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भक्तों का रेला दे गया सौ करोड़ का कारोबार
Updated Mon, 10 Jul 2017 12:27 AM IST
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राध्ााकृष्ण
- फोटो : demo
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गोवर्धन (मथुरा)। मुड़िया पूर्णिमा का छह दिवसीय मेला रविवार को संपन्न हो गया। इस मेले में पचास लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आकर गिरिराज जी की परिक्रमा की। मथुरा में भक्तों की भीड़ उमड़ी, तो कारोबारियों के चेहरे भी खिल गए।
गोवर्धन में मुड़िया मेला में इस बार पचास लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। परिक्रमा के लिए आए भक्तों ने अन्य मंदिरों में भी दर्शन किए। ऐसे में मथुरा, वृंदावन, गोकुल, महावन, बरसाना और नंदगांव के क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मथुरा में प्रवेश के साथ ही श्रद्धालु यहां से पूजन सामग्री, खानपान की वस्तुएं, आवागमन के लिए वाहन, ठहरने के लिये होटल, धर्मशाला, पार्किंग आदि पर खर्च किए।
अनुमान के मुताबिक एक श्रद्धालु यहां ठहरने के दौरान करीब सौ रुपया से अधिक व्यय करता है। ऐसे में पचास लाख श्रद्धालुओं से कारोबार का आंकड़ा दो सौ करोड़ का हो जाता है। इस धनराशि से पूजन सामग्री, दूध-दही, लस्सी, कोल्ड ड्रिंग्स, गुटखा, पानी और चाय नाश्ता बेचने वाले निचले तबके के लोगों के घरों में खुशहाली छा जाती है।
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जूते-चप्पल की रखवाली पर तीन करोड़
मुड़िया पूर्णिमा मेले में जूते-चप्पलों की रखवाली करने वालों की सबसे ज्यादा चांदी रही। एक जोड़ी जूते-चप्पल की रखवाली का किराया पांच से सात रुपये तक लिया जाता है। ऐसे में अकेले जूते-चप्पल रखवाली का कारोबार ही ढाई से तीन करोड़ रुपये का हो जाता है।
भिखारियों के चहेरे भी मुस्कुराए
मुड़िया पूर्णिमा मेले में भिखारियों की भी बल्ले-बल्ले रही। हालांकि पुलिस की सख्ती के चलते परिक्रमा में भिखारियों का कोई निश्चित स्थान नहीं रहा, लेकिन फिर भी उनको जमकर भिक्षा मिली।
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गोवर्धन में मुड़िया मेला में इस बार पचास लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। परिक्रमा के लिए आए भक्तों ने अन्य मंदिरों में भी दर्शन किए। ऐसे में मथुरा, वृंदावन, गोकुल, महावन, बरसाना और नंदगांव के क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मथुरा में प्रवेश के साथ ही श्रद्धालु यहां से पूजन सामग्री, खानपान की वस्तुएं, आवागमन के लिए वाहन, ठहरने के लिये होटल, धर्मशाला, पार्किंग आदि पर खर्च किए।
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अनुमान के मुताबिक एक श्रद्धालु यहां ठहरने के दौरान करीब सौ रुपया से अधिक व्यय करता है। ऐसे में पचास लाख श्रद्धालुओं से कारोबार का आंकड़ा दो सौ करोड़ का हो जाता है। इस धनराशि से पूजन सामग्री, दूध-दही, लस्सी, कोल्ड ड्रिंग्स, गुटखा, पानी और चाय नाश्ता बेचने वाले निचले तबके के लोगों के घरों में खुशहाली छा जाती है।
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जूते-चप्पल की रखवाली पर तीन करोड़
मुड़िया पूर्णिमा मेले में जूते-चप्पलों की रखवाली करने वालों की सबसे ज्यादा चांदी रही। एक जोड़ी जूते-चप्पल की रखवाली का किराया पांच से सात रुपये तक लिया जाता है। ऐसे में अकेले जूते-चप्पल रखवाली का कारोबार ही ढाई से तीन करोड़ रुपये का हो जाता है।
भिखारियों के चहेरे भी मुस्कुराए
मुड़िया पूर्णिमा मेले में भिखारियों की भी बल्ले-बल्ले रही। हालांकि पुलिस की सख्ती के चलते परिक्रमा में भिखारियों का कोई निश्चित स्थान नहीं रहा, लेकिन फिर भी उनको जमकर भिक्षा मिली।