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सीवर मामले में एडीए उपाध्यक्ष पहुंचे नालंदा टाउन
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आगरा। नालंदा टाउन के सीवर मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने एडीए पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया तो शनिवार को आगरा विकास प्राधिकरण का पूरा अमला नालंदा टाउन पहुंच गया। सीवर के नाले में मिलने वाली जगह समेत कॉलोनी का निरीक्षण कर लोगों से मुलाकात की। समाधान तलाशने के लिए सोमवार को एडीए कार्यालय में कॉलोनी निवासियों के साथ बैठक बुलाई गई है।
एडीए उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने अधिकारियों और इंजीनियरों की टीम के साथ शमसाबाद रोड पर स्थित कॉलोनी से निकल रहे सीवर को पंप कर मैदान में डालने और वहां से नाले में पहुंचने की स्थिति देखी। कॉलोनी में 300 परिवार रहते हैं, जिनका सीवर बिना ट्रीटमेंट के मैदान में गिरता है। डॉ. पैंसिया ने नाला निर्माण और एसटीपी बनाने की संभावनाओं को तलाशा। नालंदा टाउन के निवासियों से समाधान पर बात की। मामले में एडीए उपाध्यक्ष सोमवार को नालंदा टाउन के लोगों और याचिकाकर्ता के साथ बैठक करेंगे।
याचिकाकर्ता देवांशु बोस ने नालंदा टाउन कॉलोनी का सीवर बिना ट्रीटमेंट के खुले मैदान में छोड़ने की शिकायत की थी। मामले में एनजीटी ने एडीए पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और एडीए उपाध्यक्ष व अपर मुख्य सचिव नगर विकास को अगली सुनवाई पर पेश होने के आदेश दिए हैं।
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एनजीटी के आदेश में प्रशासन, एडीए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त जांच कमेटी की रिपोर्ट का ब्योरा भी दिया गया है। इसमें स्पष्ट है कि एडीए उपाध्यक्ष को तीन बार संयुक्त जांच कमेटी की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशें भेजी गईं, पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। एडीए ने संयुक्त जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर वैकल्पिक इंतजाम भी नहीं किए।
संयुक्त जांच कमेटी ने रिपोर्ट में कहा था कि नालंदा टाउन का सीवर भूमिगत टैंक में एकत्र कर उसे पंपिंग सेट से बाहर मैदान में फेंका जाता है। वहां से यह नाले में पहुंचता है। नालंदा टाउन और इसके आसपास कोई सीवर लाइन नहीं है। जिस नाले में सीवर जा रहा है, वह किसी भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ा नहीं है, इसलिए एसटीपी बनने तक अस्थायी व्यवस्था के कदम उठाए जाएं। यह रिपोर्ट 28 दिसंबर को एडीए उपाध्यक्ष को भेजी गई। 7 जनवरी को रिमाइंडर भेजा गया, जिसमें एक दिसंबर के आदेश का पालन करने को कहा गया। 17 जनवरी को फिर से उपाध्यक्ष को रिपोर्ट भेजकर पालन करने को कहा गया, पर इस पत्र के जवाब में 2 फरवरी को एडीए ने कहा कि आचार संहिता लगी होने के कारण कोई भी काम 10 मार्च के बाद किया जा सकेगा।
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एडीए उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने अधिकारियों और इंजीनियरों की टीम के साथ शमसाबाद रोड पर स्थित कॉलोनी से निकल रहे सीवर को पंप कर मैदान में डालने और वहां से नाले में पहुंचने की स्थिति देखी। कॉलोनी में 300 परिवार रहते हैं, जिनका सीवर बिना ट्रीटमेंट के मैदान में गिरता है। डॉ. पैंसिया ने नाला निर्माण और एसटीपी बनाने की संभावनाओं को तलाशा। नालंदा टाउन के निवासियों से समाधान पर बात की। मामले में एडीए उपाध्यक्ष सोमवार को नालंदा टाउन के लोगों और याचिकाकर्ता के साथ बैठक करेंगे।
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याचिकाकर्ता देवांशु बोस ने नालंदा टाउन कॉलोनी का सीवर बिना ट्रीटमेंट के खुले मैदान में छोड़ने की शिकायत की थी। मामले में एनजीटी ने एडीए पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और एडीए उपाध्यक्ष व अपर मुख्य सचिव नगर विकास को अगली सुनवाई पर पेश होने के आदेश दिए हैं।
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एनजीटी के आदेश में प्रशासन, एडीए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त जांच कमेटी की रिपोर्ट का ब्योरा भी दिया गया है। इसमें स्पष्ट है कि एडीए उपाध्यक्ष को तीन बार संयुक्त जांच कमेटी की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशें भेजी गईं, पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। एडीए ने संयुक्त जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर वैकल्पिक इंतजाम भी नहीं किए।
संयुक्त जांच कमेटी ने रिपोर्ट में कहा था कि नालंदा टाउन का सीवर भूमिगत टैंक में एकत्र कर उसे पंपिंग सेट से बाहर मैदान में फेंका जाता है। वहां से यह नाले में पहुंचता है। नालंदा टाउन और इसके आसपास कोई सीवर लाइन नहीं है। जिस नाले में सीवर जा रहा है, वह किसी भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ा नहीं है, इसलिए एसटीपी बनने तक अस्थायी व्यवस्था के कदम उठाए जाएं। यह रिपोर्ट 28 दिसंबर को एडीए उपाध्यक्ष को भेजी गई। 7 जनवरी को रिमाइंडर भेजा गया, जिसमें एक दिसंबर के आदेश का पालन करने को कहा गया। 17 जनवरी को फिर से उपाध्यक्ष को रिपोर्ट भेजकर पालन करने को कहा गया, पर इस पत्र के जवाब में 2 फरवरी को एडीए ने कहा कि आचार संहिता लगी होने के कारण कोई भी काम 10 मार्च के बाद किया जा सकेगा।