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अपने ही बुने जाल में फंसा एडीए
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 19 Dec 2014 02:02 AM IST
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आगरा। एक विवाद से पीछा छुड़ाने चले एडीए ने अपने साथ-साथ तमाम बिल्डरों के प्रोजेक्ट पर संकट खड़ा कर दिया है। आनंद इंजीनियरिंग कालेज के भू-उपयोग की जांच के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट के हिसाब से शास्त्रीपुरम सहित कीठम के दस किलोमीटर की परिधि में बनी इमारतों और कालोनियां अवैध हैं। आनंद कालेज का मामला उठने की आशंका में यह रिपोर्ट बोर्ड बैठक से पहले 15 दिसंबर को एडीए को सौंपी गई। हालांकि बैठक में न मसला उठा न रिपोर्ट पर चर्चा हुई।
बता दें, आगरा-मथुरा हाईवे पर कीठम बर्ड सेंक्च्युरी के पास बने आनंद इंजीनियरिंग कालेज का भू-उपयोग अरसे से विवाद में है। इसकी आंच आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) तक पहुंची तो उसने बचाव में भू उपयोग की जांच के लिए पिछले साल पांच सदस्यीय कमेटी बनाई। कमेटी ने इस साल 15 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट एडीए को सौंपी। इसमें आनंद इंजीनियरिंग कालेज के भू-उपयोग पर रोक लगाने की संस्तुति है। इसके लिए कमेटी ने पर्यावरण मंत्रालय के नौ फरवरी 2011 को जारी निर्देशों का हवाला दिया है। इस निर्देश में ईको सेंसिटिव जोन में समस्त व्यावसायिक गतिविधियां प्रतिबंधित करने को कहा गया है।
आनंद कालेज मामले पर भले कोई चर्चा न हुई लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट से एडीए के लिए दूसरी मुश्किलें गई हैं। क्योंकि पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश सिर्फ आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज पर लागू नहीं होते। कीठम के एक तरफ कैलाश मोड़ तो दूसरी तरफ फरह तथा शास्त्रीपुरम तक का क्षेत्र भी ईको सेंसटिव जोन में आएगा। इस परिधि में फैक्ट्री, कई कालोनी, होटल, शोरूम आदि खड़े हैं। इनके भी नक्शे एडीए ने ही पास किए हैं। जबकि इस क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां नियमत: प्रतिबंधित होनी चाहिए।
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एडीए की मुश्किल बढ़ी
दरअसल, इस आदेश के बाद भी एडीए ईको सेंसटिव जोन में लगातार नक्शे पास करता रहा। शास्त्रीपुरम में तो कई बिल्डरों के प्रोजेक्ट हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ले जाने की तैयारी कर रहा है।
ईको सेंसटिव जोन की परिधि 10 किमी
21 जनवरी 2002 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से ईको सेंसटिव जोन निर्धारित कर शपथ पत्र मांगा था। सिर्फ गोवा ने शपथ पत्र दाखिल किया। अंत में इसके लिए 15 फरवरी 2013 अंतिम तिथि घोषित की गई। और यह भी कहा कि इस तिथि तक कोई राज्य शपथ पत्र नहीं देता तो उसके नेशनल पार्क और बर्ड सेंक्च्युरी की दस किलोमीटर की परिधि ईको सेंसटिव जोन माना जाएगी। चूंकि उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक यह शपथ पत्र नहीं दिया है इसलिए यहां यही आदेश लागू है।
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बता दें, आगरा-मथुरा हाईवे पर कीठम बर्ड सेंक्च्युरी के पास बने आनंद इंजीनियरिंग कालेज का भू-उपयोग अरसे से विवाद में है। इसकी आंच आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) तक पहुंची तो उसने बचाव में भू उपयोग की जांच के लिए पिछले साल पांच सदस्यीय कमेटी बनाई। कमेटी ने इस साल 15 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट एडीए को सौंपी। इसमें आनंद इंजीनियरिंग कालेज के भू-उपयोग पर रोक लगाने की संस्तुति है। इसके लिए कमेटी ने पर्यावरण मंत्रालय के नौ फरवरी 2011 को जारी निर्देशों का हवाला दिया है। इस निर्देश में ईको सेंसिटिव जोन में समस्त व्यावसायिक गतिविधियां प्रतिबंधित करने को कहा गया है।
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आनंद कालेज मामले पर भले कोई चर्चा न हुई लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट से एडीए के लिए दूसरी मुश्किलें गई हैं। क्योंकि पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश सिर्फ आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज पर लागू नहीं होते। कीठम के एक तरफ कैलाश मोड़ तो दूसरी तरफ फरह तथा शास्त्रीपुरम तक का क्षेत्र भी ईको सेंसटिव जोन में आएगा। इस परिधि में फैक्ट्री, कई कालोनी, होटल, शोरूम आदि खड़े हैं। इनके भी नक्शे एडीए ने ही पास किए हैं। जबकि इस क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां नियमत: प्रतिबंधित होनी चाहिए।
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एडीए की मुश्किल बढ़ी
दरअसल, इस आदेश के बाद भी एडीए ईको सेंसटिव जोन में लगातार नक्शे पास करता रहा। शास्त्रीपुरम में तो कई बिल्डरों के प्रोजेक्ट हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ले जाने की तैयारी कर रहा है।
ईको सेंसटिव जोन की परिधि 10 किमी
21 जनवरी 2002 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से ईको सेंसटिव जोन निर्धारित कर शपथ पत्र मांगा था। सिर्फ गोवा ने शपथ पत्र दाखिल किया। अंत में इसके लिए 15 फरवरी 2013 अंतिम तिथि घोषित की गई। और यह भी कहा कि इस तिथि तक कोई राज्य शपथ पत्र नहीं देता तो उसके नेशनल पार्क और बर्ड सेंक्च्युरी की दस किलोमीटर की परिधि ईको सेंसटिव जोन माना जाएगी। चूंकि उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक यह शपथ पत्र नहीं दिया है इसलिए यहां यही आदेश लागू है।