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अनशन से फर्क नहीं पड़ता, बस तेज धमाके सुनते हैं...
Agra
Updated Sat, 06 Apr 2013 05:30 AM IST
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आगरा। राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में शुक्रवार शाम को ओज, हास्य और शृंगार रस की त्रिवेणी बही। कवियों ने देश की वर्तमान दशा पर निशाना साधा तो वहीं शृंगार रस की रचनाओं ने भी श्रोताओं की तालियां बटोरीं। हास्य की फुहार ने देर रात तक श्रोताओं को गुदगुदाया।
सूरसदन में आयोजित आराधना के कवि सम्मेलन में ओज के जानेमाने कवि हरिओम पवार ने इस गीत से जोश भरा ‘काले धन पर पूरी संसद मौन साध कर बैठी है, शुक्र मनाओ जनता अब तक हाथ बांधकर बैठी है, कलमकार तो काले धन के काले परदे खींचेगा, आहें-आंसू देखेगा तो चिल्लाएगा, चीखेगा, झोंपड़ियों को सौ-सौ आंसू रोज रुलाना बंद करो, सेंसेक्स पर नजरें रखकर देश चलाना बंद करो।’ इसके बाद उन्होंने भूख पर कविता सुनाई। दिल्ली से आए हास्य कवि अरुण जैमिनी ने भ्रष्ट व्यवस्था पर व्यंग्य कसा, बेरोजगार युुवक से चयनकर्ता ने पूछा, ताजमहल कहां है? छात्र ने जवाब दिया, रोहतक में। बोले-इतना भी नहीं पता तो नौकरी क्या खाक करोगे। इस पर छात्र बोला, मैं आगरा में बताऊं तो क्या रख लोगे। संचालन कर रहे वीर रस के सुप्रसिद्ध कवि विनीत चौहान ने कुछ यूं बयां किया ‘अनशन से फर्क नहीं पड़ता, अंधी बहरी सरकारों को, बस तेज धमाके सुनाई देते हैं, इन दिल्ली के दरबारों को’। अलीगढ़ से आए डॉ. विष्णु सक्सेना ने पेश किया ‘तस्वीर ले गए मेरी आंखों में डालकर, बदले में दे गए मुझे आंसू उबालकर।’ जयपुर से आए हास्य कवि संजय झाला ने इलेक्ट्रोनिक मीडिया की अति सक्रियता पर व्यंग्य कसा। उनकी सिचुएशन पोइट्री पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। कवियत्री पूनम शर्मा ने सुनाया ‘नजर जो मिलती तो जान लेते, तुम्हारे दिल में हुजूर क्या है।’ आयकर आयुक्त जीएन पांडे की ‘गरीब लोगों के कच्चे मकान रहने दो, कहीं तो मुल्क में हिंदुस्तान रहने दो’, जैसी रचनाओं ने वाहवाही लूटी। इससे पूर्व सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि मुख्य आयकर आयुक्त कवि जीएन पांडे ने दीप जलाकर किया। सीडीओ कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव व पीएफ कमिश्नर मनोज यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान संस्था आराधना के दस वर्ष के सफर को रेखांकित करते वृत्तचित्र का प्रसारण किया गया। अध्यक्षता सांसद एसपी सिंह बघेल ने की। कार्यक्रम प्रभारी डा. हृदेश चौधरी ने संस्था का परिचय दिया। संयोजक पवन आगरी, केशव अग्रवाल, डॉ. आरएम पचौरी, विनोद बंसल, संदीप गोयल, कुमार ललित आदि ने व्यवस्थाएं संभालीं।
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सूरसदन में आयोजित आराधना के कवि सम्मेलन में ओज के जानेमाने कवि हरिओम पवार ने इस गीत से जोश भरा ‘काले धन पर पूरी संसद मौन साध कर बैठी है, शुक्र मनाओ जनता अब तक हाथ बांधकर बैठी है, कलमकार तो काले धन के काले परदे खींचेगा, आहें-आंसू देखेगा तो चिल्लाएगा, चीखेगा, झोंपड़ियों को सौ-सौ आंसू रोज रुलाना बंद करो, सेंसेक्स पर नजरें रखकर देश चलाना बंद करो।’ इसके बाद उन्होंने भूख पर कविता सुनाई। दिल्ली से आए हास्य कवि अरुण जैमिनी ने भ्रष्ट व्यवस्था पर व्यंग्य कसा, बेरोजगार युुवक से चयनकर्ता ने पूछा, ताजमहल कहां है? छात्र ने जवाब दिया, रोहतक में। बोले-इतना भी नहीं पता तो नौकरी क्या खाक करोगे। इस पर छात्र बोला, मैं आगरा में बताऊं तो क्या रख लोगे। संचालन कर रहे वीर रस के सुप्रसिद्ध कवि विनीत चौहान ने कुछ यूं बयां किया ‘अनशन से फर्क नहीं पड़ता, अंधी बहरी सरकारों को, बस तेज धमाके सुनाई देते हैं, इन दिल्ली के दरबारों को’। अलीगढ़ से आए डॉ. विष्णु सक्सेना ने पेश किया ‘तस्वीर ले गए मेरी आंखों में डालकर, बदले में दे गए मुझे आंसू उबालकर।’ जयपुर से आए हास्य कवि संजय झाला ने इलेक्ट्रोनिक मीडिया की अति सक्रियता पर व्यंग्य कसा। उनकी सिचुएशन पोइट्री पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। कवियत्री पूनम शर्मा ने सुनाया ‘नजर जो मिलती तो जान लेते, तुम्हारे दिल में हुजूर क्या है।’ आयकर आयुक्त जीएन पांडे की ‘गरीब लोगों के कच्चे मकान रहने दो, कहीं तो मुल्क में हिंदुस्तान रहने दो’, जैसी रचनाओं ने वाहवाही लूटी। इससे पूर्व सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि मुख्य आयकर आयुक्त कवि जीएन पांडे ने दीप जलाकर किया। सीडीओ कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव व पीएफ कमिश्नर मनोज यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान संस्था आराधना के दस वर्ष के सफर को रेखांकित करते वृत्तचित्र का प्रसारण किया गया। अध्यक्षता सांसद एसपी सिंह बघेल ने की। कार्यक्रम प्रभारी डा. हृदेश चौधरी ने संस्था का परिचय दिया। संयोजक पवन आगरी, केशव अग्रवाल, डॉ. आरएम पचौरी, विनोद बंसल, संदीप गोयल, कुमार ललित आदि ने व्यवस्थाएं संभालीं।
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