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अभी भी यमुना में गिर रहा है नालों का पानी
Updated Sat, 11 Aug 2018 11:19 PM IST
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मथुरा। एनजीटी और हाईकोर्ट के आदेश भी नगर निगम अधिकारियों को यमुना के प्रति जवाबदेह नहीं बना पा रहे हैं। अधिकारी और ठेकेदारों की लापरवाही के चलते नाले ओवरफ्लो होकर सीधे यमुना में गिर रहे हैं। जानकारी रहे इस संबंध मे नगर निगम को 13 अगस्त को एनजीटी में जवाब दाखिल करना है।
बंगाली घाट पंपिंग स्टेशन पर ठेकेदार की लापरवाही के चलते सफाई कर्मचारी पंपिंग स्टेशन को चलाने में तो लापरवाही बरतते ही हैं साथ ही नाले को भी साफ नहीं करते जिससे स्वामी घाट का नाला भी ओवरफ्लो हो जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप पंपिंग स्टेशन ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सीधा यमुना में गिराता है। यही हाल मसानी नाले का है।
महानगर के गंदे पानी के लिए मसानी से लेकर सदर बाजार और जमुनापार तक करीब 12 पंपिंग स्टेशन हैं। जिनका संचालन ठेकेदार के सफाई कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। जबकि संयुक्त नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि समय-समय पर पंपिग स्टेशनों की जांच की जाती रहती है।
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वहीं, वास्तव में कितना गंदा पानी महानगर में उत्सर्जित हो रहा है जो कि नालों के जरिए यमुना तक पहुंच रहा है। इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों को एनजीटी में जवाब दाखिल करना है। निगम पहले हाईकोर्ट में 60 एमएलडी, एनजीटी में 90 एमएलडी पानी बता चुका है। जबकि प्रशासन द्वारा इस पानी को मात्र 48 एमएलडी बताया है। बताया जता है कि एनजीटी में 13 अगस्त को नगर निगम अधिकारियों को इस संबंध में जवाब दाखिल करना होगा।
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बंगाली घाट पंपिंग स्टेशन पर ठेकेदार की लापरवाही के चलते सफाई कर्मचारी पंपिंग स्टेशन को चलाने में तो लापरवाही बरतते ही हैं साथ ही नाले को भी साफ नहीं करते जिससे स्वामी घाट का नाला भी ओवरफ्लो हो जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप पंपिंग स्टेशन ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सीधा यमुना में गिराता है। यही हाल मसानी नाले का है।
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महानगर के गंदे पानी के लिए मसानी से लेकर सदर बाजार और जमुनापार तक करीब 12 पंपिंग स्टेशन हैं। जिनका संचालन ठेकेदार के सफाई कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। जबकि संयुक्त नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि समय-समय पर पंपिग स्टेशनों की जांच की जाती रहती है।
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वहीं, वास्तव में कितना गंदा पानी महानगर में उत्सर्जित हो रहा है जो कि नालों के जरिए यमुना तक पहुंच रहा है। इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों को एनजीटी में जवाब दाखिल करना है। निगम पहले हाईकोर्ट में 60 एमएलडी, एनजीटी में 90 एमएलडी पानी बता चुका है। जबकि प्रशासन द्वारा इस पानी को मात्र 48 एमएलडी बताया है। बताया जता है कि एनजीटी में 13 अगस्त को नगर निगम अधिकारियों को इस संबंध में जवाब दाखिल करना होगा।