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मुड़िया मेले में तलहटी के मंदिरों पर होगी धन वर्षा
Updated Sun, 25 Jun 2017 12:01 AM IST
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गोवर्धन। राजकीय मेले मुड़िया पूर्णिमा पर तलहटी के प्रमुख मंदिरों पर जमकर धनवर्षा होगी। मुड़िया मेला और सावन माह के लिए कस्बे के दो प्रमुख मंदिरों की सेवा गोलक का ठेका चार करोड़ 26 लाख रुपये में उठा है। जब ठेका ही करोड़ों में उठा है तो इससे होने वाली आय का तो सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है।
पांच से नौ जुलाई तक राजकीय मुड़िया पूर्णिमा मेला आयोजित होगा। मेला में लाखों श्रद्धालुओं के आने के कारण इसे लक्खी मेला भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं यहां आकर प्रमुख मंदिरों पर पूजा-अर्चना कर भेंट चढ़ाते हैं। इस भेंट को लेकर प्रति वर्ष प्रमुख मंदिरों की गोलक का ठेका उठाया जाता है।
इस बार मानसी गंगा तट स्थित मुखारबिंद मंदिर का एक जुलाई से 72 दिन का भेंट सेवा गोलक का ठेका तीन करोड़ एक लाख रुपये से अधिक का हुआ है। वहीं प्रसिद्ध गिरिराज दानघाटी मंदिर का 41 दिन का भेंट ठेका एक करोड़ 25 लाख रुपये का हुआ है। इनके अलावा जतीपुरा मुखारबिंद मंदिर के एक माह (जुलाई) की भेंट का ठेका 31 लाख रुपये का उठाया गया है।
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इससे इस बार मुड़िया मेला के दौरान मंदिरों पर अच्छी धन वर्षा की उम्मीद की जा रही है। हालांकि उक्त ठेका में मानसी गंगा मुखारबिंद मंदिर से जुडे़ हरगोकुल मंदिर व दानघाटी मंदिर से जुडे़ लक्ष्मीनारायन मंदिर के भेंट सेवा ठेका की धनराशि शामिल नहीं है। इससे प्रतिवर्ष मुड़िया मेला और सावन मास में भेंट और दान की जाने वाली धनराशि का सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है।
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पांच से नौ जुलाई तक राजकीय मुड़िया पूर्णिमा मेला आयोजित होगा। मेला में लाखों श्रद्धालुओं के आने के कारण इसे लक्खी मेला भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं यहां आकर प्रमुख मंदिरों पर पूजा-अर्चना कर भेंट चढ़ाते हैं। इस भेंट को लेकर प्रति वर्ष प्रमुख मंदिरों की गोलक का ठेका उठाया जाता है।
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इस बार मानसी गंगा तट स्थित मुखारबिंद मंदिर का एक जुलाई से 72 दिन का भेंट सेवा गोलक का ठेका तीन करोड़ एक लाख रुपये से अधिक का हुआ है। वहीं प्रसिद्ध गिरिराज दानघाटी मंदिर का 41 दिन का भेंट ठेका एक करोड़ 25 लाख रुपये का हुआ है। इनके अलावा जतीपुरा मुखारबिंद मंदिर के एक माह (जुलाई) की भेंट का ठेका 31 लाख रुपये का उठाया गया है।
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इससे इस बार मुड़िया मेला के दौरान मंदिरों पर अच्छी धन वर्षा की उम्मीद की जा रही है। हालांकि उक्त ठेका में मानसी गंगा मुखारबिंद मंदिर से जुडे़ हरगोकुल मंदिर व दानघाटी मंदिर से जुडे़ लक्ष्मीनारायन मंदिर के भेंट सेवा ठेका की धनराशि शामिल नहीं है। इससे प्रतिवर्ष मुड़िया मेला और सावन मास में भेंट और दान की जाने वाली धनराशि का सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है।