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भूमि का बंजर बनाता है रासायनिक उर्वरक
Updated Tue, 05 Dec 2017 11:18 PM IST
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फिरोजाबाद/टूंडला। कृषि विज्ञान केंद्र हजरतपुर पर विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों को मृदा भूमि की जानकारी दी गयी और किसानों को आय बढ़ाने के बारे में बताया गया। वहीं किसानों को भूमि की समय-समय पर मृदा की जांच कराने के लिए भी प्रेरित किया गया। शुभारंभ रूपेश कुमार सिंह ने किया।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विकास कानपुर के सह निदेशक डा. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि अधिक रासायनिक प्रयोग भूमि को बंजर बनाता है। इसलिए किसान अधिक से अधिक जैविक खाद का प्रयोग करें। अधिकतर मृदा में जीवांश (कार्बन) की कमी हो रही है। अच्छे उत्त्पादन के लिए इसका स्तर 0.5 प्रतिशत से अधिक और 0.8 प्रतिशत तक बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसान मृदा परीक्षण कराकर उर्वरक का संतुलन बनाए रखने का काम करें। इफको से आए क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदीप कुमार ने बताया कि जैव सागारिका व जल विलेय का प्रयोग करके उत्पादन लागत को घटाया जा सकता है। केंन्द्र के अध्यक्ष डा. तेजप्रकाश ने कहा कि किसानों को समय के साथ जागरूक होना होगा।
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गृह वैज्ञानिक डॉ. आशा ने कृषि आधारित लघु उद्योग लगाकर आय बढ़ाने पर जोर दिया। उद्यान वैज्ञानिक डा. सुभाष चंन्द्र शर्मा ने फसल चक्र अपनाने के साथ ही भूमि शोधन बढ़ाने पर बल दिया। वैज्ञानिक डा. ओमकार सिंह, डा. केडी दीक्षित, रामप्रकाश, मुकेश, श्रीराम, बौबी नचिगम, सुभाषचंद्र शर्मा, गंगा सिंह, अशोक कुमार आदि मौजूद रहे।
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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विकास कानपुर के सह निदेशक डा. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि अधिक रासायनिक प्रयोग भूमि को बंजर बनाता है। इसलिए किसान अधिक से अधिक जैविक खाद का प्रयोग करें। अधिकतर मृदा में जीवांश (कार्बन) की कमी हो रही है। अच्छे उत्त्पादन के लिए इसका स्तर 0.5 प्रतिशत से अधिक और 0.8 प्रतिशत तक बढ़ाना जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि किसान मृदा परीक्षण कराकर उर्वरक का संतुलन बनाए रखने का काम करें। इफको से आए क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदीप कुमार ने बताया कि जैव सागारिका व जल विलेय का प्रयोग करके उत्पादन लागत को घटाया जा सकता है। केंन्द्र के अध्यक्ष डा. तेजप्रकाश ने कहा कि किसानों को समय के साथ जागरूक होना होगा।
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गृह वैज्ञानिक डॉ. आशा ने कृषि आधारित लघु उद्योग लगाकर आय बढ़ाने पर जोर दिया। उद्यान वैज्ञानिक डा. सुभाष चंन्द्र शर्मा ने फसल चक्र अपनाने के साथ ही भूमि शोधन बढ़ाने पर बल दिया। वैज्ञानिक डा. ओमकार सिंह, डा. केडी दीक्षित, रामप्रकाश, मुकेश, श्रीराम, बौबी नचिगम, सुभाषचंद्र शर्मा, गंगा सिंह, अशोक कुमार आदि मौजूद रहे।