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आवासीय योजनाओं में विकास प्राधिकरण के पांच करोड़ फंसे
Updated Sat, 16 Dec 2017 08:19 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के आवासीय योजनाओं में पांच करोड़ से ज्यादा रुपये आवंटियों पर फंस गया है। इसमें 13 साल पहले बनी कृष्ण बिहार आवासीय योजना में 1.62 करोड़ रुपये की बकाएदारी है। यहां आवंटी वर्षों से किस्त जमा नहीं कर रहे हैं, जबकि रुक्मिणी विहार योजना में भी अधिकतर ने किस्त देना बंद कर दिया है।
वर्ष 2004 में हाईवे पर स्वर्ण जयंती अस्पताल के निकट विकास प्राधिकरण ने कृष्ण विहार आवासीय योजना के तहत एलआईजी और ईडब्लूएस आवास तैयार किए थे। सैकड़ाें की संख्या में बने आवास तो हाथों हाथ बिक गए, लेकिन आवंटियों ने आवासों की कीमत विकास प्राधिकरण को नहीं दी। अनेक आवंटी तो अभी तक एक या दो किस्त ही जमा कर सके हैं। प्राधिकरण के बाबू और आवंटियों के बीच की साठगांठ इस स्थिति का बड़ा कारण बनी हुई है। इस योजना के तहत 22 आवंटियों पर एलआईजी आवास के कुल 9943000 और ईडब्लूएस के 25 आवंटियों पर 6322000 रुपये बकाया हैं। कई आवंटी ऐसे भी हैं जिन पर प्राधिकरण के दस लाख रुपये से अधिक बकाया हैं। इनमें कई राजनीतिक पहुंच वाले हैं। इसी पहुंच के चलते इन्होंने प्राधिकरण की किस्त जमा नहीं की और बिना फ्री होल्ड किए मकानों को तुड़वाकर निर्माण कार्य करा लिया है।
प्राधिकरण ने इन आवंटियों को कभी नोटिस भेजने की भी जरूरत नहीं समझी।
इसी तरह हाल ही में बनी रुक्मिणी विहार योजना में भी अधिकतर आवंटियों ने किस्त जमा नहीं की है। इससे प्राधिकरण की करीब तीन से चार करोड़ की राशि लटकने के आसार हैं। रुक्मिणी विहार में 672 ईडब्लूएस 272 स्टूडियो हैं। इनमें से कुल 125 ने रजिस्ट्री कराई है, जबकि 200 ने एग्रीमेंट कराया है। प्राधिकरण की उपाध्यक्ष यशु रुस्तगी ने बताया कि वे आवास आवंटन के मामले में जांच कराएंगी।
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वर्ष 2004 में हाईवे पर स्वर्ण जयंती अस्पताल के निकट विकास प्राधिकरण ने कृष्ण विहार आवासीय योजना के तहत एलआईजी और ईडब्लूएस आवास तैयार किए थे। सैकड़ाें की संख्या में बने आवास तो हाथों हाथ बिक गए, लेकिन आवंटियों ने आवासों की कीमत विकास प्राधिकरण को नहीं दी। अनेक आवंटी तो अभी तक एक या दो किस्त ही जमा कर सके हैं। प्राधिकरण के बाबू और आवंटियों के बीच की साठगांठ इस स्थिति का बड़ा कारण बनी हुई है। इस योजना के तहत 22 आवंटियों पर एलआईजी आवास के कुल 9943000 और ईडब्लूएस के 25 आवंटियों पर 6322000 रुपये बकाया हैं। कई आवंटी ऐसे भी हैं जिन पर प्राधिकरण के दस लाख रुपये से अधिक बकाया हैं। इनमें कई राजनीतिक पहुंच वाले हैं। इसी पहुंच के चलते इन्होंने प्राधिकरण की किस्त जमा नहीं की और बिना फ्री होल्ड किए मकानों को तुड़वाकर निर्माण कार्य करा लिया है।
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प्राधिकरण ने इन आवंटियों को कभी नोटिस भेजने की भी जरूरत नहीं समझी।
इसी तरह हाल ही में बनी रुक्मिणी विहार योजना में भी अधिकतर आवंटियों ने किस्त जमा नहीं की है। इससे प्राधिकरण की करीब तीन से चार करोड़ की राशि लटकने के आसार हैं। रुक्मिणी विहार में 672 ईडब्लूएस 272 स्टूडियो हैं। इनमें से कुल 125 ने रजिस्ट्री कराई है, जबकि 200 ने एग्रीमेंट कराया है। प्राधिकरण की उपाध्यक्ष यशु रुस्तगी ने बताया कि वे आवास आवंटन के मामले में जांच कराएंगी।
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