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दुष्कर्म के दोषी को दस वर्ष का कारावास
Updated Sat, 04 Aug 2018 11:58 PM IST
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फिरोजाबाद। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी कोर्ट नंबर ने दुराचार के आरोपी को दस वर्ष का कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
मामला चार वर्ष पुराना है। शिकोहाबाद थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी युवती शाम को शौच के लिए गई थी। खेत पर पहले से घात लगाए बैठे आगरा के थाना न्यू आगरा लश्करपुर निवासी धर्मेंद्र पुत्र कैलाशी और नौशहरा शिकोहाबाद निवासी नीतू पुत्र नंदराम ने रूमाल सुंघा कर अपने साथ ले गए। टूंडला एवं दिल्ली में ले जाकर दुष्कर्म किया। कमरा खुला मिलने पर युवती ट्रेन से बहन के घर भा आई। युवती के पिता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में पेश किए। मुकदमे की सुनवाई एफटीसी प्रथम मृदुल दुबे के न्यायालय में हुई।
अभियुक्तों पर आरोप लगाए तो उन्होंने आरोपों से इनकार कर सत्र परीक्षण की मांग की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेंद्र राठौर एडवोकेट ने हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट की कई दलीलें रखते हुए दोषी को सख्त सजा दिलाने की पैरवी की। अपर जिला जज एफटीसी प्रथम मृदुल दुबे ने आरोपी धर्मेंद्र को बलात्कार का दोषी मानते हुए दस वर्ष का सश्रम कारावास एवं 20 हजार का अर्थदंड लगाया है। 366 में पांच वर्ष का कारावास एवं पांच हजार अर्थदंड ही लगाया है।
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मामला चार वर्ष पुराना है। शिकोहाबाद थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी युवती शाम को शौच के लिए गई थी। खेत पर पहले से घात लगाए बैठे आगरा के थाना न्यू आगरा लश्करपुर निवासी धर्मेंद्र पुत्र कैलाशी और नौशहरा शिकोहाबाद निवासी नीतू पुत्र नंदराम ने रूमाल सुंघा कर अपने साथ ले गए। टूंडला एवं दिल्ली में ले जाकर दुष्कर्म किया। कमरा खुला मिलने पर युवती ट्रेन से बहन के घर भा आई। युवती के पिता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में पेश किए। मुकदमे की सुनवाई एफटीसी प्रथम मृदुल दुबे के न्यायालय में हुई।
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अभियुक्तों पर आरोप लगाए तो उन्होंने आरोपों से इनकार कर सत्र परीक्षण की मांग की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नरेंद्र राठौर एडवोकेट ने हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट की कई दलीलें रखते हुए दोषी को सख्त सजा दिलाने की पैरवी की। अपर जिला जज एफटीसी प्रथम मृदुल दुबे ने आरोपी धर्मेंद्र को बलात्कार का दोषी मानते हुए दस वर्ष का सश्रम कारावास एवं 20 हजार का अर्थदंड लगाया है। 366 में पांच वर्ष का कारावास एवं पांच हजार अर्थदंड ही लगाया है।
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