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आचार्य जी, मुझे मैथ से डर लगता है
आगरा , अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2014 02:06 AM IST
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डा. एमपीएस वर्ल्ड स्कूल में गुरुवार को आचार्य महाश्रमण महाराज ने अपनी अहिंसा यात्रा के तहत बच्चों के साथ संवाद किया। छात्रों ने आचार्य से कई सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासा शांत की। कक्षा तीन के छात्र ने विश्व गणित दिवस पर सवाल किया। पूछा कि उसे गणित से डर लगता है, क्या करना चाहिए। आचार्य ने उसे पास बुलाकर कहा कि जिंदगी में मुश्किलों का सामना करने वाला ही जिंदगी में सफल होता है। अगर गणित मुश्किल लगती है तो सबसे ज्यादा समय और ध्यान गणित पर ही दें।
एक अन्य छात्रा ने पूछा कि युवावस्था में ज्यादातर लोग अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं, इससे कैसे बचा जाऐ। आचार्य ने कहा कि 14 से 20 साल की उम्र में बुरी संगति में ना पड़ें, टीवी द्वारा परोसे जाने वाली बुरी अथवा अनावश्यक सामग्री से बचें। हमारा दिमाग वही करता है जो हमारी आंखें देखती हैं, इसीलिए हमें अच्छा बोलना चाहिए, अच्छा सुनना चाहिए और अच्छा देखना चाहिए। कक्षा आठ की एक छात्रा ने पूछा कि व्यस्त जिंदगी में आध्यात्म कैसे किया जाए। आचार्य ने बताया कि प्रत्येक घंटे एक मिनट भी आध्यात्म के लिए निकाला जाए तो 24 मिनट होते हैं जो कि काफी हैं। योग, आध्यात्म से मन एवं आत्मा को शांति मिलती है। स्कूल स्टाफ ने भी अपनी जिज्ञासा का समाधान किया।
मालूम हो कि अहिंसा यात्रा नौ नवंबर को दिल्ली के लालकिला से आरंभ होकर 18 जनवरी को कानपुर में पूर्ण होगी। यात्रा में 250 लोग पैदल चलकर सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति का संदेश दे रहे हैं।
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संतों का अभिनंदन किया
ग्रुप के चेयरपर्सन स्क्वाड्रन लीडर एके सिंह ने आचार्य महाश्रमण एवं अन्य संतों का अभिनंदन किया। आचार्य के साथ साध्वी प्रमुख कनक प्रभा, साध्वी नियोजिका विश्रत विभा, सामणी कुसुम प्रज्ञा, कमलमुनी भी थीं। इससे पहले स्कूली छात्राओं ने गुरु वंदना की। कालेज के निदेशक डा. राजीव रतन, डा. एमपीएस ग्रुप के कारपोरेट हेड पीयूष अग्रवाल, जितेंद्र सिंह चौहान, प्रधानाचार्या नीरू टंडन, डीन डा. एके गोयल, प्राचार्य डा. उदित जैन, डा. एके जैन, विजय सिंह सुराना, निर्मल पारिख, सुमेरमल आदि मौजूद रहे।
इतनी सुविधा तो किसी पीएचसी, सीएचसी में नहीं
आगरा। अहिंसा यात्रा के साथ 45 फीट लंबी बस में एक आधुनिक चिकित्सालय साथ चल रहा है। आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चल चिकित्सालय में इतनी सुविधाएं हैं जो किसी पीएचसी, सीएचसी में नहीं मिलेंगी। दो फिजीशियन, डेंटिस्ट, नेत्र परीक्षक, कपाउंडर, पैथोलॉजिस्ट सब कुछ है। हर किसी का निशुल्क इलाज होता है और दवाएं भी निशुल्क दी जाती हैं। जहां भी कैंप लगता है, वहीं शुरू हो जाता है अस्पताल। अभी तक हजारों का इलाज किया जा चुका है और सैकड़ों को चश्मे भी दिए जा चुके हैं। ईसीजी, ब्लड प्रेशर, शुगर, लिपिड प्रोफाइल, एक्सरे, पीएफटी आदि जांचे यहां होती हैं। निमोलाइजर के अलावा आक्सीजन की भी व्यवस्था है। ज्यादा गंभीर स्थिति में बडे़ अस्पताल तक रेफर करने के लिए साथ में एक छोटी एंबुलेंस भी रहती है, जिसमें वेंटिलेटर लगा है।
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एक अन्य छात्रा ने पूछा कि युवावस्था में ज्यादातर लोग अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं, इससे कैसे बचा जाऐ। आचार्य ने कहा कि 14 से 20 साल की उम्र में बुरी संगति में ना पड़ें, टीवी द्वारा परोसे जाने वाली बुरी अथवा अनावश्यक सामग्री से बचें। हमारा दिमाग वही करता है जो हमारी आंखें देखती हैं, इसीलिए हमें अच्छा बोलना चाहिए, अच्छा सुनना चाहिए और अच्छा देखना चाहिए। कक्षा आठ की एक छात्रा ने पूछा कि व्यस्त जिंदगी में आध्यात्म कैसे किया जाए। आचार्य ने बताया कि प्रत्येक घंटे एक मिनट भी आध्यात्म के लिए निकाला जाए तो 24 मिनट होते हैं जो कि काफी हैं। योग, आध्यात्म से मन एवं आत्मा को शांति मिलती है। स्कूल स्टाफ ने भी अपनी जिज्ञासा का समाधान किया।
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मालूम हो कि अहिंसा यात्रा नौ नवंबर को दिल्ली के लालकिला से आरंभ होकर 18 जनवरी को कानपुर में पूर्ण होगी। यात्रा में 250 लोग पैदल चलकर सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति का संदेश दे रहे हैं।
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संतों का अभिनंदन किया
ग्रुप के चेयरपर्सन स्क्वाड्रन लीडर एके सिंह ने आचार्य महाश्रमण एवं अन्य संतों का अभिनंदन किया। आचार्य के साथ साध्वी प्रमुख कनक प्रभा, साध्वी नियोजिका विश्रत विभा, सामणी कुसुम प्रज्ञा, कमलमुनी भी थीं। इससे पहले स्कूली छात्राओं ने गुरु वंदना की। कालेज के निदेशक डा. राजीव रतन, डा. एमपीएस ग्रुप के कारपोरेट हेड पीयूष अग्रवाल, जितेंद्र सिंह चौहान, प्रधानाचार्या नीरू टंडन, डीन डा. एके गोयल, प्राचार्य डा. उदित जैन, डा. एके जैन, विजय सिंह सुराना, निर्मल पारिख, सुमेरमल आदि मौजूद रहे।
इतनी सुविधा तो किसी पीएचसी, सीएचसी में नहीं
आगरा। अहिंसा यात्रा के साथ 45 फीट लंबी बस में एक आधुनिक चिकित्सालय साथ चल रहा है। आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चल चिकित्सालय में इतनी सुविधाएं हैं जो किसी पीएचसी, सीएचसी में नहीं मिलेंगी। दो फिजीशियन, डेंटिस्ट, नेत्र परीक्षक, कपाउंडर, पैथोलॉजिस्ट सब कुछ है। हर किसी का निशुल्क इलाज होता है और दवाएं भी निशुल्क दी जाती हैं। जहां भी कैंप लगता है, वहीं शुरू हो जाता है अस्पताल। अभी तक हजारों का इलाज किया जा चुका है और सैकड़ों को चश्मे भी दिए जा चुके हैं। ईसीजी, ब्लड प्रेशर, शुगर, लिपिड प्रोफाइल, एक्सरे, पीएफटी आदि जांचे यहां होती हैं। निमोलाइजर के अलावा आक्सीजन की भी व्यवस्था है। ज्यादा गंभीर स्थिति में बडे़ अस्पताल तक रेफर करने के लिए साथ में एक छोटी एंबुलेंस भी रहती है, जिसमें वेंटिलेटर लगा है।