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पुनर्गठन: बदल जाएगी गांव-देहात की राजनीति
Agra
Updated Sun, 24 Aug 2014 05:30 AM IST
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आगरा। गांव की पगडंडियों से लेकर चौपालों, खेत-खलिहानों तक बात होगी राजनीति की। देश या प्रदेश की नहीं, बल्कि अपने गांव की। दरअसल, अगले साल होने वाले चुनाव से पहले ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की कवायद शुरू हो रही है। सोमवार से ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन पर जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में आपत्तियां और प्रस्ताव दिए जाएंगे। प्रधानी के चुनाव से पहले पुनर्गठन की यह कवायद न केवल गांव-देहात की राजनीति को गरमाएगी, बल्कि कई ग्राम पंचायतों के अस्तित्व के बनने-बिगड़ने की शुरूआत भी हो जाएगी।
साल 2011 की जनगणना के आधार पर गांव की जनसंख्या 1,000 से ज्यादा होने पर ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया 25 अगस्त से 31 अक्तूबर के बीच चलेगी। सोमवार से लेकर 15 सितंबर तक इस पर आपत्तियां और सुझाव दिए जा सकेंगे। साल 2000 में इससे पहले परिसीमन किया गया था। इन 14 सालों में आबादी में बदलाव आया है। प्रमुख सचिव चंचल तिवारी ने ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन के बाद क्षेत्र और जिला पंचायतों के परिसीमन को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन का शेड्यूल
पुनर्गठन के प्रस्ताव, प्रार्थना पत्र 25 अगस्त से 15 सितंबर तक
समिति द्वारा निस्तारण, संस्तुति 30 सितंबर 2014 तक
निदेशालय द्वारा परीक्षण, अधिसूचना 1 से 15 अक्तूबर
अधिसूचना का प्रकाशन 31 अक्तूबर तक
पुनर्गठन के लिए ये है जरूरी
- ग्राम पंचायत के 50 से ज्यादा लोग परिवर्तन का प्रस्ताव दें।
- ग्राम पंचायत क्षेत्र का गठन 2011 के प्रकाशित आंकड़ों पर।
- किसी राजस्व ग्राम, मजरे का क्षेत्र निर्धारण के लिए विभाजन नहीं।
- दो राजस्व ग्रामों के बीच किसी दूसरी पंचायत का क्षेत्र न पड़ता हो।
- नदी, नाला, पहाड़ या प्राकृतिक अवरोध उनके बीच आवागमन में बाधा न हो।
- ज्यादा गांव वाली पंचायत का नाम सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले गांव के नाम पर।
- भौगोलिक दृष्टि से एक दूसरे के पास के गांव ग्राम पंचायत में शामिल होंगे।
- पुनर्गठन के प्रस्ताव 15 सितंबर तक जिला पंचायत राज अधिकारी को दें।
चार अफसरों की कमेटी करेगी पुनर्गठन
ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन के लिए बनाई समिति में अध्यक्ष जिलाधिकारी, सदस्य सचिव जिला पंचायत राज अधिकारी और दो सदस्य मुख्य विकास अधिकारी एवं अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत होंगे। 30 सितंबर तक पुनर्गठन की आपत्तियों का निस्तारण कमेटी करेगी।
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साल 2011 की जनगणना के आधार पर गांव की जनसंख्या 1,000 से ज्यादा होने पर ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया 25 अगस्त से 31 अक्तूबर के बीच चलेगी। सोमवार से लेकर 15 सितंबर तक इस पर आपत्तियां और सुझाव दिए जा सकेंगे। साल 2000 में इससे पहले परिसीमन किया गया था। इन 14 सालों में आबादी में बदलाव आया है। प्रमुख सचिव चंचल तिवारी ने ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन के बाद क्षेत्र और जिला पंचायतों के परिसीमन को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
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ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन का शेड्यूल
पुनर्गठन के प्रस्ताव, प्रार्थना पत्र 25 अगस्त से 15 सितंबर तक
समिति द्वारा निस्तारण, संस्तुति 30 सितंबर 2014 तक
निदेशालय द्वारा परीक्षण, अधिसूचना 1 से 15 अक्तूबर
अधिसूचना का प्रकाशन 31 अक्तूबर तक
पुनर्गठन के लिए ये है जरूरी
- ग्राम पंचायत के 50 से ज्यादा लोग परिवर्तन का प्रस्ताव दें।
- ग्राम पंचायत क्षेत्र का गठन 2011 के प्रकाशित आंकड़ों पर।
- किसी राजस्व ग्राम, मजरे का क्षेत्र निर्धारण के लिए विभाजन नहीं।
- दो राजस्व ग्रामों के बीच किसी दूसरी पंचायत का क्षेत्र न पड़ता हो।
- नदी, नाला, पहाड़ या प्राकृतिक अवरोध उनके बीच आवागमन में बाधा न हो।
- ज्यादा गांव वाली पंचायत का नाम सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले गांव के नाम पर।
- भौगोलिक दृष्टि से एक दूसरे के पास के गांव ग्राम पंचायत में शामिल होंगे।
- पुनर्गठन के प्रस्ताव 15 सितंबर तक जिला पंचायत राज अधिकारी को दें।
चार अफसरों की कमेटी करेगी पुनर्गठन
ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन के लिए बनाई समिति में अध्यक्ष जिलाधिकारी, सदस्य सचिव जिला पंचायत राज अधिकारी और दो सदस्य मुख्य विकास अधिकारी एवं अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत होंगे। 30 सितंबर तक पुनर्गठन की आपत्तियों का निस्तारण कमेटी करेगी।
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