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चंद्रग्रहण का असर वृंदावन के मंदिरों पर
Updated Fri, 27 Jul 2018 11:09 PM IST
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वृंदावन (मथुरा)। गुरुपूर्णिमा पर शुक्रवार को पड़े चंद्रग्रहण का असर तीर्थ नगरी वृंदावन के मंदिरों पर भी पड़ा। मंदिर सेवायतों द्वारा सूतक लगने से पूर्व मंदिर की सभी परंपराओं का निर्वहन कर मंदिरों को बंद कर दिया गया।
चंद्रग्रहण के कारण शुक्रवार को शृंगार आरती प्रात: 7:55 हुई। इसके बाद राजभोग आरती 10:55 पर होने के बाद पट बंद हो गए। दोपहर 12 बजे मंदिर खुला और और 1:55 बजे शयन आरती की गई। इसके बाद मंदिर के पट बंद हो हो गए। चंद्रग्रहण के कारण दर्शन के समय में हुए बदलाव के बाद भी पूर्णिमा होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रही।
बरसात के मौसम में भी भक्त अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए मंदिर के प्रवेश गेट पर एकत्रित हो गए। पट खुलते ही मंदिर परिसर ठाकुर बांके बिहारी महाराज के जयकारों से गुंजायमान हो गया।
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देहरी पर माथा टेका चले गए
ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के दर्शन के लिए आए सैकड़ों श्रद्धालुओं को चंद्रग्रहण के कारण मंदिर के पट बंद होने पर बिना दर्शन किए ही लौटना पड़ा। शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए गए। इससे उन श्रद्धालुओं को मायूसी हुई जिन्हें मंदिर पट जल्द बंद होने की जानकारी नहीं थी।
श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के मुख्य गेट पर माथा टेका और चले गए। वहीं कई श्रद्धालु मंदिर के गेट पर कीर्तन करते दिखे।
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चंद्रग्रहण के कारण शुक्रवार को शृंगार आरती प्रात: 7:55 हुई। इसके बाद राजभोग आरती 10:55 पर होने के बाद पट बंद हो गए। दोपहर 12 बजे मंदिर खुला और और 1:55 बजे शयन आरती की गई। इसके बाद मंदिर के पट बंद हो हो गए। चंद्रग्रहण के कारण दर्शन के समय में हुए बदलाव के बाद भी पूर्णिमा होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रही।
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बरसात के मौसम में भी भक्त अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए मंदिर के प्रवेश गेट पर एकत्रित हो गए। पट खुलते ही मंदिर परिसर ठाकुर बांके बिहारी महाराज के जयकारों से गुंजायमान हो गया।
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देहरी पर माथा टेका चले गए
ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के दर्शन के लिए आए सैकड़ों श्रद्धालुओं को चंद्रग्रहण के कारण मंदिर के पट बंद होने पर बिना दर्शन किए ही लौटना पड़ा। शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए गए। इससे उन श्रद्धालुओं को मायूसी हुई जिन्हें मंदिर पट जल्द बंद होने की जानकारी नहीं थी।
श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के मुख्य गेट पर माथा टेका और चले गए। वहीं कई श्रद्धालु मंदिर के गेट पर कीर्तन करते दिखे।