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हाथवंत-मुस्तफाबाद-लालई मार्ग के गड्ढे बने आफत
Updated Fri, 09 Jun 2017 11:54 PM IST
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हाथवंत मुस्तफाबाद मार्ग के गड्ढों को भरने की सुुध किसी ने नहीं ली।
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद/खैरगढ़। हाथवंत मुस्तफाबाद मार्ग के गड्ढों को भरने की सुुध किसी ने नहीं ली। गहरे गड्ढों के कारण गांव के किसानों के साथ स्कूली छात्रों तक को ही काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। नई सरकार आने के साथ गड्ढों के भरने की उम्मीद जगी थी। लेकिन 15 जून करीब आ गई लेकिन गड्ढे भरना तो दूर किसी ने मिट्टी तक नहीं डाली।
प्रदेश सरकार के गड्ढा मुक्त अभियान का असर शहर के ही साथ ग्रामीण मार्गों पर नहीं दिखाई दिया। फिरोजाबाद से होते हुए हाथवंत मुस्तफाबाद तक जाने वाले मार्ग पर गहरे गड्ढे विभाग की कार्यशैली की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। हाथवंत कस्बा के अंदर हो या फिर मुस्तफाबाद की ओर बढ़ने पर मार्ग में गड्ढे ही गड्ढे दिखाई देते हैं। हाल ये कि मंडी जाने वाले किसानों के ट्रैक्टर, डीसीएम फंसकर ही पलटते हैं। खैरगढ़ लालई मार्ग की हालत तो बद से बदतर हो गई, गहरे गड्ढे,उनमें भरा गांव का गंदा पानी सड़क को नाली का रूप ले लिया। प्रदेश में सत्ता बदलते ही सड़क के निर्माण की उम्मीद जगी थी लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग ने मार्ग निर्माण कराने की सुधि नहीं ली। क्या विभाग 15 जून से पहले इन मार्गों को गड्ढामुक्त कर पाएगा। या फिर यह अभियान भी सिर्फ कागजी साबित होगा।
इन गांवों के ग्रामीणों का होता है आवागमन
लालई, खैय्यातान, बनीपुरा, हलपुरा, हाथवंत से मुस्तफाबाद को जाने वाले गांव नंदपुर, इटौली, दपामई, नगला डहर, कुबेरपुर, नगला कल्यान, नगला मोहन हजारों की संख्या में आवागमन का मुख्य रास्ता है।
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प्रमुख कालेज और बैंक यहीं से होकर जाते हैं
हरेलाल उच्चतर माध्यमिक स्कूल हाथवंत, महाराज सिंह इंटर कालेज हाथवंत, ब्रजराज सिंह डिग्री कालेज कुबेरपुर व ब्लाक हाथवंत एवं थाना खैरगढ़ व भूमि विकास, जिला सहकारी बैंक पर आवागमन रहता है।
नई सरकार से थी उम्मीद, लेकिन फिरा पानी
लालई निवासी दीवान सिंह ने कहा कि पिछले दस वर्ष से मार्ग का निर्माण नहीं हुआ। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद उम्मीद जगी थी कि सड़क बन जाएगी। लेकिन 15 जून में पांच दिन शेष बचे कोई मिट्टी डालने तक नहीं आया।
लालई निवासी दिवारी लाल कहते हैं कि बड़े वाहन तो आना ही बंद हो गए। बाइक आसानी से नहीं निकल पाती। गड्ढों में फंसकर गिर जाते हैं।
हाथवंत निवासी राहुल जैन ने कहा कि मार्ग की हालत खस्ता है। सुधारने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। गड्ढामुक्त करने का अभियान सिर्फ कागजों पर दिखाई दे रहा है।
हाथवंत निवासी मोहनलाल कहते हैं कि शहरी सड़कों को भले ही सुधारा जा रहा हो। लेकिन गांव की सड़कें अभी तक सुधार नहीं हुआ। अधिकारी सिर्फ आंकड़ेबाजी करने में जुटे है।
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प्रदेश सरकार के गड्ढा मुक्त अभियान का असर शहर के ही साथ ग्रामीण मार्गों पर नहीं दिखाई दिया। फिरोजाबाद से होते हुए हाथवंत मुस्तफाबाद तक जाने वाले मार्ग पर गहरे गड्ढे विभाग की कार्यशैली की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। हाथवंत कस्बा के अंदर हो या फिर मुस्तफाबाद की ओर बढ़ने पर मार्ग में गड्ढे ही गड्ढे दिखाई देते हैं। हाल ये कि मंडी जाने वाले किसानों के ट्रैक्टर, डीसीएम फंसकर ही पलटते हैं। खैरगढ़ लालई मार्ग की हालत तो बद से बदतर हो गई, गहरे गड्ढे,उनमें भरा गांव का गंदा पानी सड़क को नाली का रूप ले लिया। प्रदेश में सत्ता बदलते ही सड़क के निर्माण की उम्मीद जगी थी लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग ने मार्ग निर्माण कराने की सुधि नहीं ली। क्या विभाग 15 जून से पहले इन मार्गों को गड्ढामुक्त कर पाएगा। या फिर यह अभियान भी सिर्फ कागजी साबित होगा।
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इन गांवों के ग्रामीणों का होता है आवागमन
लालई, खैय्यातान, बनीपुरा, हलपुरा, हाथवंत से मुस्तफाबाद को जाने वाले गांव नंदपुर, इटौली, दपामई, नगला डहर, कुबेरपुर, नगला कल्यान, नगला मोहन हजारों की संख्या में आवागमन का मुख्य रास्ता है।
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प्रमुख कालेज और बैंक यहीं से होकर जाते हैं
हरेलाल उच्चतर माध्यमिक स्कूल हाथवंत, महाराज सिंह इंटर कालेज हाथवंत, ब्रजराज सिंह डिग्री कालेज कुबेरपुर व ब्लाक हाथवंत एवं थाना खैरगढ़ व भूमि विकास, जिला सहकारी बैंक पर आवागमन रहता है।
नई सरकार से थी उम्मीद, लेकिन फिरा पानी
लालई निवासी दीवान सिंह ने कहा कि पिछले दस वर्ष से मार्ग का निर्माण नहीं हुआ। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद उम्मीद जगी थी कि सड़क बन जाएगी। लेकिन 15 जून में पांच दिन शेष बचे कोई मिट्टी डालने तक नहीं आया।
लालई निवासी दिवारी लाल कहते हैं कि बड़े वाहन तो आना ही बंद हो गए। बाइक आसानी से नहीं निकल पाती। गड्ढों में फंसकर गिर जाते हैं।
हाथवंत निवासी राहुल जैन ने कहा कि मार्ग की हालत खस्ता है। सुधारने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। गड्ढामुक्त करने का अभियान सिर्फ कागजों पर दिखाई दे रहा है।
हाथवंत निवासी मोहनलाल कहते हैं कि शहरी सड़कों को भले ही सुधारा जा रहा हो। लेकिन गांव की सड़कें अभी तक सुधार नहीं हुआ। अधिकारी सिर्फ आंकड़ेबाजी करने में जुटे है।