{"_id":"5a941be14f1c1b1d368bc929","slug":"61519655905-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘गोपी के गाल गुलाबिन पै मल लाल गुलाल लगातो लाला’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘गोपी के गाल गुलाबिन पै मल लाल गुलाल लगातो लाला’
Updated Mon, 26 Feb 2018 08:27 PM IST
विज्ञापन
होली
- फोटो : डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वृंदावन (मथुरा)। हर तरफ उड़ रहा था गुलाल। बांकेबिहारी के भक्तों ने कभी फूल बरसाए तो कभी रंग। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में तो रंगीले बादल छा गए थे। होली पर जनजन के आराध्य ने जब भक्तों संग होली खेली तो लगा कि संपूर्ण ब्रह्मांड इस दिव्य दर्शन के लिए मानो ठहर गया। बांकेबिहारी महाराज के गगन भेदी जयकारे लोगों की अटूट श्रद्धा को बयां कर रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
रंगभरनी एकादशी पर सोमवार शाम की बेला में जनजन के आराध्य ठाकुर बांके बिहारी महाराज ने भक्तों संग होली खेली। 4:30 बजे मंदिर के पट खुलते ही जन समुदाय मंदिर प्रांगण में जयकारे लगाते हुए प्रवेश कर गया। सेवायतों ने सर्वप्रथम रजत सिंहासन पर स्वेत पोशाक धारण कर विराजमान ठाकुरजी पर स्वर्ण पिचकारी से केसर निर्मित रंग को डालकर वृंदावन में परंपरागत होली का शुभारंभ किया।
इसके बाद मंदिर प्रांगण में अबीर गुलाल और फूलो की होली का श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। टेसू के फूलों और केसर के रंगों से निर्मित प्राकृतिक रंगों को पिचकारियों में भरकर श्रद्धालुओं पर वर्षा हुई। रंग और गुलाल में सराबोर हो अपने को भक्त अपने को धन्य मान रहे थे। टेसू के रंग और चंदन का हुआ प्रयोग रंगभरनी एकादशी पर जनजन के आराध्य ठाकुर श्री बांकेबिहारी महाराज अपने रजत सिंहासन पर आरुढ़ होकर स्वेत पोशाक धारण कर होली खेलने जगमोहन में विराजे। मंदिर में होली खेलने के लिए ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में टेसू के विभिन्न प्रकार के रंग चंदन के अलावा अबीर और गुलाल का प्रयोग किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन