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सरकार ने रोकी राज्यवित की किस्त, फंसा निकायकर्मियों का वेतन
Updated Thu, 29 Mar 2018 08:19 PM IST
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डैमो
- फोटो : डैमो
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मथुरा। राज्यवित्त के तहत जनपद के निकायों को मिलने वाली ढाई करोड़ की किस्त पर शासन ने रोक दी है। इस राशि का उपयोग निकाय कर्मचारियों के वेतन, पेंशन सहित विकास कार्यों के लिए होता हैं। पिछले कई सालों से निकायों द्वारा ऑडिट न कराए जाने पर यह कदम शासन ने उठाया है। इससे इस बार कर्मचारियों को वेतन समय पर नहीं मिलेगा।
जनपद में कोसीकलां नगर पालिका सहित 13 नगर पंचायत हैं। इनके लिए प्रतिमाह करीब ढाई करोड़ रुपये राज्य वित्त आयोग से कर्मचारियों के वेतन मद में दिया जाता है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी कोसीकलां नगर पालिका की है। इसके बाद गोवर्धन, राया और छाता को करीब 60 लाख रुपये दिए जाते हैं, जबकि गोकुल, महावन को 10-10 लाख रुपये मिलते हैं। नंदगांव, बरसाना, सौंख, चौमुहां, राधाकुंड, बाजना के लिए 12 से 18 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग से दिया जाता है। इस राशि का उपयोग कर्मचारियों के वेतन, पेंशन सहित अन्य विभिन्न पदों पर किया जाता है। शेष बचने पर विकास कार्य भी इस राशि से कराए जाते हैं।
पिछले निर्वाचित बोर्ड के दौरान निकाय अध्यक्षों ने उक्त राशि के उपयोग का ऑडिट नहीं कराई। इस पर शासन ने कड़ी आपत्ति जाहिर करते हुए बगैर ऑडिट के नई किस्त जारी करने से ही मना कर दिया है। इस संदर्भ में निकाय प्रमुखों को अवगत भी करा दिया गया है। इससे कर्मचारियों में खलबली है। इससे इस बार कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल सकेगा।
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जनपद में कोसीकलां नगर पालिका सहित 13 नगर पंचायत हैं। इनके लिए प्रतिमाह करीब ढाई करोड़ रुपये राज्य वित्त आयोग से कर्मचारियों के वेतन मद में दिया जाता है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी कोसीकलां नगर पालिका की है। इसके बाद गोवर्धन, राया और छाता को करीब 60 लाख रुपये दिए जाते हैं, जबकि गोकुल, महावन को 10-10 लाख रुपये मिलते हैं। नंदगांव, बरसाना, सौंख, चौमुहां, राधाकुंड, बाजना के लिए 12 से 18 लाख रुपये राज्य वित्त आयोग से दिया जाता है। इस राशि का उपयोग कर्मचारियों के वेतन, पेंशन सहित अन्य विभिन्न पदों पर किया जाता है। शेष बचने पर विकास कार्य भी इस राशि से कराए जाते हैं।
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पिछले निर्वाचित बोर्ड के दौरान निकाय अध्यक्षों ने उक्त राशि के उपयोग का ऑडिट नहीं कराई। इस पर शासन ने कड़ी आपत्ति जाहिर करते हुए बगैर ऑडिट के नई किस्त जारी करने से ही मना कर दिया है। इस संदर्भ में निकाय प्रमुखों को अवगत भी करा दिया गया है। इससे कर्मचारियों में खलबली है। इससे इस बार कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल सकेगा।
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