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प्रतियां जलाकर जताया विरोध, आरपार की लड़ाई का एलान
Updated Wed, 06 Sep 2017 11:28 PM IST
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प्रतियां जलाकर जताया विरोध, आरपार की लड़ाई का एलान
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार के दस हजार के मानदेय पर भड़के शिक्षा मित्रों ने विरोध प्रदर्शन कर मानदेय प्रस्ताव की प्रतियां जलाईं। योगी सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगा आरपार की लड़ाई लड़ने का एलान किया। वहीं बीजेपी के प्रति नाराजगी दिखाते हुए भगवा रंग की टोपियों को भी जलाया गया।
संयुक्त शिक्षा मित्र संघर्ष समिति की ओर से शहीद पार्क में आयोजित बैठक में शामिल सैकड़ों शिक्षामित्रों ने शासन के मानदेय प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। संयोजक राजेश गुप्ता, सह संयोजक मनोज यादव, कृपाल सिंह एवं अवधेश यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि शासन का मानदेय प्रस्ताव शिक्षामित्रों के साथ विश्वासघात है। सड़कों पर उतरे आक्रोशितों ने पंडित दीनदयाल चौक पर प्रस्ताव की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।
शिक्षामित्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री एवं सचिव स्तर की कई बार की वार्ता के दौरान दिए गए आश्वासन कोरे निकले। मुख्यमंत्री को वादा खिलाफी के लिए इस्तीफा देना चाहिए। सुनील चौहान, अनिल कुमार आदि का आरोप है कि 25 अंकों के भारांक का वादा कर रही सरकार ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पास क्यों नहीं कराया? संगठन अब अपनी मांगों के लिए आरपार की लड़ाई लड़ेगा। विरोध जताने वालों में एसके राजपूत, रामबहादुर वर्मा, मोहम्मद इशाक, हरिओम प्रजापति, ओमेंद्र कुशवाहा, जयपाल, राज किशोर, नीलेश यादव, घनश्याम, पंकज, विजय तिवारी, गजेंद्र, विजय शाक्य, पूरन सिंह, सोरन सिंह आदि प्रमुख हैं।
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शिक्षामित्र आंदोलन के चलते स्कूलों का पठन पाठन प्रभावित हो रहा है। इनकी अनुपस्थिति से दर्जनों स्कूल बंद भी रहते हैं। लेकिन स्कूल प्रभार हटने के चलते तालाबंदी की समस्या जरूर खत्म हो गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एसके तिवारी के अनुसार स्कूलों के निरीक्षण के साथ ई-मॉनीटरिंग भी की जा रही है।
-सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिले के किसी विद्यालय का प्रभार शिक्षामित्रों पर नहीं है। ऐसे में इनके आंदोलन के दौरान स्कूल पूर्णरूप से बंद तो नहीं होते लेकिन शैक्षिक व्यवस्थाएं प्रभावित जरूर होती हैं।
- एसके तिवारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
कासगंज।
शासन के 10 हजार रुपये मानदेय देने के निर्णय से शिक्षामित्र सहमत नहीं है। वे एक बार फिर से हुंकार भरने लगे हैं। शिक्षामित्रों ने प्रभुपार्क में बैठक कर उन्हें पूर्ण शिक्षक बनाने के लिए अध्यादेश लाने की मांग की।
प्रदेश संरक्षक दक्ष यादव ने कहा कि शिक्षामित्रों को पूर्ण शिक्षक का दर्जा दिए जाने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। प्रदेश सरकार को शिक्षामित्रों से कोई हमदर्दी नहीं है। सरकार यदि अध्यादेश लाकर शिक्षा मित्रों को पूर्ण शिक्षक का दर्जा नहीं देती है तो वे फिर से आंदोलन का रास्ता अपना लेंगे। 14 सितंबर से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देंगे। जिसमें प्रदेश भर से बड़ी संख्या में शिक्षा मित्र सहभागिता करेंगे।
शिक्षामित्र नेता जसवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने का जो निर्णय लिया है उसे वापस ले। शिक्षामित्र अपने हक के लिए हर संघर्ष करने को तैयार हैं। इस अवसर पर रामनरेश यादव, अशोक लोधी, तेजभान सिंह, राम बहादुर यादव, राजपाल, अखिलेश, शोभारानी, ज्योति चौहान, रेखारानी, निशा राजपूत, सरस्वती बंदना, ऊषा, अर्चना, स्नेह रानी आदि मौजूद रहे।
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प्रदेश सरकार के दस हजार के मानदेय पर भड़के शिक्षा मित्रों ने विरोध प्रदर्शन कर मानदेय प्रस्ताव की प्रतियां जलाईं। योगी सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगा आरपार की लड़ाई लड़ने का एलान किया। वहीं बीजेपी के प्रति नाराजगी दिखाते हुए भगवा रंग की टोपियों को भी जलाया गया।
संयुक्त शिक्षा मित्र संघर्ष समिति की ओर से शहीद पार्क में आयोजित बैठक में शामिल सैकड़ों शिक्षामित्रों ने शासन के मानदेय प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। संयोजक राजेश गुप्ता, सह संयोजक मनोज यादव, कृपाल सिंह एवं अवधेश यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि शासन का मानदेय प्रस्ताव शिक्षामित्रों के साथ विश्वासघात है। सड़कों पर उतरे आक्रोशितों ने पंडित दीनदयाल चौक पर प्रस्ताव की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।
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शिक्षामित्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री एवं सचिव स्तर की कई बार की वार्ता के दौरान दिए गए आश्वासन कोरे निकले। मुख्यमंत्री को वादा खिलाफी के लिए इस्तीफा देना चाहिए। सुनील चौहान, अनिल कुमार आदि का आरोप है कि 25 अंकों के भारांक का वादा कर रही सरकार ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पास क्यों नहीं कराया? संगठन अब अपनी मांगों के लिए आरपार की लड़ाई लड़ेगा। विरोध जताने वालों में एसके राजपूत, रामबहादुर वर्मा, मोहम्मद इशाक, हरिओम प्रजापति, ओमेंद्र कुशवाहा, जयपाल, राज किशोर, नीलेश यादव, घनश्याम, पंकज, विजय तिवारी, गजेंद्र, विजय शाक्य, पूरन सिंह, सोरन सिंह आदि प्रमुख हैं।
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शिक्षामित्र आंदोलन के चलते स्कूलों का पठन पाठन प्रभावित हो रहा है। इनकी अनुपस्थिति से दर्जनों स्कूल बंद भी रहते हैं। लेकिन स्कूल प्रभार हटने के चलते तालाबंदी की समस्या जरूर खत्म हो गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एसके तिवारी के अनुसार स्कूलों के निरीक्षण के साथ ई-मॉनीटरिंग भी की जा रही है।
-सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिले के किसी विद्यालय का प्रभार शिक्षामित्रों पर नहीं है। ऐसे में इनके आंदोलन के दौरान स्कूल पूर्णरूप से बंद तो नहीं होते लेकिन शैक्षिक व्यवस्थाएं प्रभावित जरूर होती हैं।
- एसके तिवारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
कासगंज।
शासन के 10 हजार रुपये मानदेय देने के निर्णय से शिक्षामित्र सहमत नहीं है। वे एक बार फिर से हुंकार भरने लगे हैं। शिक्षामित्रों ने प्रभुपार्क में बैठक कर उन्हें पूर्ण शिक्षक बनाने के लिए अध्यादेश लाने की मांग की।
प्रदेश संरक्षक दक्ष यादव ने कहा कि शिक्षामित्रों को पूर्ण शिक्षक का दर्जा दिए जाने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। प्रदेश सरकार को शिक्षामित्रों से कोई हमदर्दी नहीं है। सरकार यदि अध्यादेश लाकर शिक्षा मित्रों को पूर्ण शिक्षक का दर्जा नहीं देती है तो वे फिर से आंदोलन का रास्ता अपना लेंगे। 14 सितंबर से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देंगे। जिसमें प्रदेश भर से बड़ी संख्या में शिक्षा मित्र सहभागिता करेंगे।
शिक्षामित्र नेता जसवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने का जो निर्णय लिया है उसे वापस ले। शिक्षामित्र अपने हक के लिए हर संघर्ष करने को तैयार हैं। इस अवसर पर रामनरेश यादव, अशोक लोधी, तेजभान सिंह, राम बहादुर यादव, राजपाल, अखिलेश, शोभारानी, ज्योति चौहान, रेखारानी, निशा राजपूत, सरस्वती बंदना, ऊषा, अर्चना, स्नेह रानी आदि मौजूद रहे।