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शिक्षामित्र फिर आंदोलन की राह पर
Updated Wed, 06 Sep 2017 11:32 PM IST
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मैनपुरी। प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के मानदेय को लेकर 10 हजार का फैसला आने के बाद उन्होंने एक बार फिर से विरोध-प्रदर्शन किया है। बुधवार को आक्रोशित शिक्षामित्रों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए एडीएम न्यायिक को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
प्रदेश सरकार की कैबिनेट में शिक्षामित्रों के लिए 10 हजार मानदेय का निर्णय लेने की जानकारी शिक्षामित्रों को हुई तो वे फिर से आक्रोशित हो गए। वे दोपहर 12 बजे कलक्ट्रेट पहुंच गए। यहां प्रदर्शन करते हुए सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया।
जिलाध्यक्ष हेम सिंह का कहना था कि यदि सरकार कोर्ट के सभी निर्देशों का पालन करती है तो इस बात का भी पालन किया जाए कि समान कार्य के लिए समान वेतन लागू हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश का शिक्षा मित्र 10 हजार मानदेय को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।
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जिलामंत्री सनत पांडेय का कहना था कि पूर्व में सरकार ने भरोसा दिया था कि उनके सम्मान के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह कौनसा प्रयास है कि उन्हें 40 हजार से उतारकर 10 हजार पर फेंका जा रहा है। आक्रोशित शिक्षा मित्रों ने कलक्ट्रेट स्थित तिकोनिया पार्क में नारेबाजी भी की। इस अवसर पर शुभम शक्ति भदौरिया, विनीत चौहान, अशोक कुमार यादव,मनोज शाक्य, अजय यादव, राकेश सिंह, विजय कुमार मिश्रा, प्रमोद कुमार, सत्यदेव, महेंद्र पाल सिंह, हरवीर सिंह आदि रहे।
कल्पना चौहान ने कहा कि सरकार ने पूर्व में हुई वार्ता के दौरान कहा था कि उनके लिए उचित रास्ता निकाला जा रहा है। लेकिन 10 हजार मानदेय लागू कर दिया। इसे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार शीघ्र अपना ये निर्णय वापस ले।
साधना सिंह ने कहा कि सरकार ने शिक्षा मित्रों के साथ नाइंसाफी की है। शिक्षा मित्रों को सड़क पर खड़ा कर दिया है। सरकार को चाहिए कि वे शीघ्र उचित हल निकालकर शिक्षा मित्रों का खोया हुआ सम्मान वापस दिलाएं।
शुभम शक्ति भदौरिया ने कहा कि सरकार ये निर्णय शिक्षा मित्रों के लिए कुठाराघात है। सरकार को चाहिए कि वह उनके नियमितीकरण का रास्ता निकाले। अन्यथा वे लोग फिर से धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। जरुरत पड़ी तो आमरण अनशन भी किया जाएगा।
सुमित कुमार का कहना है कि प्रदेश सरकार शिक्षा मित्रों के जीवन के बारे में कोई ध्यान नहीं दे रही है। जिससे प्रदेश में डेढ़ लाख परिवार संकट में हैं। सरकार को डेढ़ लाख परिवारों के भविष्य को देखते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करना चाहिए।
प्रदेश सरकार की कैबिनेट में शिक्षामित्रों के लिए 10 हजार मानदेय का निर्णय लेने की जानकारी शिक्षामित्रों को हुई तो वे फिर से आक्रोशित हो गए। वे दोपहर 12 बजे कलक्ट्रेट पहुंच गए। यहां प्रदर्शन करते हुए सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया।
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जिलाध्यक्ष हेम सिंह का कहना था कि यदि सरकार कोर्ट के सभी निर्देशों का पालन करती है तो इस बात का भी पालन किया जाए कि समान कार्य के लिए समान वेतन लागू हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश का शिक्षा मित्र 10 हजार मानदेय को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।
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जिलामंत्री सनत पांडेय का कहना था कि पूर्व में सरकार ने भरोसा दिया था कि उनके सम्मान के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह कौनसा प्रयास है कि उन्हें 40 हजार से उतारकर 10 हजार पर फेंका जा रहा है। आक्रोशित शिक्षा मित्रों ने कलक्ट्रेट स्थित तिकोनिया पार्क में नारेबाजी भी की। इस अवसर पर शुभम शक्ति भदौरिया, विनीत चौहान, अशोक कुमार यादव,मनोज शाक्य, अजय यादव, राकेश सिंह, विजय कुमार मिश्रा, प्रमोद कुमार, सत्यदेव, महेंद्र पाल सिंह, हरवीर सिंह आदि रहे।
कल्पना चौहान ने कहा कि सरकार ने पूर्व में हुई वार्ता के दौरान कहा था कि उनके लिए उचित रास्ता निकाला जा रहा है। लेकिन 10 हजार मानदेय लागू कर दिया। इसे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार शीघ्र अपना ये निर्णय वापस ले।
साधना सिंह ने कहा कि सरकार ने शिक्षा मित्रों के साथ नाइंसाफी की है। शिक्षा मित्रों को सड़क पर खड़ा कर दिया है। सरकार को चाहिए कि वे शीघ्र उचित हल निकालकर शिक्षा मित्रों का खोया हुआ सम्मान वापस दिलाएं।
शुभम शक्ति भदौरिया ने कहा कि सरकार ये निर्णय शिक्षा मित्रों के लिए कुठाराघात है। सरकार को चाहिए कि वह उनके नियमितीकरण का रास्ता निकाले। अन्यथा वे लोग फिर से धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। जरुरत पड़ी तो आमरण अनशन भी किया जाएगा।
सुमित कुमार का कहना है कि प्रदेश सरकार शिक्षा मित्रों के जीवन के बारे में कोई ध्यान नहीं दे रही है। जिससे प्रदेश में डेढ़ लाख परिवार संकट में हैं। सरकार को डेढ़ लाख परिवारों के भविष्य को देखते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करना चाहिए।