{"_id":"5a22afff4f1c1b9f678befe9","slug":"71512222719-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार, अब फिर होगी कार्रवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार, अब फिर होगी कार्रवाई
Updated Sun, 03 Dec 2017 12:00 AM IST
विज्ञापन
demo pic
- फोटो : डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के कुलपति प्रोफेसर एके दीक्षित ने कहा वर्ष 2004-05 की फर्जी डिग्री मामले में न्यायालय के आदेश का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। इस समय उनका फोकस परीक्षा केंद्रों के कड़े मानकों के पालन, सत्र सुधार पर है।
कुलपति केआर गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित लोकार्पण समारोह के बाद मीडिया से रूबरू हुए। फर्जी बीएड डिग्री के मामले में विश्वविद्यालय के रुख के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में वो हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। इसी के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने नियमित शिक्षा सत्र, परीक्षा केंद्रों के मानकों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराया है। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली सहित कई राज्यों के छात्राओं की धारणा थी कि आगरा विश्वविद्यालय डिग्री हासिल करने की अच्छी जगह है। अब ये धारणा टूट रही है। सख्ती के बाद इन छात्रों के पास अब पढ़ने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। निधि की अधिक से अधिक धनराशि शिक्षा के क्षेत्र में खर्च हो ताकि कॉलेजों का बुनियादी ढांचा और बेहतर हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुलपति केआर गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित लोकार्पण समारोह के बाद मीडिया से रूबरू हुए। फर्जी बीएड डिग्री के मामले में विश्वविद्यालय के रुख के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में वो हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। इसी के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने नियमित शिक्षा सत्र, परीक्षा केंद्रों के मानकों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराया है। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली सहित कई राज्यों के छात्राओं की धारणा थी कि आगरा विश्वविद्यालय डिग्री हासिल करने की अच्छी जगह है। अब ये धारणा टूट रही है। सख्ती के बाद इन छात्रों के पास अब पढ़ने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। निधि की अधिक से अधिक धनराशि शिक्षा के क्षेत्र में खर्च हो ताकि कॉलेजों का बुनियादी ढांचा और बेहतर हो सके।
विज्ञापन