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कोईले घाट पर यमुना ने स्पर्श किए थे कान्हा के पैर
Updated Mon, 14 Aug 2017 08:29 PM IST
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- फोटो : demo
टाउनशिप (मथुरा)। श्रीकृष्ण के जन्म के बाद कंस के भय से भयभीत वासुदेव उन्हें गोकुल नंद बाबा के घर छोड़ने के लिए यमुना पार कर रहे थे। यमुना अपने उफान पर थी। जब उन्हें लगा कि वो अब नहीं बच पाएंगे तो भयभीत होकर पुकारने लगे कोई-ले, कोई-ले। इसी के चलते इस घाट का नाम कोईले घाट पड़ा।
गांव कोयला अलीपुर स्थित यमुना का कोई-ले घाट पांच हजार साल पुरानी भगवान श्रीकृष्ण की लीला का साक्षी है। कहा जाता है द्वापर में जब मध्यरात्रि भगवान श्रीकृष्ण का कंस के कारागार में जन्म हुआ तो कंस के पहरेदार सो गए।
कंस के आतंक से दुखी वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण को टोकरी (छाज) में रखकर उन्हें यमुना पार गोकुल नंदबाबा के घर छोड़ने के लिए निकले। यमुना उस समय अपने पूरे उफान पर थी। वासुदेव यमुना में उतर गए, इधर यमुना भी भगवान श्रीकृष्ण के चरणों को स्पर्श करने के लिए मचल उठी। पानी का स्तर बढ़ा तो वासुदेव घबरा गए और वो जोर-जोर से चिल्लाने लगे कोई-ले, कोई-ले (कोई भगवान श्रीकृष्ण को ले ले)।
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इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने चरण टोकरी से नीचे लटका दिए और यमुना स्पर्श कर उतर गई। यमुना किनारे स्थित ये स्थल आज कोईले घाट के नाम से जाना जाता है।
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गांव कोयला अलीपुर स्थित यमुना का कोई-ले घाट पांच हजार साल पुरानी भगवान श्रीकृष्ण की लीला का साक्षी है। कहा जाता है द्वापर में जब मध्यरात्रि भगवान श्रीकृष्ण का कंस के कारागार में जन्म हुआ तो कंस के पहरेदार सो गए।
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कंस के आतंक से दुखी वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण को टोकरी (छाज) में रखकर उन्हें यमुना पार गोकुल नंदबाबा के घर छोड़ने के लिए निकले। यमुना उस समय अपने पूरे उफान पर थी। वासुदेव यमुना में उतर गए, इधर यमुना भी भगवान श्रीकृष्ण के चरणों को स्पर्श करने के लिए मचल उठी। पानी का स्तर बढ़ा तो वासुदेव घबरा गए और वो जोर-जोर से चिल्लाने लगे कोई-ले, कोई-ले (कोई भगवान श्रीकृष्ण को ले ले)।
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इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने चरण टोकरी से नीचे लटका दिए और यमुना स्पर्श कर उतर गई। यमुना किनारे स्थित ये स्थल आज कोईले घाट के नाम से जाना जाता है।