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श्रीराम को 14 साल का वनवास, आखें हुईं नम
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:51 PM IST
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फिरोजाबाद। रामलीला मैदान में रविवार को श्रीराम के वनवास की लीला देखने सैकड़ों दर्शक उमड़े। कैकई ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे, जिसमें भरत को राज्याभिषेक, श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास। श्रीराम जब राजसी ठाठ-बाट त्यागकर वन जाते देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
रामलीला मंचन क लिए पूरा मैदान आकर्षक, रंग बिरंगी झालरों से जगमगा रहा था। मैदान में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन के साथ राजा दशरथ का दरबार लगा है। महारानी कैकई की दासी मंथरा कहती है कि आपको महाराज दशरथ से दो वरदान मांगने हैं। वह वरदान मांगने का अभी सुनहरा अवसर है। मंथरा की सलाह पर महारानी कैकई कोप भवन में चली गईं। इसकी सूचना मिलने पर महाराज दशरथ कैकई से मिलने कोप भवन में पहुंचते हैं।
कैकई ने राजा दशरथ से पहले वरदान के रूप में भरत का राज्यभिषेक तथा दूसरे वरदान में भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मांगा। यह सुनकर राजा दशरथ सदमे के कारण बेहोश हो गए। राजा दरशथ के बेहोश होने पर मैदान में सन्नाटा छा गया। राजा दशरथ ने श्रीराम को मां कैकई द्वारा मांगे गए वरदान की जानकारी दी तो श्रीराम सहर्ष वन जाने को तैयार हो गए। मां की आज्ञा मानते हुए श्रीराम ने राजसी वस्त्र त्याकर वन जाने की तैयारी शुरू कर दी। श्रीराम के साथ माता जानकी व अनुज लक्ष्मण वन जाने लगे। उनके पीछे-पीछे अयोध्यावासी चल पड़े। लीला समाप्ति पर सभी पात्रों की आरती उतारी गई।
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रामलीला मंचन क लिए पूरा मैदान आकर्षक, रंग बिरंगी झालरों से जगमगा रहा था। मैदान में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन के साथ राजा दशरथ का दरबार लगा है। महारानी कैकई की दासी मंथरा कहती है कि आपको महाराज दशरथ से दो वरदान मांगने हैं। वह वरदान मांगने का अभी सुनहरा अवसर है। मंथरा की सलाह पर महारानी कैकई कोप भवन में चली गईं। इसकी सूचना मिलने पर महाराज दशरथ कैकई से मिलने कोप भवन में पहुंचते हैं।
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कैकई ने राजा दशरथ से पहले वरदान के रूप में भरत का राज्यभिषेक तथा दूसरे वरदान में भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मांगा। यह सुनकर राजा दशरथ सदमे के कारण बेहोश हो गए। राजा दरशथ के बेहोश होने पर मैदान में सन्नाटा छा गया। राजा दशरथ ने श्रीराम को मां कैकई द्वारा मांगे गए वरदान की जानकारी दी तो श्रीराम सहर्ष वन जाने को तैयार हो गए। मां की आज्ञा मानते हुए श्रीराम ने राजसी वस्त्र त्याकर वन जाने की तैयारी शुरू कर दी। श्रीराम के साथ माता जानकी व अनुज लक्ष्मण वन जाने लगे। उनके पीछे-पीछे अयोध्यावासी चल पड़े। लीला समाप्ति पर सभी पात्रों की आरती उतारी गई।
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