने की मांग की और कहा कि होम्योपैथिक क्लीनिक की मरम्मत के लिए 11.50 लाख रुपये स्वीकृत करा लिए हैं। इस पर डीएम ने कहा कि इतनी धनराशि में तो अलग से भवन बन जाएगा। डीएम ने फिलहाल क्लीनिक को नए ओपीडी भवन में शिफ्ट करने की बात कही।