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पुलिस वादी, पुलिस ही विवेचक, मामले निकले झूठे
Updated Sat, 24 Jun 2017 11:27 PM IST
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पुलिसकर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी। पुलिस ने लिखाई रिपोर्ट, पुलिस ने ही की जांच और दर्ज रिपोर्ट जांच में झूठी निकली। इसे सुनकर लोग हैरत में पड़ सकते हैं। पर, पुलिस अभिलेखों से कुछ इसी तरह के तथ्य सामने आए हैं। पुलिस द्वारा लिखाई रिपोर्ट में धाराएं घटना और बढ़ाना अब आम बात होती जा रही है। जिसका सीधा लाभ अपराधियों को ही मिलता है।
शांति भंग करना, शराब की बरामदगी, तमंचे बनाने की फैक्ट्री पकड़ना, पुलिस पर हमला करना, रास्ता जाम करना, सरकारी कार्य में बाधा डालना जैसे अपराधों में पुलिस ही रिपोर्ट लिखाती हैं। इसकी पुलिस ही जांच करती है। जांच के दौरान पुलिस द्वारा लिखाई गई रिपोर्ट में बताए गए अपराध को ही झूठा पाकर धाराएं कम करके अपराधियों की सहायता कर देती है, जिससे आरोपियों को जमानत पाने में आसानी हो जाती है।
पुलिस की रिपोर्ट, पुलिस की जांच और मामला झूठा साबित होने की बात को कानून के जानकार पचा नहीं पाते हैं। उनका मानना है कि पुलिस किसी न किसी दबाब में आकर ही यह काम करती है जिसका लाभ जमानत पाने में अपराधियों को मिल जाता है।
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थाना कुर्रा क्षेत्र में में विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान के दिन नगला मचे के पास तत्कालीन थानाध्यक्ष ने कई लोगों के खिलाफ पुलिस टीम पर पथराव करने, फायरिंग करने की रिपोर्ट दर्ज करायी। मामले की जांच थानाध्यक्ष कुर्रा को सौंपी गयी। तत्कालीन थानाध्यक्ष के तबादले के बाद वर्तमान थानाध्यक्ष ने फायरिंग करने की बात झूठी पाकर धाराएं कम कर दीं। पुलिस की जांच को लेकर पुलिस विभाग में ही तमाम तरह की चर्चाएं हैं।
विधानसभा चुनाव में मतदान के दिन ही थाना औंछा के भगवंतपुर में पुलिस टीम पर पथराव करने, हमला करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने की रिपोर्ट थानाध्यक्ष औंछा ने दर्ज करायी। इस मामले में एक लेखपाल जेल भी गया। वकील को झूठा फंसाने का आरोप लगाकर वकीलों ने हड़ताल की। पुलिस ने जांच में धाराएं कम कर दीं। अरोपियों को अदालत से जमानत मिल चुकी हे। मामला अब ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
पूर्व डीजीसी चतुर सिंह कहते हैं कि वारदात के बाद पुलिस जल्दबाजी में रिपोर्ट लिखाकर तमाम धाराएं लगा देती है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जांच करने पर पुलिस दबाब में आकर आम तौर पर धाराएं कम करके जमानत पाने के लिए आरोपियों को मौका दे ही देती है। जिससे पुलिस की छवि धूमिल होती है। पुलिस की लिखाई रिपोर्ट पर तो जांच में पुलिस को गंभीरता दिखानी ही चाहिए।
एएसपी ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि घटना के बाद लिखाई गई रिपोर्ट की जांच में ही पता चलता है कि वारदात की सच्चाई क्या है। जांच के बाद जांच के आधार पर ही धाराएं घटाई और बढ़ायी जाती हैं। कई मामलों में जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर धाराएं बढ़ाई भी गई हैं।
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शांति भंग करना, शराब की बरामदगी, तमंचे बनाने की फैक्ट्री पकड़ना, पुलिस पर हमला करना, रास्ता जाम करना, सरकारी कार्य में बाधा डालना जैसे अपराधों में पुलिस ही रिपोर्ट लिखाती हैं। इसकी पुलिस ही जांच करती है। जांच के दौरान पुलिस द्वारा लिखाई गई रिपोर्ट में बताए गए अपराध को ही झूठा पाकर धाराएं कम करके अपराधियों की सहायता कर देती है, जिससे आरोपियों को जमानत पाने में आसानी हो जाती है।
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पुलिस की रिपोर्ट, पुलिस की जांच और मामला झूठा साबित होने की बात को कानून के जानकार पचा नहीं पाते हैं। उनका मानना है कि पुलिस किसी न किसी दबाब में आकर ही यह काम करती है जिसका लाभ जमानत पाने में अपराधियों को मिल जाता है।
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थाना कुर्रा क्षेत्र में में विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान के दिन नगला मचे के पास तत्कालीन थानाध्यक्ष ने कई लोगों के खिलाफ पुलिस टीम पर पथराव करने, फायरिंग करने की रिपोर्ट दर्ज करायी। मामले की जांच थानाध्यक्ष कुर्रा को सौंपी गयी। तत्कालीन थानाध्यक्ष के तबादले के बाद वर्तमान थानाध्यक्ष ने फायरिंग करने की बात झूठी पाकर धाराएं कम कर दीं। पुलिस की जांच को लेकर पुलिस विभाग में ही तमाम तरह की चर्चाएं हैं।
विधानसभा चुनाव में मतदान के दिन ही थाना औंछा के भगवंतपुर में पुलिस टीम पर पथराव करने, हमला करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने की रिपोर्ट थानाध्यक्ष औंछा ने दर्ज करायी। इस मामले में एक लेखपाल जेल भी गया। वकील को झूठा फंसाने का आरोप लगाकर वकीलों ने हड़ताल की। पुलिस ने जांच में धाराएं कम कर दीं। अरोपियों को अदालत से जमानत मिल चुकी हे। मामला अब ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
पूर्व डीजीसी चतुर सिंह कहते हैं कि वारदात के बाद पुलिस जल्दबाजी में रिपोर्ट लिखाकर तमाम धाराएं लगा देती है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जांच करने पर पुलिस दबाब में आकर आम तौर पर धाराएं कम करके जमानत पाने के लिए आरोपियों को मौका दे ही देती है। जिससे पुलिस की छवि धूमिल होती है। पुलिस की लिखाई रिपोर्ट पर तो जांच में पुलिस को गंभीरता दिखानी ही चाहिए।
एएसपी ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि घटना के बाद लिखाई गई रिपोर्ट की जांच में ही पता चलता है कि वारदात की सच्चाई क्या है। जांच के बाद जांच के आधार पर ही धाराएं घटाई और बढ़ायी जाती हैं। कई मामलों में जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर धाराएं बढ़ाई भी गई हैं।