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साइबर क्राइम से बचाएगा ‘नेटीकेट्स’
Agra
Updated Fri, 20 Sep 2013 05:35 AM IST
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आगरा। आज के समय में एटीकेट्स के साथ ही नेटीकेट्स भी जरूरी है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स के दुरुपयोग और बढ़ते साइबर क्राइम से नेटीकेट्स ही बचा सकता है। गुरुवार को सूरसदन में आयोजित कार्यशाला में आईटी एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने बच्चों को यही बताया। उन्होंने आगाह किया कि रीयल और वर्चुअल लाइफ में अंतर होता है। नेटीकेट्स की जानकारी नहीं होने पर बच्चे साबर क्राइम के शिकार हो सकते हैं। कार्यशाला में तकरीबन 15 स्कूलों के आठ सौ से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला का शुभारंभ डीआईजी विजय कुमार मीना ने किया। उन्होंने बताया कि साइबर क्राइम में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। आगरा पुलिस ने साइबर सेल के बाद अब पुलिस लाइन में भी साइबर थाने की स्थापना का कार्य शुरू कर दिया है। जानकारी नहीं होने से बच्चे आसानी से साइबर क्राइम के शिकार हो जाते हैं। एसएसपी शलभ माथुर ने कहा कि इसी समस्या को देखते हुए स्कूलों के आईटी शिक्षकों को भी कार्यशाला में आमंत्रित किया गया है, ताकि वह भी नेटीकेट्स की जानकारी हासिल करें।
आईटी एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने बताया कि सन 2008 में जहां साइबर क्राइम के महज ढाई हजार मामले दर्ज किए गए, वहीं सन 2012 में इनकी संख्या 22060 हो गई। ऐसा नेटीकेट्स की जानकारी नहीं होने के चलते हुआ। फेस बुक पर कंफेशन पेज का जिक्र करते हुए बताया कि इस पर आपत्तिजनक कमेंट लिखे जा रहे हैं। ऐसे कमेंट साइबर एक्ट की धारा 66 ए के तहत अपराध हैं।
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उन्होंने बच्चों को आगाह किया कि सोशल नेटवर्किंग साइट पर अपनी निजी जानकारियां शेयर नहीं करें। फ्रेंड्स लिस्ट को बेवजह बढ़ाना भी ठीक नही है। कार्यशाला में वीडियो के जरिये साइबर क्राइम के बारे में जानकारी दी गई। इस मौके पर आगरा कॉलेज के प्रिंसीपल डा. मनोज रावत, एसपी सिटी पवन कुमार, एसपी ट्रैफिक डा. बीएन तिवारी, सीओ सदर रामसुरेश यादव, एसपीआरए केपी यादव, बबीता साहू आदि मौजूद थे। संचालन एएसपी प्रभाकर चौधरी ने किया।
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कार्यशाला का शुभारंभ डीआईजी विजय कुमार मीना ने किया। उन्होंने बताया कि साइबर क्राइम में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। आगरा पुलिस ने साइबर सेल के बाद अब पुलिस लाइन में भी साइबर थाने की स्थापना का कार्य शुरू कर दिया है। जानकारी नहीं होने से बच्चे आसानी से साइबर क्राइम के शिकार हो जाते हैं। एसएसपी शलभ माथुर ने कहा कि इसी समस्या को देखते हुए स्कूलों के आईटी शिक्षकों को भी कार्यशाला में आमंत्रित किया गया है, ताकि वह भी नेटीकेट्स की जानकारी हासिल करें।
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आईटी एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने बताया कि सन 2008 में जहां साइबर क्राइम के महज ढाई हजार मामले दर्ज किए गए, वहीं सन 2012 में इनकी संख्या 22060 हो गई। ऐसा नेटीकेट्स की जानकारी नहीं होने के चलते हुआ। फेस बुक पर कंफेशन पेज का जिक्र करते हुए बताया कि इस पर आपत्तिजनक कमेंट लिखे जा रहे हैं। ऐसे कमेंट साइबर एक्ट की धारा 66 ए के तहत अपराध हैं।
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उन्होंने बच्चों को आगाह किया कि सोशल नेटवर्किंग साइट पर अपनी निजी जानकारियां शेयर नहीं करें। फ्रेंड्स लिस्ट को बेवजह बढ़ाना भी ठीक नही है। कार्यशाला में वीडियो के जरिये साइबर क्राइम के बारे में जानकारी दी गई। इस मौके पर आगरा कॉलेज के प्रिंसीपल डा. मनोज रावत, एसपी सिटी पवन कुमार, एसपी ट्रैफिक डा. बीएन तिवारी, सीओ सदर रामसुरेश यादव, एसपीआरए केपी यादव, बबीता साहू आदि मौजूद थे। संचालन एएसपी प्रभाकर चौधरी ने किया।