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विजिलेंस जांच में टूटी प्रशासन की नींद, अभिलेख मांगे
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मैनपुरी। एक साल पहले तत्कालीन डीपीआरओ के खिलाफ शुरू हुई कूड़ेदान फर्जीवाड़े की विजिलेंस जांच में अब प्रशासन की नींद टूटी है। लगातार पुलिस अधीक्षक के पत्राचार के बाद अब ग्राम पंचायतों से कूड़ेदान के अभिलेख मांगे गए हैं। इसके लिए जिला पंचायत राज अधिकारी ने सभी सहायक विकास अधिकारियों के लिए पत्र जारी किया है।
जिले की सभी ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान लगवाने का मामला सुर्खियों में रहा है। आरोप है कि इसमें करोड़ों का गोलमाल किया गया। चार हजार रुपये के कूड़ेदान का 12 हजार रुपये भुगतान किया गया। इसी मामले को लेकर तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह के खिलाफ जांच विजिलेंस आगरा की ओर से की जा रही है।
जांच के लिए लगातार जांच अधिकारी ने कूड़ेदान के अभिलेख मांगने के लिए पत्र भेजा लेकिन कोई पहल नहीं हुई। अब एक साल बाद डीपीआरओ ने ग्राम पंचायतों से कूड़ेदान के अभिलेख मांगे हैं। डीपीआरओ के जारी पत्र में कूड़ेदान लगाने वाले ठेकेदारों का नाम व पूरा पता, भुगतान के बिल वाउचर की प्रमाणित छायाप्रति, कैशबुक की मूल प्रति, दो प्रतियों में मांगी गई है। इसकी जिम्मेदारी सहायक विकास अधिकारी पंचायत को सौंपी गई है।
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रसूखदार हैं कूड़ेदान लगाने वाली फर्म
विजिलेंस आगरा के जांच अधिकारी कूड़ेदान लगाने वाली फर्मों की जानकारी मांग रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पंचायत राज विभाग भी इन फर्मों के आगे बेबस है। क्योंकि अधिकांश फर्म राजनीतिक लोगों से संबंध रखने वाले लोगों की हैं।
हाईलाइटर्स
-09 हैं कुल ब्लॉक
-80 हैं न्याय पंचायतें
-552 हैं ग्राम पंचायतें
-5000 के लगभग लगे हैं कूड़ेदान
कूड़ेदान फर्जीवाड़े का मामला पूर्व डीपीआरओ के कार्यकाल का है। विजिलेंस आगरा ने जो भी अभिलेख मांगे हैं उन्हें एकत्रित करने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। कूड़ेदान के अभिलेख और कैशबुक जो नहीं देगा उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी सहायक विकास अधिकारी पंचायत को पत्र जारी किया गया है।
स्वामीदीन, डीपीआरओ।
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जिले की सभी ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान लगवाने का मामला सुर्खियों में रहा है। आरोप है कि इसमें करोड़ों का गोलमाल किया गया। चार हजार रुपये के कूड़ेदान का 12 हजार रुपये भुगतान किया गया। इसी मामले को लेकर तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह के खिलाफ जांच विजिलेंस आगरा की ओर से की जा रही है।
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जांच के लिए लगातार जांच अधिकारी ने कूड़ेदान के अभिलेख मांगने के लिए पत्र भेजा लेकिन कोई पहल नहीं हुई। अब एक साल बाद डीपीआरओ ने ग्राम पंचायतों से कूड़ेदान के अभिलेख मांगे हैं। डीपीआरओ के जारी पत्र में कूड़ेदान लगाने वाले ठेकेदारों का नाम व पूरा पता, भुगतान के बिल वाउचर की प्रमाणित छायाप्रति, कैशबुक की मूल प्रति, दो प्रतियों में मांगी गई है। इसकी जिम्मेदारी सहायक विकास अधिकारी पंचायत को सौंपी गई है।
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रसूखदार हैं कूड़ेदान लगाने वाली फर्म
विजिलेंस आगरा के जांच अधिकारी कूड़ेदान लगाने वाली फर्मों की जानकारी मांग रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पंचायत राज विभाग भी इन फर्मों के आगे बेबस है। क्योंकि अधिकांश फर्म राजनीतिक लोगों से संबंध रखने वाले लोगों की हैं।
हाईलाइटर्स
-09 हैं कुल ब्लॉक
-80 हैं न्याय पंचायतें
-552 हैं ग्राम पंचायतें
-5000 के लगभग लगे हैं कूड़ेदान
कूड़ेदान फर्जीवाड़े का मामला पूर्व डीपीआरओ के कार्यकाल का है। विजिलेंस आगरा ने जो भी अभिलेख मांगे हैं उन्हें एकत्रित करने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। कूड़ेदान के अभिलेख और कैशबुक जो नहीं देगा उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी सहायक विकास अधिकारी पंचायत को पत्र जारी किया गया है।
स्वामीदीन, डीपीआरओ।