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लोदी काल की पहली मस्जिद: 25 साल पहले सहेजने के हुए प्रयास, फिर भूल गए अफसर; ऐसे खंडर में हो गई तब्दील
Thu, 30 Jul 2026 11:53 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 30 Jul 2026 11:53 AM IST
सार
आगरा के सिकंदरा स्थित 500 साल पुरानी लोदीकालीन मस्जिद संरक्षण के अभाव में खंडहर में तब्दील होती जा रही है। दो गुंबद गिरने के बाद पर्यटन और विरासत से जुड़े लोगों ने इसके संरक्षण की मांग तेज कर दी है।
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लोदी काल की पहली मस्जिद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
सिकंदरा में होली पब्लिक स्कूल के सामने 500 साल पुरानी लोदी काल की पहली मस्जिद का नामोनिशान मिटने के कगार पर है। इसे 25 साल पहले सहेजने के प्रयास किए गए थे, लेकिन परवान नहीं चढ़ सके। अब तीन में से दो गुंबद गिरने के बाद पर्यटन से जुड़े लोगों ने इसे बचाने की मांग की है।
साल 2001-02 में एएसआई के तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद केके मुहम्मद ने इसकी मरम्मत के लिए अडॉप्ट हेरिटेज स्कीम में रखा था। उनके तबादले के बाद इसका संरक्षण ही नहीं किया गया। तब यहां तत्कालीन संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित ने निरीक्षण कर इस धरोहर को बचाने के लिए काम का ब्योरा भी दिया था। आईटीसी होटल ग्रुप ने इसके संरक्षण के लगे रुचि दिखाई थी।
वर्ष 2010 में हो चुका विवाद
इस मस्जिद में साल 2010 में तीन दिन तक नमाज पढ़ने के नाम पर विवाद हुआ था। तत्कालीन सांसद के नेतृत्व में विरोध किया गया। इस पर यहां नमाज अदा करने से लोगों को रोक दिया गया। आगरा अप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन अध्यक्ष शमशुद्दीन के मुताबिक लोदी काल की मस्जिद को बचाने की जरूरत है। 500 साल पुराने आगरा के इतिहास, लोदी काल की वास्तुकला समझने के लिए उसका संरक्षण होना ही चाहिए।
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टूरिज्म गिल्ड के पूर्व अध्यक्ष राजीव सक्सेना के मुताबिक पुरातत्व के लिए काम कर रहे एनजीओ को आगे आकर इसे बचाना चाहिए। केवल ताज और यूनेस्को धरोहरों के लिए एनजीओ योजना लाते हैं, असलियत में ऐसी धरोहर बचाने की कोशिश की जाए। गाइड एसोसिएशन के ही ताहिरउद्दीन ताहिर ने कहा कि इसे धार्मिक नजरिये से देखने की जगह सांस्कृतिक और पुरातत्व धरोहर मानते हुए बचाया जाए।
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साल 2001-02 में एएसआई के तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद केके मुहम्मद ने इसकी मरम्मत के लिए अडॉप्ट हेरिटेज स्कीम में रखा था। उनके तबादले के बाद इसका संरक्षण ही नहीं किया गया। तब यहां तत्कालीन संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित ने निरीक्षण कर इस धरोहर को बचाने के लिए काम का ब्योरा भी दिया था। आईटीसी होटल ग्रुप ने इसके संरक्षण के लगे रुचि दिखाई थी।
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वर्ष 2010 में हो चुका विवाद
इस मस्जिद में साल 2010 में तीन दिन तक नमाज पढ़ने के नाम पर विवाद हुआ था। तत्कालीन सांसद के नेतृत्व में विरोध किया गया। इस पर यहां नमाज अदा करने से लोगों को रोक दिया गया। आगरा अप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन अध्यक्ष शमशुद्दीन के मुताबिक लोदी काल की मस्जिद को बचाने की जरूरत है। 500 साल पुराने आगरा के इतिहास, लोदी काल की वास्तुकला समझने के लिए उसका संरक्षण होना ही चाहिए।
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टूरिज्म गिल्ड के पूर्व अध्यक्ष राजीव सक्सेना के मुताबिक पुरातत्व के लिए काम कर रहे एनजीओ को आगे आकर इसे बचाना चाहिए। केवल ताज और यूनेस्को धरोहरों के लिए एनजीओ योजना लाते हैं, असलियत में ऐसी धरोहर बचाने की कोशिश की जाए। गाइड एसोसिएशन के ही ताहिरउद्दीन ताहिर ने कहा कि इसे धार्मिक नजरिये से देखने की जगह सांस्कृतिक और पुरातत्व धरोहर मानते हुए बचाया जाए।