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आगरा: खुले मैदान में सीवर छोड़ने पर एडीए पर लगा 25 लाख रुपये का जुर्माना

Sat, 26 Mar 2022 09:29 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 26 Mar 2022 09:29 AM IST
सार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नालंदा टाउन कॉलोनी का सीवर खुले में डालने पर बड़ी कार्रवाई की है। एनजीटी की बेंच ने आगरा विकास प्राधिकरण को कड़ी फटकार लगाते हुए आदेश में कहा है कि गुमराह करने वाले एडीए अधिकारियों के खिलाफ उपाध्यक्ष कार्रवाई करें।

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ADA fined Rs 25 lakh for leaving sewer open ground in agra hindi news
एनजीटी ने लगाया एडीए पर जुर्माना

विस्तार

शमसाबाद रोड की नालंदा टाउन कॉलोनी का 1.45 लाख लीटर सीवर हर दिन खुले मैदान में छोड़ने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने एडीए पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही दो माह के अंदर सीवर लाइन डालने या एसटीपी के जरिए सीवर ट्रीटमेंट के आदेश दिए हैं। एनजीटी ने 6 जुलाई को अगली सुनवाई में एडीए उपाध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव नगर विकास को तलब किया है।

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एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल, एक्सपर्ट मेंबर प्रो. ए सेंथिल वेल, विजय कुलकर्णी और अफरोज अहमद की बेंच ने आगरा के देवांशु बोस की याचिका पर एडीए पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। देवांशु बोस ने शमसाबाद रोड की नालंदा टाउन कॉलोनी का सीवर बिना ट्रीटमेंट के खुले मैदान में छोड़ने और नाले के जरिए उसके यमुना में गिरने की शिकायत की थी।
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नालंदा टाउन के बिल्डर ने एडीए को विकास कार्यों के लिए 1.30 करोड़ रुपये भी जमा कराए थे, पर एडीए ने न सीवर लाइन बिछाई और ना हीं नाला बनाया। ऐसे में कालोनी का सीवर खुले मैदान से होकर नाले में गिर रहा था। वाटर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पाल्यूशन एक्ट 1974 के तहत इससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जबकि एनजीटी ने एक दिसंबर के आदेश में स्पष्ट कहा था कि अगर बजट नहीं है तो जरूरी बजट पर्यावरण से जुड़े नियमों के जरिए एकत्र कर सीवर को नाले में गिरने से रोका जाए।

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संयुक्त कमेटी ने दी थी यह रिपोर्ट

एनजीटी ने याचिका पर एडीए, डीएम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कमेटी गठित कर रिपोर्ट मांगी थी, जो एनजीटी में 22 फरवरी को दाखिल की गई। इस रिपोर्ट में कमेटी ने कहा कि सीवर का निस्तारण मानकों के तहत नहीं किया जा रहा है। यह जमीन पर छोड़ दिया गया जो एक नाले से जुड़ी है। यहां सीवर लाइन नहीं है, जबकि नालंदा टाउन के डेवलपर ने एडीए में 1.3 करोड़ रुपये जमा कराए हैं। एक बार 52.80 लाख रुपये और विकास कार्य के लिए 77.68 लाख रुपये एडीए को दिए गए। 

ड्यूटी निभाने में फेल रहा है एडीए

एनजीटी बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि एडीए अपनी ड्यूटी निभाने में फेल साबित हुआ है। एडीए उपाध्यक्ष को इस मामले में जरूरी कदम उठाने होंगे। एडीए ने 10 मार्च को आचार संहिता खत्म होने के बाद काम शुरू करने के लिए कहा था, लेकिन एनजीटी बेंच ने इस समस्या को पुराना बताया और ढिलाई करार दी। तीन सदस्यीय संयुक्त कमेटी ने एनजीटी से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की सिफारिश की है। तब तक सीवेज को पाइपलाइन से कनेक्ट कर नजदीक के कार्यशील एसटीपी पर छोड़ने के लिए कहा है।

अधिकारियों से जुर्माना वसूल सकता है एडीए

एनजीटी की बेंच ने आगरा विकास प्राधिकरण को कड़ी फटकार लगाते हुए आदेश में कहा है कि गुमराह करने वाले एडीए अधिकारियों के खिलाफ उपाध्यक्ष कार्रवाई करें। अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। एडीए का रुख इस मामले में बेहद गैर जिम्मेदराना है, जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ा है। एडीए उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी, जवाबदेही तय करने के साथ प्राधिकरण पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह रकम एडीए अपने उन गुमराह, गलत करने वाले अधिकारियों से वसूलने के लिए स्वतंत्र है।

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