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दरी बुनकरों ने शुरू की हड़ताल
Agra
Updated Sat, 09 Feb 2013 05:30 AM IST
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फतेहपुर सीकरी। मजदूरी बढ़ाए जाने की मांग को लेकर पंजा-दरी बुनकरों ने हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मजदूरी नहीं बढ़ा दी जाती, वह काम शुरू नहीं करेंगे। उधर, दरी निर्माता मजदूरों की इस मांग पर असहमत हैं।
विश्व प्रसिद्ध दरी-गलीचा बनाने वाले मजदूर अपनी मजदूरी बढ़ाए जाने को लेकर काफी समय से प्रयासरत थे लेकिन उनकी मांगों को नहीं माना जा रहा था। शुक्रवार को एकजुट हुए मजदूरों ने काम बंद कर हड़ताल शुय कर दी। मजदूरों का कहना है कि 14 घंटे बारीकी से काम करने के बाद उन्हें दो जून की रोटी नसीब होती है। इसके बावजूद दरी निर्माता उनकी सुनवाई नहीं कर रहे। उन्होंने दरी की बुनाई 60 से 80 रुपये प्रति मीटर करने की मांग की। इस दौरान उन्होंने सरकार पर भी अपनी उपेक्षा का आरोप लगाया। वहीं दरी निर्माता बाबर कुरैशी और वकील कुरैशी ने बताया कि कुछ माह पूर्व ही दरी बुनाई की मजदूरी बढ़ाई गई थी। अब पुन: वृद्धि संभव नहीं है। मजदूरों की मांगें नाजायज हैं।
इनसेट खबर...
सरकारी योजनाओं का मिले लाभ
- दरी बुनकर अमीन कुरैशी कहते हैं पूरे दिन सौ रुपये कमा पाता हूं, दो सयानी बेटियां भी हैं। इतनी कम मजदूरी में घर नहीं चल सकता। सरकार की किसी भी योजनाओं का लाभ दरी-पंजा बुनकरों को नहीं मिल रहा। कल्लू ने कहा कि दरी बुनकर का काम बेहद महीन होता है। 14-14 घंटे काम कर दो जून की रोटी मिलती है जो परिवार चलाने के लिए काफी नहीं है। दरी निर्माण हमारी मजदूरी बढ़ाएं। कदरी ने बताया कि दिन भर कड़ी मेहनत के बाद 100 से 140 रुपये तक कमा पाता हूं। ठेकेदार पर 50 हजार की उधारी भी है। यह भी चुकाना है। इतनी कम कमाई में यह सब नहीं चल सकता। हमें सरकार की तरफ से मदद मिलनी चाहिए। वार्ड 19 से सभासद नवाब कुरैशी ने कहा कि दरी का काम करने वाले मजदूर अस्थमा समेत कई बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। वह अपना इलाज तक नहीं करा पाते। इतनी कम मजदूरी में वह अपना भी पेट नहीं पाल सकते तो परिवार का पेट भला कैसे भर सकता है।
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विश्व प्रसिद्ध दरी-गलीचा बनाने वाले मजदूर अपनी मजदूरी बढ़ाए जाने को लेकर काफी समय से प्रयासरत थे लेकिन उनकी मांगों को नहीं माना जा रहा था। शुक्रवार को एकजुट हुए मजदूरों ने काम बंद कर हड़ताल शुय कर दी। मजदूरों का कहना है कि 14 घंटे बारीकी से काम करने के बाद उन्हें दो जून की रोटी नसीब होती है। इसके बावजूद दरी निर्माता उनकी सुनवाई नहीं कर रहे। उन्होंने दरी की बुनाई 60 से 80 रुपये प्रति मीटर करने की मांग की। इस दौरान उन्होंने सरकार पर भी अपनी उपेक्षा का आरोप लगाया। वहीं दरी निर्माता बाबर कुरैशी और वकील कुरैशी ने बताया कि कुछ माह पूर्व ही दरी बुनाई की मजदूरी बढ़ाई गई थी। अब पुन: वृद्धि संभव नहीं है। मजदूरों की मांगें नाजायज हैं।
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सरकारी योजनाओं का मिले लाभ
- दरी बुनकर अमीन कुरैशी कहते हैं पूरे दिन सौ रुपये कमा पाता हूं, दो सयानी बेटियां भी हैं। इतनी कम मजदूरी में घर नहीं चल सकता। सरकार की किसी भी योजनाओं का लाभ दरी-पंजा बुनकरों को नहीं मिल रहा। कल्लू ने कहा कि दरी बुनकर का काम बेहद महीन होता है। 14-14 घंटे काम कर दो जून की रोटी मिलती है जो परिवार चलाने के लिए काफी नहीं है। दरी निर्माण हमारी मजदूरी बढ़ाएं। कदरी ने बताया कि दिन भर कड़ी मेहनत के बाद 100 से 140 रुपये तक कमा पाता हूं। ठेकेदार पर 50 हजार की उधारी भी है। यह भी चुकाना है। इतनी कम कमाई में यह सब नहीं चल सकता। हमें सरकार की तरफ से मदद मिलनी चाहिए। वार्ड 19 से सभासद नवाब कुरैशी ने कहा कि दरी का काम करने वाले मजदूर अस्थमा समेत कई बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। वह अपना इलाज तक नहीं करा पाते। इतनी कम मजदूरी में वह अपना भी पेट नहीं पाल सकते तो परिवार का पेट भला कैसे भर सकता है।
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