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जिले में 39 सरकारी डेयरियां हुईं बंद
Updated Thu, 24 May 2018 11:21 PM IST
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जिले में 39 सरकारी डेयरियां हुईं बंद
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। सपा सरकार ने श्वेत क्रांति को बढ़ावा देने के लिए कामधेनु योजना शुरू की थी। योजना को तीन श्रेणियों में बांटा गया और पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर अनुदान दिया। जिले में तीनों श्रेणियों के माध्यम से लोगों ने योजना का लाभ लिया, लेकिन क्रियान्वयन ठीक से न होने के कारण आधे से ज्यादा डेयरियां बंद हो गई।
कामधेनु डेयरी दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में बेहद कारगर साबित होती, अगर पशुपालक व डेयरी संचालक ठीक से सरकार की योजना का लाभ उठाते। जिले में पांच लोगों ने कामधेनु डेयरी चलाने के लिए शासन से भारी अनुदान प्राप्त किया गया था और भारी भरकम अनुदान की रकम डकार गए। बिना ब्याज के मिली धनराशि को अन्य कार्यों में निवेश कर दिया। सरकार की महत्वाकांक्षी को पलीता लगा दिया। राज्य में सरकार बदली तो सबसे पहले सवा करोड़ रुपये की कामधेनु योजना पर ही फोकस किया गया और जांच शुरू करा दी गई। अप्रैल महीने में जिले भर में संचालित सरकारी डेयरियों की पड़ताल की गई तो पाया कि पांच में से एक ही डेयरी मानक को पूरा कर रही है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
मिनी व माइक्रो कामधेनु भी हुई फेल
जिले में मिनी कामधेनु डेयरियों की संख्या 29 व माइक्रो कामधेनु डेयरियां 39 पंजीकृत हैं। इन डेयरी संचालकों ने पशुपालन के लिए सरकार से योजना के तहत 25 फीसदी अनुदान प्राप्त कर ब्याज मुक्त धनराशि लेकर शुरू में तो मानक पूरे किए। जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे ही डेयरियों का स्वरूप बदल गया। वर्तमान में मिनी कामधेनु की 8 व माइक्रो कामधेनु की 25 डेरियां ही जिले में संचालित हो रही हैं।
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जिले में संचालित कामधेनु की पांच में से एक डेरी चल रही है, जबकि मिनी कामधेनु की 29 में से 8 व माइक्रो कामधेनु की 39 में से 25 डेयरियां संचालित है। बंद पाई जाने वाली डेयरियों की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। शासन के दिशा निर्देशानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
डा. केपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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कामधेनु डेयरी दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में बेहद कारगर साबित होती, अगर पशुपालक व डेयरी संचालक ठीक से सरकार की योजना का लाभ उठाते। जिले में पांच लोगों ने कामधेनु डेयरी चलाने के लिए शासन से भारी अनुदान प्राप्त किया गया था और भारी भरकम अनुदान की रकम डकार गए। बिना ब्याज के मिली धनराशि को अन्य कार्यों में निवेश कर दिया। सरकार की महत्वाकांक्षी को पलीता लगा दिया। राज्य में सरकार बदली तो सबसे पहले सवा करोड़ रुपये की कामधेनु योजना पर ही फोकस किया गया और जांच शुरू करा दी गई। अप्रैल महीने में जिले भर में संचालित सरकारी डेयरियों की पड़ताल की गई तो पाया कि पांच में से एक ही डेयरी मानक को पूरा कर रही है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
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मिनी व माइक्रो कामधेनु भी हुई फेल
जिले में मिनी कामधेनु डेयरियों की संख्या 29 व माइक्रो कामधेनु डेयरियां 39 पंजीकृत हैं। इन डेयरी संचालकों ने पशुपालन के लिए सरकार से योजना के तहत 25 फीसदी अनुदान प्राप्त कर ब्याज मुक्त धनराशि लेकर शुरू में तो मानक पूरे किए। जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे ही डेयरियों का स्वरूप बदल गया। वर्तमान में मिनी कामधेनु की 8 व माइक्रो कामधेनु की 25 डेरियां ही जिले में संचालित हो रही हैं।
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जिले में संचालित कामधेनु की पांच में से एक डेरी चल रही है, जबकि मिनी कामधेनु की 29 में से 8 व माइक्रो कामधेनु की 39 में से 25 डेयरियां संचालित है। बंद पाई जाने वाली डेयरियों की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। शासन के दिशा निर्देशानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
डा. केपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी