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अकबर टॉम्ब में काले हिरन की मौत, हड़कंप
Agra
Updated Tue, 07 May 2013 05:30 AM IST
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आगरा। अकबर टॉम्ब के हिरन और ब्लैक बक भी झुलसाने वाली गर्मी से बेहाल हैं। सोमवार को काले हिरन (ब्लैक बक) की मौत से हड़कंप मच गया। इस बीच कई हिरनों के मरने की खबर फैलने पर वन विभाग के डीएफओ ने अकबर टॉम्ब पहुंचकर जायजा लिया। पोस्टमार्टम के बाद काले हिरन के शव को जला दिया गया।
भीषण गर्मी से अकबर टॉम्ब में कई हिरनों की तबियत खराब चल रही है। सोमवार की दोपहर एक काले हिरन ने दम तोड़ दिया। इसकी जानकारी होने पर एएसआई की उद्यान शाखा के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। वन विभाग को सूचना देने के बाद काले हिरन का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद उसका शव जला दिया गया। इस बीच खबर फैली कि अकबर टॉम्ब में एक नहीं कई हिरनों की मौत हुई है। उद्यान कर्मियों ने हिरन के शव को आनन फानन में जला दिया है। इस सूचना पर सामाजिक वानिकी विभाग के डीएफओ एनके जानू, क्षेत्रीय वन अधिकारी जगदीश पाठक, भालू संरक्षण केंद्र के डा. बैजूराज, डा. इलियाराजा के साथ अकबर टॉम्ब पहुंचे। डीएफओ ने स्मारक में हिरनों के आबादी क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि हिरनों को गर्मी से परेशानी आ रही है। परिसर के अंदर पानी की व्यवस्था का मुआयना किया गया। एक अतिरिक्त जलाशय बनाने का सुझाव भी एएसआई के असिस्टेंट सुपरिन्टेेंडेंट वीके गौड़ को दिया। साथ ही परिसर में पार्थेनियम घास को हटाने के लिए कहा गया। डीएफओ ने बताया कि प्रथम दृष्टया हिरन की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई प्रतीत होती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
बूढ़ा था हिरन
उद्यान अधिकारी डा. संजय सिंह ने बताया कि वह लखनऊ में हैं, लेकिन उन्हें हिरन की मौत की जानकारी मिली है। हिरन शेड्यूल वन का जीव है। मरने वाले काले हिरन की उम्र 12 साल थी। सन 2008 में हिरनों में फैली महामारी के बाद वन विभाग ने जलाने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद से उन्हें जलाया जाता है।
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चिकित्सा की व्यवस्था नहीं
अकबर टॉम्ब में हिरन और ब्लैक बकों की संख्या 180 से अधिक है। इनकी देखभाल का जिम्मा एएसआई की उद्यान शाखा के हाथ में है। स्मारक में हिरनों की तबियत खराब होने पर उनका इलाज वन विभाग का पशु चिकित्सक करता है। इसके लिए हिरनों को कीठम ले जाया जाता है। कई दफा कीठम तक ले जाने के दौरान हिरन दम तोड़ देते हैं। एएसआई कर्मियों का कहना है कि स्मारक में ही हिरनों के लिए कम से कम सप्ताह में एक बार पशु चिकित्सक आना चाहिए। हिरनों का छुटपुट इलाज उद्यान कर्मी ही कर देते हैं।
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भीषण गर्मी से अकबर टॉम्ब में कई हिरनों की तबियत खराब चल रही है। सोमवार की दोपहर एक काले हिरन ने दम तोड़ दिया। इसकी जानकारी होने पर एएसआई की उद्यान शाखा के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। वन विभाग को सूचना देने के बाद काले हिरन का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद उसका शव जला दिया गया। इस बीच खबर फैली कि अकबर टॉम्ब में एक नहीं कई हिरनों की मौत हुई है। उद्यान कर्मियों ने हिरन के शव को आनन फानन में जला दिया है। इस सूचना पर सामाजिक वानिकी विभाग के डीएफओ एनके जानू, क्षेत्रीय वन अधिकारी जगदीश पाठक, भालू संरक्षण केंद्र के डा. बैजूराज, डा. इलियाराजा के साथ अकबर टॉम्ब पहुंचे। डीएफओ ने स्मारक में हिरनों के आबादी क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि हिरनों को गर्मी से परेशानी आ रही है। परिसर के अंदर पानी की व्यवस्था का मुआयना किया गया। एक अतिरिक्त जलाशय बनाने का सुझाव भी एएसआई के असिस्टेंट सुपरिन्टेेंडेंट वीके गौड़ को दिया। साथ ही परिसर में पार्थेनियम घास को हटाने के लिए कहा गया। डीएफओ ने बताया कि प्रथम दृष्टया हिरन की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई प्रतीत होती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
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बूढ़ा था हिरन
उद्यान अधिकारी डा. संजय सिंह ने बताया कि वह लखनऊ में हैं, लेकिन उन्हें हिरन की मौत की जानकारी मिली है। हिरन शेड्यूल वन का जीव है। मरने वाले काले हिरन की उम्र 12 साल थी। सन 2008 में हिरनों में फैली महामारी के बाद वन विभाग ने जलाने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद से उन्हें जलाया जाता है।
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चिकित्सा की व्यवस्था नहीं
अकबर टॉम्ब में हिरन और ब्लैक बकों की संख्या 180 से अधिक है। इनकी देखभाल का जिम्मा एएसआई की उद्यान शाखा के हाथ में है। स्मारक में हिरनों की तबियत खराब होने पर उनका इलाज वन विभाग का पशु चिकित्सक करता है। इसके लिए हिरनों को कीठम ले जाया जाता है। कई दफा कीठम तक ले जाने के दौरान हिरन दम तोड़ देते हैं। एएसआई कर्मियों का कहना है कि स्मारक में ही हिरनों के लिए कम से कम सप्ताह में एक बार पशु चिकित्सक आना चाहिए। हिरनों का छुटपुट इलाज उद्यान कर्मी ही कर देते हैं।